राम जन्मभूमि मंदिर पर कुछ भी गलत नहीं कहा: राम नाईक
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राज्यपाल राम नाईक का कहना है कि वह प्रदेश में समानांतर सरकार नहीं चला रहे हैं, बल्कि संविधान की मर्यादा में रहते हुए अपना काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि प्रदेश में गुड गवर्नेंस की काफी जरूरत है। कानून-व्यवस्था को भी वह गुड गवर्नेंस से ही जोड़कर देखते हैं।
नाईक ने कहा कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव भी चिंता करते हैं। सरकार के साथ बेहतर संबंधों की हिमायत करते हुए नाईक ने कहा कि संवैधानिक कार्यों का निर्वहन करते समय उनकी कोशिश यही रहती है कि इससे कटुता पैदा न हो।
22 जुलाई यानी बुधवार को बतौर राज्यपाल एक वर्ष का कार्यकाल पूरा करने जा रहे नाईक अपना रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने पेश करने की तैयारी भी कर रहे हैं। ‘अमर उजाला’ ने एक साल के कामकाज और प्रदेश के अनुभवों पर राम नाईक से विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत है प्रमुख अंश:-
एक वर्ष के कार्यकाल में जनता की संतुष्टि ज्यादा अहम
सवाल: अपने एक साल के कार्यकाल का मूल्यांकन किस रूप में करते हैं?
जवाब : एक वर्ष में मैंने जो भी किया उससे मैं तो संतुष्ट हूं, लेकिन जनता की संतुष्टि ज्यादा अहम है। कामों का ब्यौरा 22 जुलाई को प्रस्तुत करूंगा। यूपी के बारे में काफी देखने, सुनने और समझने का मौका मिला। 5800 लोग राजभवन में मिलने आए। लखनऊ में 206 कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। लखनऊ के बाहर 40 जिलों में जा चुका हूं और 110 कार्यक्रमों में शामिल हुआ।राजभवन में 32 सार्वजनिक कार्यक्रम किए। यूपी के बाहर भी 42 कार्यक्रमों में गया। इस विशाल जनसंपर्क का काफी लाभ मिला।
सवाल: प्रदेश सरकार के बारे में कैसा अनुभव रहा?
जवाब : सरकार के काम का आकलन अलग-अलग प्रकार से होता है। यूपी में गुड गवर्नेंस की काफी जरूरत है। मेरे और मुख्यमंत्री के बीच काफी स्नेहमय संबंध हैं। लेकिन सरकार अच्छी है या बुरी यह तय करने का अधिकार जनता का है। मुझे तो केवल यह देखना है कि सरकार संविधान के अनुसार जनहित में काम करे। इसके लिए कभी मुख्यमंत्री से मिलकर तो कभी पत्र भेजकर अपना दायित्व निभाता रहता हूं।
सरकार के लिए खड़ी होती हैं मुश्किलें
सवाल: कानून-व्यवस्था पर आप लगातार सरकार को आगाह करते रहे हैं। कितना असर दिखा?
जवाब : कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण के लिए मुख्यमंत्री काम कर रहे हैं। लेकिन मुझे लगता है कि और सुधार की जरूरत है। मैंने जब पद संभाला तो कानून-व्यवस्था को लेकर जैसी खबरें आ रही थीं, उसमें कमी नहीं हुई है। यह गुड गवर्नेंस का सवाल है। इसमें भ्रष्टाचार भी शामिल है। यह चिंता मेरी ही नहीं है। मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव भी इस पर चिंता व्यक्त करते रहते हैं। कानून-व्यवस्था ऐसा विषय है जिसे दलगत की भावना से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए।
सवाल : आप और मुख्यमंत्री एक-दूसरे के साथ मधुर संबंधों की बात तो करते हैं, लेकिन व्यवहार में कुछ और दिखता है। विधेयकों, एमएलसी मनोनयन या लोकायुक्त की नियुक्ति पर क्या आपके रुख से सरकार के लिए मुश्किलें नहीं खड़ी होतीं?
जवाब : मैं संवैधानिक जिम्मेदारी निभा रहा हूं। यही राज्यपाल का प्रथम कर्तव्य है। मैं बिना कटुता उत्पन्न किए काम करने का प्रयास करता हूं। यह उचित है या नहीं यह तय करने का अधिकार जनता का है और राष्ट्रपति का भी।
समानांतर सरकार चलाने के लगे आरोप
सवाल: कहा जाने लगा है कि आप समानांतर सरकार चला रहे हैं?
जवाब : यह आक्षेप जानकारी के अभाव या अन्य किसी उद्देश्य से हो सकता है। मैं तो संविधान की मर्यादा में ही कार्यरत हूं। यह योग्य है या नहीं यह तय करने का अधिकार राष्ट्रपति या जनता का है। अपनी खुशियां या दर्द बांटने के लिए लोग अगर मेरे पास आते हैं तो उससे मुझे और अच्छा काम करने की प्रेरणा मिलती है। इस पद की जनमानस में जो विश्वसनीयता है उसी कारण से लोग आते हैं। एक साल में मेरे पास 44,000 पत्र आए हैं।
सवाल: सरकार ने लोकायुक्त के चयन में चीफ जस्टिस की भूमिका समाप्त करने का फैसला किया है। आप इससे सहमत हैं?
