मामूली से दिखने वाले ये लक्षण हो सकते हैं हार्ट अटैक का संकेत
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वह शनिवार से शुरू होने वाले कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी के 23वें अधिवेशन कॉर्डिकॉन-2017 के बारे में बात कर रहे थे। वहीं डॉ. गौरव चौधरी ने बताया कि साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में दो दिन तक होने वाली इस कॉन्फ्रेंस में देश भर के हृदय रोग विशेषज्ञ बीमारी और उसके इलाज के नए तरीकों पर चर्चा करेंगे।
डॉ. शरद ने बताया कि दिल का दौरा पड़ने के बाद 10 से 15 मरीज रोजाना लारी कार्डियोलॉजी आते हैं। अधिकतर मरीज दो से तीन घंटे बाद पहुंचते हैं। जो फिजीशियन ऐसे मरीजों को रेफर करते हैं वह थोड़ी सी सावधानी बरतकर ऐसे मरीजों को बचा सकते हैं।
महिलाओं के इलाज में लापरवाही
उन्हें खून का थक्का गलाने वाली दवा मरीज को देनी चाहिए। बाजार में ऐसी दवाएं आ गई हैं, जिन्हें दिल का दौरा पड़ने के बाद दे दिया जाए तो वह धमनियों में रुकावट दूर हो जाती है।
महिलाएं दिल की बीमारी के इलाज में लापरवाही करती हैं। वह दवाएं नहीं खाना चाहती। यही नहीं गंभीर स्थिति में जो महिलाएं अस्पताल पहुंचती हैं उनको एंजियोप्लास्टी की सुविधा भी जल्दी नहीं मिल पाती है।
केजीएमयू के में हुई एक स्टडी में बात सामने आई है। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. शरद चंद्रा, डॉ. गौरव चौधरी और डॉ. अक्षय प्रधान ने बताया कि उनके विभाग में हार्ट अटैक के बाद आने वाले मरीजों में 52 से 55 फीसदी पुरुष होते हैं, जबकि 45 से 48 फीसदी महिलाएं।