{"_id":"5dc3d0f68ebc3e5b116f7dfa","slug":"ips-anand-kulkarni-appointed-as-ssp-in-eow-team-investigating-pf-scam","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीएफ घोटाले की जांच कर रही ईओडब्ल्यू के एसएसपी बने आनंद कुलकर्णी, जांच टीम में हुए शामिल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीएफ घोटाले की जांच कर रही ईओडब्ल्यू के एसएसपी बने आनंद कुलकर्णी, जांच टीम में हुए शामिल
Thu, 07 Nov 2019 01:54 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 07 Nov 2019 01:54 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन में हुए पीएफ घोटाले की जांच कर रही ईओडब्ल्यू (आपराधिक अपराध अनुसंधान शाखा) की टीम में आईपीएस आनंद कुलकर्णी की तैनाती बतौर एसएसपी की गई है। ईओडब्ल्यू में यह पद लंबे समय से खाली चल रहा था।
विज्ञापन
इसके साथ ही आईपीएस कुलकर्णी बिजली विभाग के डीएचएफएल पीएफ घोटाले की जांच टीम में भी शामिल हो गए। बिजली कर्मचारियों के पीएफ घोटाले में गिरफ्तार आरोपियों यूपीपीएसल के महाप्रबंधक व ट्रस्ट के सचिव पीके गुप्ता और वित्त निदेशक सुधांशु द्विवेदी की तीन दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मिल गई है। दोनों आरोपियों को बुधवार की सुबह न्यायालय में पेश किया गया जहां बहस के बाद दोनों को तीन-तीन दिन की रिमांड पर पुलिस को सौंप दिया गया।
विज्ञापन
वहीं, दूसरी ओर उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन के पूर्व एमडी अयोध्या प्रसाद मिश्रा को मंगलवार देर रात गिरफ्तार करने के बाद बुधवार दोपहर बाद लगभग तीन बजे ईओडब्ल्यू और हजरतगंज पुलिस ने न्यायालय में पेश किया। न्यायालय ने पहले उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का फैसला सुनाया और उसके बाद पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए ईओडब्ल्यू की ओर से दाखिल आवेदन पर सुनवाई के बाद एपी मिश्रा को भी तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेजने का फैसला कर लिया। उनकी रिमांड अवधि ग़ुरुवार सुबह 10 बजे से शुरू होगी।
विज्ञापन
ईओडब्ल्यू के सूत्रों ने बताया कि पूर्व में गिरफ्तार किए गए पीके गुप्ता और सुधांशु द्विवेदी का एपी मिश्रा से आमना-सामना कराया जाएगा। इस दौरान पहले लिए गए निर्णयों, ट्रस्ट की बैठकों, इन अधिकारियों द्वारा की गई हेराफेरी के बारे में सभी से पूछताछ की जाएगी ताकि पता चल सके कि किस स्तर पर अधिक गड़बड़ी की गई है। एपी मिश्रा को न्यायालय में पेश करने से पहले भी किसी गोपनीय स्थान पर लंबी पूछताछ की गई।