जवाब : अभी यह अखबारों में आया है, इसलिए टिप्पणी करना ठीक नहीं होगा। यह सही है कि लोकायुक्त का कार्यकाल समाप्त हो गया है और मामला सुप्रीम कोर्ट में है। मैंने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी के नाते मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष व चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर इस ओर ध्यान आकृष्ट कराया है। भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए लोकायुक्त का पद अति महत्वपूर्ण है और यह पद न भरना राज्य के हित में नहीं है। जहां तक अध्यादेश या विधेयक लाने की चर्चा है तो मेरे पास सरकार की ओर से इसकी कोई जानकारी नहीं पहुंची है।
विश्वविद्यालयों का कामकाज पटरी पर आया
सवाल: उच्च शिक्षा में सुधार की कोशिशें कितनी सफल मानते हैं?
जवाब : मैंने जब शपथ ली थी तो कुलाधिपति व कुलपति में अंतर भी नहीं जानता था। यहां के कुलाधिपति को महाराष्ट्र में कुलपति कहते हैं। तब मैंने चार लक्ष्य रखे थे। कह सकता हूं कि विश्वविद्यालयों का कामकाज पटरी पर आया है। 25 में से 21 विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह फरवरी में ही पूरे हो गए। समय पर और नकलविहीन परीक्षा कराने में भी कुछ हद तक सफल रहे। परीक्षा परिणाम भी समय पर घोषित हो गए। नए सत्र में समय से प्रवेश की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। कुछ कमियां हैं, जिन्हें आने वाले दिनों में दूर करेंगे। अब चुनौती गुणवत्ता सुधार की है।
सवाल: लेकिन शिक्षकों के पद खाली हैं। ऐसे गुणवत्ता में कैसे सुधार संभव है?
जवाब : यह सही है। जहां भी शिक्षकों के पद रिक्त हैं, वहां सरकार के माध्यम से पदों को भरने की कार्यवाही जल्द से जल्द पूरी कराएंगे। इस पर सरकार से लगातार कहते भी रहते हैं।
सवाल: आप नकल विहीन परीक्षा का दावा कर रहे हैं, लेकिन बीते सत्र में ही फैजाबाद विवि से संबद्ध कुछ कॉलेजों में जमकर नकल हुई। विवि की टीम को कॉलेजों में घुसने नहीं दिया। उन कॉलेजों पर कार्रवाई तक नहीं हुई?
जवाब : नकल रोकने के लिए फैजाबाद विवि के कुलपति को पुलिस सहायता मुहैया कराई। कुलपित ने प्रशंसनीय प्रयास भी किया। नकल कराने वाले कॉलेजों पर कुलपति कार्रवाई कर रहे हैं। अगर कहीं कोई कमी है तो मुझे बताया जा सकता है। दिखवाया जाएगा।
फर्जी डिग्रियों और भर्ती में गड़बड़ी पर दिया जवाब
सवाल: प्रदेश में बड़े पैमाने पर फर्जी डिग्रियों का भंडाफोड़ हुआ है। लखनऊ विवि तक की फर्जी डिग्रियां बन गई हैं। कार्रवाई कुछ नहीं हुई?
जवाब : फर्जी डिग्रियों का मामला पुराना है। मेरठ व लखनऊ विवि में जो मामले सामने आए हैं, उन पर उचित कार्रवाई की जा रही है। यह कार्रवाई विवि प्रशासन और पुलिस के सहयोग से ही हो सकती है।
सवाल: उप्र लोक सेवा आयोग समेत अन्य भर्तियों को लेकर आंदोलन हो रहे हैं। आपको भी ज्ञापन दिए गए हैं। इलाहाबाद दौरे में आपने कार्रवाई कराने का आश्वासन भी दिया था। उसमें क्या हुआ?
जवाब : भर्तियों में गड़बड़ी की जो भी शिकायतें आती हैं, मुख्यमंत्री या संबंधित मंत्री के पास भेज देता हूं। इसके फालोअप की कोशिश भी करता हूं।
सवाल: विश्वविद्यालय छात्रों को कॉपियां दिखाने तथा पुनर्मूल्यांकन में आना-कानी कर रहे हैं। इसकी कोई व्यवस्था बनाएंगे?
जवाब : इस बारे में अभी पूरी जानकारी नहीं है। जानकारी लेने के बाद ही कुछ कह सकूंगा।
बयानों से राम विहिप जैसे संगठनों को मिलती है ऊर्जा
सवाल: राम मंदिर पर अपने बयानों से आप अक्सर चर्चा में रहते हैं। इससे विहिप जैसे संगठनों को भी ऊर्जा मिल जाती है?
जवाब : राम जन्मभूमि मंदिर के मामले में मैंने जो कहा उसे लेकर सिटीजन फॉर डेमोक्रेसी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच द्वारा याचिका खारिज हो जाने के बाद याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट गए। बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी। तात्पर्य यह है कि मैं जो कुछ कर या कह रहा हूं संविधान के अनुरूप ही है।
सवाल: आईपीएस अमिताभ ठाकुर के खिलाफ सरकार के एक्शन पर आपकी क्या राय है?
जवाब : जो लोग सरकारी सेवा में हैं और जो राज्य चला रहे हैं, दोनों की जिम्मेदारी है कि ऐसी स्थितियां न आने दें कि एक-दूसरे के विरोधी बनें। अब मामला न्यायालय में हैं, इसलिए कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।