डॉक्टर के सिर पर मिली दो चोटें, की गई थी हत्या, बेटी का सुराग नहीं
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निरालानगर के पॉश इलाके में रहने वाली 91 वर्षीय डॉ. मोना जबीन खान के सिर के पिछले हिस्से व एक माथे पर दो चोट पाई गई हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनकी हत्या की तरफ इशारा कर रही है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि उन्हें हादसे में भी चोट लग सकती है।
उधर, डॉक्टर की बेटी हुमा खान सुराग न मिलने से मामला और रहस्यमय बन गया है। शनिवार रात तक पुलिस हुमा के किसी रिश्तेदार के पास होने की बात कह रही थी लेकिन उसे ढूंढा नहीं जा सका है।
हसनगंज इंस्पेक्टर उदयवीर सिंह का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. मोना की मौत दो सप्ताह पहले हुई थी। डॉक्टर की हत्या की गई या वह हादसे का शिकार हुई? इसकी छानबीन की जा रही है। इंस्पेक्टर के मुताबिक, डॉक्टर को मारने के पीछे कोई वजह नहीं है।
यह हो सकता है कि मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटे फिरोज ने किसी बात पर नाराज होकर उन्हें मारा हो या फिर धक्का दे दिया हो, जिससे सिर पर चोट लगी और उनकी मौत हो गई। यह भी आशंका है कि डॉक्टर को गिरने से चोटें लगी हों। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से छानबीन कर रही है।
नहीं मिल रहे इन सवालों के जवाब
डॉक्टर की बेटी हुमा के गायब होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हुमा सोमवार को घर से निकली थी और वापस नहीं आई। यानी हुमा जब घर पर थीं उसके करीब एक सप्ताह पहले ही डॉक्टर की मौत हो चुकी थी। हुमा ने किसी को सूचना क्यों नहीं दी? वह अचानक कहां गायब हो गई?
कहीं हुमा के साथ भी तो कोई हादसा नहीं हो गया? डॉ. मोना की मौत हादसा है या हत्या? उनके साथ क्या हुआ था? डॉक्टर की मौत और हुमा के गायब होने के पीछे कहीं कोई कनेक्शन तो नहीं? ऐसे तमाम सवालों के जवाब पुलिस तलाश रही है।
गौरतलब है कि एलडीए के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर व 25 साल पहले मर चुके रहमत खान की पत्नी एमबीबीएस डॉ. मोना का सड़ा-गला शव उनके कमरे में पलंग पर पड़ा मिला था। वह मानसिक रूप से अस्वस्थ 55 वर्षीय बेटे फिरोज और 45 वर्षीय बेटी हुमा के साथ रहती थीं।
शनिवार शाम मकान से दुर्गंध आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी तब डॉ. मोना की मौत का पता चला। फिरोज मेरठ डवलपमेंट अथॉरिटी में इंजीनियर था। करीब आठ साल पहले उसने वीआरएस ले लिया था।
घर पर ही रहा बेटा, दिन भर बंद रखा दरवाजा
डॉ. मोना का बेटा फिरोज घर पर ही रहा। उसने दिनभर मकान का दरवाजा बंद रखा। कुछ रिश्तेदार और परिचित घर आए लेकिन फिरोज ने दरवाजा नहीं खोला। पोस्टमार्टम हाउस पर डॉ. मोना के रिश्ते के भाई वसीम ने ही सभी औपचारिकताएं पूरी कीं। पोस्टमार्टम के बाद उन्होंने ही शव सुपुर्द-ए-खाक किया।
कहीं बहन को भी मारकर दफना तो नहीं दिया शव!
जिस तरह फिरोज ने पिता की संदिग्ध हालात में मौत के बाद उनका शव घर पर ही गड्ढा खोदकर दफन कर दिया था, कहीं बहन हुमा को भी मारकर उसका शव दफन तो नहीं कर दिया। इलाके में रविवार को यही चर्चा गूंजती रही।
इलाकाई लोगों ने बताया कि फिरोज पुलिस को बरगलाने के लिए हुमा के पुराने नोट बदलने के लिए घर से जाने की कहानी सुना रहा है। उसने मां-बेटी दोनों की हत्या की है।
हो सकता है कि हुमा का शव उसने घर पर ही बगीचे अथवा किसी अन्य जगह पर गड्ढा खोदकर दफना दिया हो। इलाके की यह चर्चा पुलिस तक पहुंची तो होश उड़ गए। सीओ महानगर विशाल विक्रम ने डॉ. मोना के मकान का चप्पा-चप्पा खंगाला लेकिन हुमा का पता नहीं चला।
डॉ. के नाम पर करोड़ों की संपत्ति, कई मकानों पर हो चुका कब्जा
डॉ. मोना के नाम पर करोड़ों रुपये की अचल संपत्ति है। इलाकाई लोगों ने बताया कि पति रहमत खान एलडीए में अधिकारी थे इसलिए उन्होंने कई प्लॉट खरीदे थे। निरालानगर उन्होंने ही बसाया था।
वसीम ने बताया कि गोमती नगर में भी एक आलीशान मकान है जिसमें वकीलों ने कब्जा कर लिया है। डॉ. मोना की संपत्तियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस को दिए 500 रुपये के पुराने नोट
डॉक्टर के घर पर हुमा का सुराग ढूंढने के लिए हसनगंज पुलिस की टीम पहुंची तो फिरोज ने दरवाजा नहीं खोला। काफी कोशिश के बाद वह बाहर आया और पुलिसकर्मियों से आने की वजह पूछने लगा।
पुलिसकर्मियों ने भीतर आने की कोशिश की तो उन्हें रोकते हुए जेब से 500 रुपये की पुरानी करेंसी निकालकर देने लगा।