वर्दीवालों की ‘दोस्ती’ ने मुखबिर को बना दिया था खूंखार अपराधी, 13 साल की उम्र में शुरू की थी मुखबिरी
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...महज 13 साल की उम्र से उसने पुलिस के लिए मुखबिरी शुरू की। कुछ ही साल में वह इलाके के कई पुलिसकर्मियों का चहेता बन गया और विवादित जमीनों में दखलंदाजी के साथ ही प्रॉपर्टी डीलिंग शुरू कर दी। पुलिस की शह पर उसने पुराने लखनऊ और रिंग रोड की बेशकीमती जमीनों के सौदे कराकर जेबें भरी और पुलिसवालों को भी कमाई कराई।
उसने बाहुबली मुख्तार अंसारी और माफिया मुन्ना बजरंगी से भी नजदीकियां बढ़ाईं। धीरे-धीरे अकील पुलिसवालों का दोस्त बन गया और उनके साथ उठने-बैठने लगा। अकील के घर पर अक्सर पुलिसवालों की पार्टियां होती थीं। आयुष और उसके पिता श्रवण साहू की हत्या के आरोप से खुद को बचाने के लिए उसने पुलिसकर्मियों के साथ ऐसी साजिशें रचीं कि अधिकारियों के होश उड़ गए। पुलिस और अपराधी का गठजोड़ खुलने पर कई पुलिसकर्मियों को अपनी वर्दी गंवानी पड़ी थी।
ठाकुरगंज के हसियामऊ निवासी अकील अंसारी खाकी की शह पर बड़ा अपराधी बना गया था। वर्ष 2005 के आसपास उसने कैंपवेल रोड पर विवादित जमीनों में हस्तक्षेप शुरू किया। बालागंज पुलिस चौकी के सिपाहियों की मदद से उसने इलाके में अपना दबदबा बनाया और पुलिसकर्मियों के संरक्षण से मकान खाली कराने व कब्जा दिलाने का काम करने लगा।
अकील खुले हाथ से रकम लुटाता था। उसने पुलिसकर्मियों को खूब कमाई कराई। भरोसा जताने के लिए वह हर डील में पुलिस को ज्यादा हिस्सा देता था। उस वक्त रिंग रोड पर प्लॉटिंग का काम शुरू ही हुआ था। अकील ने रिंग रोड की जमीनों पर नजर डाली और चौकी की पुलिस से सेटिंग कर करोड़ों रुपये के सौदे कराए।
पुलिस की नजदीकियों के चलते हो गया बेखौफ
वर्ष 2007 में कुख्यात चमन का एनकाउंटर कराकर वह एसटीएफ और जिला पुलिस के कई दरोगाओं का चहेता बन गया। तीन साल पहले अमीनाबाद में कैंट के पार्षद पप्पू द्विवेदी की हत्या के आरोपी फरहान को पकड़वाकर वह राजधानी की क्राइम ब्रांच के करीब आया। धीरे-धीरे उसने पूरी क्राइम ब्रांच में मजबूत पकड़ बना ली।
पुलिस सूत्र बताते हैं कि वह चुनाव लड़कर सफेदपोश बनने के लिए एक विधायक के साथ उठने-बैठने लगा। विधानसभा चुनाव के दौरान पुराने लखनऊ में विधायक के पोस्टर में उसकी फोटो देखकर सनसनी फैली थी। पुराने लखनऊ में जमीन के सारे विवाद वही निपटाता था।
पुलिस से नजदीकियों के चलते वह बेखौफ हो गया था। यही वजह थी कैंपवेल रोड पर आयुष साहू की गोली मारकर हत्या कर वह भाग निकला। तलाश हुई तो साथी पुलिसकर्मी काम आए। कृष्णानगर में नाटकीय तरीके से उसकी गिरफ्तारी दिखाई गई।
जेल में अकील ने माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी के संपर्क में आकर आयुष की हत्या में पैरवी कर रहे उसके पिता श्रवण साहू को रास्ते से हटाने की साजिश रची। हालांकि, एसटीएफ ने सर्विलांस के जरिए 27 फरवरी 2016 को सुल्तानपुर निवासी मुन्ना के शूटर राज सिंह, उन्नाव के राघवेंद्र, हरदोई के पवन और तालकटोरा के अभय वर्मा को गिरफ्तार कर इस साजिश का खुलासा किया था।
जमानत से छूटने के बाद श्रवण साहू को धमकाने लगा
कुछ समय बाद जमानत पर छूटे अकील ने खुद व गुर्गों की मदद से श्रवण साहू व गवाहों को धमकाना शुरू कर दिया। श्रवण नहीं माने तो उसने क्राइम ब्रांच के दरोगा धीरेंद्र शुक्ला, सिपाही धीरेंद्र यादव और अनिल सिंह की मदद से श्रवण साहू पर अपनी हत्या की सुपारी देने की फर्जी कहानी बनाकर पारा थाने में एफआईआर दर्ज करा दी।
