हो जाएं सावधान यूपी के ब्लड बैंक बांट रहे हैं जानलेवा खून
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निजी ब्लड बैंक से लिया गया खून मरीज की जान बचाने की जगह जानलेवा बीमारियों का कारण बन रहा है। यह एड्स, हेपेटाइटिस बी-सी, मलेरिया, अवैध संबंधों से होने वाली बीमारियों का कारण बन सकता है।
ये खुलासा स्वयं खाद्य एवं औषधि प्रशासन(एफडीए) ने कोहली व शेखर अस्पताल के ब्लड बैंकों पर की गई छापेमारी के बाद किया था। कुछ साल पहले छापेमारी के दौरान पता चला था कि ब्लड बैंक संचालकों ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए रक्त की जांच एलाइजा पद्धति की जगह रैपिड किट से की थी।
इससे खून की जांच नहीं हो पाती है। इस मामले में एफएसडीए ने कोहली ब्लड बैंक की चौक और शेखर हॉस्पिटल एंड ब्लड बैंक को नोटिस भी भेजी थी।
एफएसडीए ने चौक स्थित इसी कोहली ब्लड बैंक में छापेमारी में पता चला था कि कागजों में ही रक्त की जांच हो रही थी। रिकार्ड के अनुसार खून में एचआईवी, मलेरिया, हेपेटाइटिस व अन्य जांचें हो चुकी थीं लेकिन जब जांच टीम ने ब्लड बैग की जांच की तो छह यूनिट रक्त को बिना टेस्ट के ही आपूर्ति के लिए जारी कर दिया था।
ब्लड बैंक से ब्लड लेना सुरक्षित
यहीं नहीं कोहली ब्लड बैंक से एक यूनिट रक्त इलाहाबाद के नर्सिंगहोम में भेज गया था जबकि वहां कोल्ड चेन उपलब्ध नहीं थी। वहीं शेखर हॉस्पिटल एंड ब्लड बैंक में प्रोसेसिंग शुल्क 850 रुपये यूनिट की जगह 13 सौ रुपये मरीजों से वसूले जाने का खुलासा हुआ था।
ब्लड बैंक में बिना जांच के ब्लड बैग रखे थे। ब्लीडिंग रूम में इमरजेंसी मेडिसिन की व्यवस्था भी नहीं मिली थी। इसी के बाद अस्पताल प्रशासन को नोटिस जारी कर दी गई थी।
नियमानुसार ब्लड बैंकों को एलाइजा पद्धति से ही रक्त की जांच करनी चाहिए। इस जांच में तीन से चार घंटे लगते हैं। रैपिड टेस्ट से जानलेवा संक्रमण का पता नहीं चलता है। अब न्यूक्लिक एसिड टेस्ट से जांच की जा रही है। इसलिए सरकारी ब्लड बैंक से ही रक्त लेना सुरक्षित होता है।