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टीबी ग्रस्त बच्चों को गोद लें सभी चिकित्सा संस्थान : राज्यपाल

Sat, 20 Mar 2021 02:01 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 20 Mar 2021 02:01 AM IST
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institutes have to adopt TB patients
टीबी ग्रस्त बच्चों को गोद लें चिकित्सा संस्थान : आनंदी बेन
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सभी चिकित्सा संस्थान टीबी से ग्रस्त बच्चों को गोद लें। प्रत्येक संस्थान कम से कम 50 बच्चों की जिम्मेदारी उठाए। जिला चिकित्सालय, प्राइवेट चिकित्सालय व उच्च अधिकारी तथा समाज सेवी संस्थाओं को कम से कम 50 टीबी ग्रसित मरीजों की देखभाल का जिम्मा लेना चाहिए। इसके जरिये ही टीबी का सफाया होगा। यह बातें शुक्रवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहीं। वह केजीएमयू में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के 75 वें स्थापना दिवस समारोह व टीबी जागरूकता सप्ताह के तहत बोल रही थीं।
उन्होंने कहा कि टीबी के सफाए के लिए सभी का सहयोग जरूरी है। सभी कॉलेज एक-एक गांव को गोद लें। टीबी ग्रस्त बच्चों की देखभाल करें। उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्युदर में कमी लाने के लिए 100 प्रतिशत प्रसव अस्पताल में ही कराए जाएं। कुलपति डॉ. बिपिन पुरी ने कहा टीबी की बीमारी पर केजीएमयू में लगातार शोध हो रहे हैं। यूनिवर्सिटी अब तक 130 बच्चों को गोद ले चुकी है। 22 नए बच्चों को गोद लेने की तैयारी की है।
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पारदर्शी हुई कुलपति चयन की प्रक्रिया
राज्यपाल ने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए कुलपति की चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता आई है। बेहतर कुलपति ही संस्थान व बच्चों को आगे बढ़ा सकता है। पहले चयन में सिर्फ साक्षात्कार होता था। अब साक्षात्कार के साथ संवाद भी होता है।
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पांच प्रतिशत को दोबारा टीबी का खतरा
केजीएमयू रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने कहा कि देश की 40 प्रतिशत जनसंख्या टीबी के जीवाणुओं से प्रभावित है। देश में टीबी रोगियों की संख्या 27 लाख है। जिनकी इम्यूनिटी व पोषण अच्छा होता है, उनको संक्रमण बाद भी टीबी रोग नहीं होता है। टीबी को हरा चुके पांच प्रतिशत मरीजों में दोबारा बीमारी होने का खतरा रहता है। इसकी वजह यह है कि टीबी से ग्रस्त होने दौरान उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। बेहतर पौष्टिक आहार न मिलने पर दोबारा संक्रमण की आशंका रहती है।
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