एफआईआर को सही ठहराने के लिए पुलिस ने कामरान, अफजल, तमीम और अनवर नाम के चार शूटरों की असलहों समेत गिरफ्तारी भी दिखा दी थी। बाद में इस खेल का खुलासा हुआ तो तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी ने दरोगा धीरेंद्र शुक्ला, सिपाही धीरेंद्र यादव और अनिल सिंह को बर्खास्त करने के साथ 16 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके बाद अकील अपनी जमानत तुड़वाकर जेल चला गया और वहीं से श्रवण साहू की हत्या की साजिश रची।
जानिए क्या थी वारदात
सआदतगंज के दालमंडी निवासी 26 वर्षीय आयुष साहू घर के पास ही तेल मिल चलाता था। 16 अक्तूबर की रात वह पुराना चबूतरा निवासी दोस्त नितिन उर्फ दिवाकर व उसके चचेरे भाई लकड़मंडी में रहने वाले आकाश कुमार के साथ बीयर पीने कैंपवेल रोड किशोरगंज स्थित मॉडल शॉप पर गया था।
वहां बीयर खरीदने को लेकर उसका ठाकुरगंज के हसियामऊ निवासी अकील और उसके दोस्त अजीम उर्फ बाबू सिद्दीकी से विवाद हो गया। अकील ने पिस्टल से ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं जिसमें आयुष की मौत हो गई व दिवाकर और आकाश गंभीर रूप से घायल हो गए। आयुष के पिता श्रवण ने अकील अंसारी और अजीम उर्फ बाबू के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया था।
आयुष संभालता था पूरा परिवार
अकील ने पांच साल में सीरियल किलर सलीम से बड़ा गैंग बना लिया था। बालागंज इलाके में तूती बोलती थी। पुलिस की नाक के नीचे ड्रग्स बिकवाता था। 2009 में ठाकुरगंज में मारपीट, गाली-गलौज व जानमाल की धमकी की पहली रिपोर्ट दर्ज हुई थी। उस पर हत्या, हत्या की कोशिश, लूट, चोरी, वसूली, बलवा, गैंगस्टर समेत कई मामलों में 13 मुकदमे दर्ज हैं। उसने एसओजी का दरोगा बनकर अलीगंज के सेक्टर क्यू से एक युवक के अपहरण की कोशिश की थी। जुआ खेलने को लेकर अकील की प्रताड़ना से परेशान होकर एक युवक ने गोमती में कूदकर जान दे दी थी।
आयुष संभालता था पूरा परिवार
आयुष साहू पूरे परिवार को संभालता था। बेटे की मौत से मां निर्मला बेहाल हो गई जबकि बहन अल्पना व स्वाति आज तक सदमे में हैं। आयुष तेल मिल चलाता था जबकि उसका बड़ा भाई सुनीत मेडिकल स्टोर चलाता है।
इन मामलों में सुनवाई गई सजा
पैसे, मोबाइल भी लूटा था
पुलिस ने केस दर्ज कर विवेचना की तो पता चला कि अकील ने आयुष को गोली मारने के बाद पैसे, मोबाइल लूट लिया था। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त हथियार, लूटे रुपये और मोबाइल बरामद किया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।
संज्ञान लेने के बाद मामला सत्र न्यायालय के सुपुर्द किया गया, जहां कोर्ट ने एक फरवरी 2016 को आरोपियों पर आरोप तय करते हुए गवाही शुरू की। सुनवाई में अभियोजन ने घायल हुए दिवाकर, आकाश समेत 11 लोगों की गवाही कराई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने सजा सुनाई।
इन मामलों में सुनवाई गई सजा
अकील को हत्या के आरोप में आजीवन कारावास और 50 हजार जुर्माना, हत्या के प्रयास के आरोप में 10 साल का कठोर कारावास व 25 हजार जुर्माना, लूटपाट के आरोप में 10 साल के कठोर कैद के साथ 25 हजार जुर्माना, लूट का सामान बरामद होने पर दो साल कैद और हजार का जुर्माना, गाली-गलौज के आरोप में एक साल की कैद व 2500 रुपये का जुर्माना, जान-माल की धमकी के आरोप में एक साल कैद, 2500 रुपये जुर्माने के साथ हथियार रखने के आरोप में 2 साल की सजा और 500 रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। अजीम को जान-माल की धमकी और गाली-गलौज के आरोप में 1-1 साल कैद और कुल 5000 रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। इसके पहले अकील अंसारी को जेल से लाया गया।