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लखनऊ की जिस घटना ने डाल दी विभाजन की नींव
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लखनऊ की जिस घटना ने डाल दी विभाजन की नींव
बात 1937 की है। मौलाना अबुल कलाम आजाद चाहते थे कि कांग्रेस और मुस्लिम लीग मिलकर सरकार बनाएं ताकि अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो नीति सफल न हो। पंडित गोविंद वल्लभ पंत मंत्रिमंडल में सीटों के बंटवारे पर लखनऊ निवासी मुस्लिम लीग नेता और मो. अली जिन्ना के सहयोगी चौधरी खलीकुज्जमां से मिले। चौधरी ने मंत्रिमंडल की कुल संख्या में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी मांगी। बातचीत के लिए मौलाना आजाद, खलीकुज्जमां से मुलाकात करने लखनऊ आए। मौलाना आजाद ने खलीकुज्जमां से गठबंधन की शर्तों पर बातचीत की। ‘छोटा दशक-बड़े लक्ष्य’ पुस्तक में संस्मरण है, ‘मौलाना आजाद 15 जुलाई 1937 को फिर लखनऊ आए। उन्होंने पंत जी के साथ चौधरी खलीकुज्जमां से बात की और एक तहरीर उनके सामने रखी। इसमें लिखा था कि मुस्लिम लीग सरकार में शामिल होने के साथ ही स्वतंत्र समूह के रूप में काम करना बंद कर देगी। मुस्लिम लीग के सदस्य कांग्रेस पार्टी का हिस्सा बन जाएंगे। संयुक्त प्रांत मुस्लिम लीग संसदीय बोर्ड भंग कर दिया जाएगा। चौधरी खलीकुज्जमां ने तहरीर पढ़ी और कहा, ‘मौलाना यह तो बहुत ही अजीब तहरीर है। आप मुझसे मुस्लिम लीग संगठन की मौत के परवाने पर दस्तखत करने को कह रहे हैं।’ एक दिन पंत ने खलीकुज्जमां को फोन कर निर्णय पूछा। खलीकुज्जमां ने कहा, ‘बाहर हूं कल सुबह लखनऊ पहुंचकर मिलूंगा।’ अगले दिन खलीकुज्जमां लखनऊ स्टेशन से सीधे पंत जी के निवास पर गए। वहां मौलाना आजाद भी बैठे हुए चाय पी रहे थे। खलीकुज्जमां ने समझौते वाली तहरीर मौलाना को वापस करते हुए कहा, ‘हम विपक्ष में बैठेंगे।’ इसी के बाद कांग्रेस व मुस्लिम लीग में दूरी बढ़ती गई। नतीजा देश के बंटवारे के रूप में सामने आया।’
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बात 1937 की है। मौलाना अबुल कलाम आजाद चाहते थे कि कांग्रेस और मुस्लिम लीग मिलकर सरकार बनाएं ताकि अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो नीति सफल न हो। पंडित गोविंद वल्लभ पंत मंत्रिमंडल में सीटों के बंटवारे पर लखनऊ निवासी मुस्लिम लीग नेता और मो. अली जिन्ना के सहयोगी चौधरी खलीकुज्जमां से मिले। चौधरी ने मंत्रिमंडल की कुल संख्या में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी मांगी। बातचीत के लिए मौलाना आजाद, खलीकुज्जमां से मुलाकात करने लखनऊ आए। मौलाना आजाद ने खलीकुज्जमां से गठबंधन की शर्तों पर बातचीत की। ‘छोटा दशक-बड़े लक्ष्य’ पुस्तक में संस्मरण है, ‘मौलाना आजाद 15 जुलाई 1937 को फिर लखनऊ आए। उन्होंने पंत जी के साथ चौधरी खलीकुज्जमां से बात की और एक तहरीर उनके सामने रखी। इसमें लिखा था कि मुस्लिम लीग सरकार में शामिल होने के साथ ही स्वतंत्र समूह के रूप में काम करना बंद कर देगी। मुस्लिम लीग के सदस्य कांग्रेस पार्टी का हिस्सा बन जाएंगे। संयुक्त प्रांत मुस्लिम लीग संसदीय बोर्ड भंग कर दिया जाएगा। चौधरी खलीकुज्जमां ने तहरीर पढ़ी और कहा, ‘मौलाना यह तो बहुत ही अजीब तहरीर है। आप मुझसे मुस्लिम लीग संगठन की मौत के परवाने पर दस्तखत करने को कह रहे हैं।’ एक दिन पंत ने खलीकुज्जमां को फोन कर निर्णय पूछा। खलीकुज्जमां ने कहा, ‘बाहर हूं कल सुबह लखनऊ पहुंचकर मिलूंगा।’ अगले दिन खलीकुज्जमां लखनऊ स्टेशन से सीधे पंत जी के निवास पर गए। वहां मौलाना आजाद भी बैठे हुए चाय पी रहे थे। खलीकुज्जमां ने समझौते वाली तहरीर मौलाना को वापस करते हुए कहा, ‘हम विपक्ष में बैठेंगे।’ इसी के बाद कांग्रेस व मुस्लिम लीग में दूरी बढ़ती गई। नतीजा देश के बंटवारे के रूप में सामने आया।’