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सुसाइड नोट में लिखीं बददुआएं और मंदिर में फांसी लगाकर दे दी जान

Sat, 10 Oct 2015 10:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो/लखनऊ Updated Sat, 10 Oct 2015 10:48 AM IST
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ias pre qualified girl committed suicide in kanpur

आईएएस की प्री परीक्षा पास कर चुकी बिठूर की मोनी ने शुक्रवार को मंदिर के घंटे से दुपट्टा बांधकर फांसी लगा ली। मोनी दो दिन से लापता थी। कानपुर के नवाबगंज थाने में गुमशुदगी भी दर्ज कराई गई थी। बैग से मिले सुसाइड नोट में उसने अपनी चाची और दादी पर जिंदगी बर्बाद करने का आरोप लगाया है। हालांकि डेढ़ पन्ने के इस पत्र में आत्महत्या की वजह का जिक्र नहीं किया है।

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मोनी (23) बिठूर के शिवदीनपुरवा निवासी अयोध्या प्रसाद निषाद की मंझली बेटी थी। अयोध्या की नवाबगंज में सब्जी की आढ़त है। भाई आशीष ने बताया कि मोनी ने पिछले साल ग्रेजुएशन किया था।
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वह आईएएस की तैयारी कर रही थी। पहले ही प्रयास में उसने प्री-परीक्षा पास कर ली थी। सात अक्तूबर को सुबह 8 बजे कोचिंग के लिए निकली थी। नवाबगंज में चाचा राजा की दुकान  साइकिल खड़ी की। इसके बाद से वह लापता थी।
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आठ अक्तूबर को नवाबगंज थाने में गुमशुदगी लिखाई गई।

शुक्रवार को घर से करीब 13 किमी दूर रामेश्वर धाम मंदिर में उसका शव मिलने की सूचना मिली। मंदिर की पुजारिन उर्मिला ने पुलिस को बताया कि सुबह करीब साढ़े 10 बजे यह लड़की (मोनी) मंदिर के एक कोने में पढ़ते दिखी थी।

दोपहर करीब एक बजे वह फिर मंदिर पहुंचीं तो देखा कि लड़की का शव लटका हुआ था। इंस्पेक्टर संजय मिश्र ने बताया कि लड़की ने सुसाइड नोट में वजह का जिक्र नहीं किया है। शव का पोस्टमार्टम शनिवार को कराया जाएगा।

यह लिखा सुसाइड नोट में

ias pre qualified girl committed suicide in kanpur

‘मम्मी-पापा माफ कर देना, मेरे भाई मुझे कितना चाहते थे कितना ज्यादा हौसला देते थे कि तुम आईएएस जरूर बनोगी। उसी हौसले की वजह से मैंने अपना दिन-रात एक कर दिया।

यहां तक कि मुझे खाना खाने तक का समय नहीं था। एक ही पल में मनोहर की पत्नी डल्लापुरवा और श्रीराम बड़कू की पत्नी डल्लापुरवा, इन लोगों ने सब बर्बाद कर दिया। मेरी बददुआ है इन लोगों को.........। आज मैं जितना तड़प रही हूं इससे ज्यादा तड़पेंगे। इन लोगों की वजह से एक महीने से सो नहीं पायी हूं। इतनी ज्यादा दुखी हूं, डिप्रेशन में हूं।

क्या बिगाड़ा था मैंने इन लोगों का। आज मैं अपने परिवार से दूर हूं इन लोगों की वजह से। 18 सितंबर के बाद से मैं कोचिंग भी नहीं गई। मैं कोचिंग के लिए जाती थी पर मेरा मन ही नहीं लग रहा था। मैं कैफे चली जाती थी, वहां पर तीन-तीन घंटे कंप्यूटर में काम करती रहती थी’।

पुलिस का कहना है कि मनोहर उसके चाचा और बड़कू बाबा हैं। मनोहर ने तीन महीने पहले ही डल्लापुरवा में दूसरी शादी की है। उसकी दादी भी डल्लापुरवा की रहने वाली हैं।

परेशान करते सवाल
मोनी नवाबगंज में आने के बाद सात तारीख को अचानक कहां गई? आत्महत्या करने के पहले तक वह कहां और किन हालात में रही। आखिर उसकी दो चाचियों ने उसके साथ ऐसा क्या किया? ये सवाल परिवार और पुलिस दोनों को परेशान कर रहे हैं। पुजारिन की मानें तो मोनी ने मंदिर में ही सुसाइड नोट लिखा है।

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