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Lucknow News: तेजी के बजाय डिजिटल भुगतान के लिए करना पड़ रहा इंतजार
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परेशान तीमारदार।
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लखनऊ। केजीएमयू में डिजिटल भुगतान प्रणाली ठप होने से मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानी हो रही है। ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था काम नहीं कर रही, जिससे तेजी के बजाय लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
केस 1- बहराइच निवासी सुनील कुमार की मां का केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में इलाज चल रहा है। एचआरएफ काउंटर पर दवाएं लेने के बाद उनसे कहा गया कि ऑनलाइन भुगतान के लिए रुकना पड़ेगा। करीब एक घंटे बाद वह ऑनलाइन भुगतान कर पाए।
केस 2-
लखनऊ के ही निवासी प्रवीण गुप्ता ने बताया कि यूरोलॉजी विभाग में उनके पिता भरत कुमार का इलाज चल रहा है। एचआरएफ काउंटर पर नकद भुगतान में काफी समय लगता है। वहीं, ऑनलाइन भुगतान के लिए भी इंतजार करने को कहा जाता है।
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अस्पताल प्रशासन की ओर से डिजिटल भुगतान प्रोत्साहन की बात कहे जाने के बावजूद परिसर में ज्यादातर जगह ऑनलाइन भुगतान की सुविधा नहीं है। ओपीडी पंजीकरण, जांच और दवा खरीद जैसी सेवाओं के लिए मरीजों को नकदी का ही सहारा लेना पड़ रहा है। इससे लंबी कतारें लग रही हैं और भुगतान में देरी हो रही है। डिजिटल भुगतान की उम्मीद से आए मरीजों को नकदी निकालने बाहर जाना पड़ता है। यह उनका समय बर्बाद करता है और तनाव भी देता है। कर्मचारियों को भी मैन्युअल लेनदेन संभालने में कठिनाई हो रही है, जिससे कार्यभार बढ़ता है। हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) में ऑनलाइन भुगतान की बात कही गई है, लेकिन लोगों को एक घंटा इंतजार करने के लिए कहा जा रहा है। केजीएमयू प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के मुताबिक, नए सॉफ्टवेयर की व्यवस्था व्यवहार में आने पर ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था पूरी तरह से लागू हो जाएगी।
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केस 1- बहराइच निवासी सुनील कुमार की मां का केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में इलाज चल रहा है। एचआरएफ काउंटर पर दवाएं लेने के बाद उनसे कहा गया कि ऑनलाइन भुगतान के लिए रुकना पड़ेगा। करीब एक घंटे बाद वह ऑनलाइन भुगतान कर पाए।
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केस 2-
लखनऊ के ही निवासी प्रवीण गुप्ता ने बताया कि यूरोलॉजी विभाग में उनके पिता भरत कुमार का इलाज चल रहा है। एचआरएफ काउंटर पर नकद भुगतान में काफी समय लगता है। वहीं, ऑनलाइन भुगतान के लिए भी इंतजार करने को कहा जाता है।
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अस्पताल प्रशासन की ओर से डिजिटल भुगतान प्रोत्साहन की बात कहे जाने के बावजूद परिसर में ज्यादातर जगह ऑनलाइन भुगतान की सुविधा नहीं है। ओपीडी पंजीकरण, जांच और दवा खरीद जैसी सेवाओं के लिए मरीजों को नकदी का ही सहारा लेना पड़ रहा है। इससे लंबी कतारें लग रही हैं और भुगतान में देरी हो रही है। डिजिटल भुगतान की उम्मीद से आए मरीजों को नकदी निकालने बाहर जाना पड़ता है। यह उनका समय बर्बाद करता है और तनाव भी देता है। कर्मचारियों को भी मैन्युअल लेनदेन संभालने में कठिनाई हो रही है, जिससे कार्यभार बढ़ता है। हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) में ऑनलाइन भुगतान की बात कही गई है, लेकिन लोगों को एक घंटा इंतजार करने के लिए कहा जा रहा है। केजीएमयू प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के मुताबिक, नए सॉफ्टवेयर की व्यवस्था व्यवहार में आने पर ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था पूरी तरह से लागू हो जाएगी।