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'मायाराज' में हुआ 12 हजार करोड़ का गोलमाल

Mon, 01 Dec 2014 01:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Mon, 01 Dec 2014 01:18 PM IST
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Income tax to probe housing plot alocation in Yadav Singh case.

प्राधिकरण के चीफ इंजीनियर यादव सिंह पर छापे की कार्रवाई के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर आयकर विभाग पिछली सरकार में आए कुछ बड़े प्रोजेक्टों और जमीन आवंटनों की जांच कर सकता है।

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बसपा शासनकाल में बड़े पैमाने पर ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट लांच कर बिल्डरों को जमीन दी गई। नोएडा फेज तीन और एक्सप्रेस वे पर कई नामी-गिरामी बिल्डरों को जमीन एलॉट हुई। मात्र 10 फीसदी रकम लेकर भूखंड दे दिए गए। बाकी किस्त तय कर दी।
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किस्त न देने पर कई बिल्डर डिफॉल्टर भी घोषित हो चुके हैं। करीब 12000 करोड़ रुपये का बकाया सामने आ रहा है। आयकर इस पर भी नजर रखेगा कि सिर्फ 10 फीसदी रकम लेकर बिल्डरों को जमीन देने के पीछे कहीं कमीशनखोरी का मामला तो नहीं बन रहा।
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फार्म हाउस आवंटन की दोबारा हो सकती है जांच

Income tax to probe housing plot alocation in Yadav Singh case.

2009-10 में 155 फार्म हाउस योजना भी आई थी। इनके आवंटन में धांधली का आरोप लगने के बाद लंबी जांच भी चली। हालांकि, जांच कर रहे लोकायुक्त इसे क्लीन चिट दे चुके हैं, मगर आयकर छापे से मिले सबूतों के आधार पर इसकी फाइलें भी खंगाली जा सकती हैं।

कई कॉरपोरेट भूखंड भी ओपन एंडेड स्कीम के जरिये इस दौरान आवंटित हुए थे। इनको लेकर विवाद भी हुए थे। वे भी अब जांच के घेरे में आ सकते हैं।

प्राधिकरण में जांच के लिए टीम का आना जारी
आयकर विभाग की टीम शनिवार को प्राधिकरण आ चुकी है। टीम ने कई जमीन आवंटनों और परियोजनाओं के टेंडर का विवरण मांगा है। सोमवार को प्राधिकरण दफ्तर खुलने पर यह रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

जानकार बताते हैं कि छापे में जिस तरह से मनी लॉन्ड्रिंग की बात सामने आई, उससे प्रवर्तन निदेशालय भी जांच कर सकता है। वहीं, इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग कर चुके नोएडा जन सहयोग समिति के प्रमुख चौ. बिहारी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट जाने की भी बात कही है।

रजिस्ट्री के अधिकारियों से भी होगी पूछताछ

Income tax to probe housing plot alocation in Yadav Singh case.

आयकर विभाग जांच के लिए रजिस्ट्री विभाग की भी मदद ले सकता है। दरअसल, जिन 40 फर्जी कंपनियों का नाम सामने आया है, उनका रजिस्ट्रेशन रजिस्ट्री विभाग में ही हुआ है।

मूल कंपनी से बनने वाली सब्सिडियरी कंपनी और चेंज इन कांस्टीट्यूशन पर स्टांप शुल्क से छूट का प्रावधान भी उसी दौरान आया। इसका कंपनियों ने फायदा उठाया है।

हालांकि, इसके लिए शासन से आवश्यक निर्देश भी जारी किए थे, इसलिए दोनों जांच संस्थाएं उस समय के रजिस्ट्री अधिकारियों से भी पूछताछ कर सकती हैं।

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