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आईएएस अनुराग तिवारी की मौत एक हादसा थी, सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट का निष्कर्ष

Thu, 21 Feb 2019 12:13 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Thu, 21 Feb 2019 12:13 AM IST
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ias anurag tiwari death is an accident says cbi closure report
आईएएस अनुराग तिवारी
कर्नाटक कैडर के आईएएस अफसर अनुराग तिवारी की मौत एक हादसा थी। यह निष्कर्ष सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में दिया है। अनुराग 17 मई, 2017 को लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित राज्य गेस्ट हाउस के पास सड़क किनारे मृत पाए गए थे। 
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संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की जांच कर रही सीबीआई ने दावा किया कि उन्होंने न तो आत्महत्या की और न ही उनकी हत्या हुई। 2007 बैच इस अफसर की मौत एक हादसा थी। जांच एजेंसी ने अपना निष्कर्ष देते हुए मामले की क्लोजर रिपोर्ट सीबीआई की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट सपना त्रिपाठी की कोर्ट में दाखिल किया है। मामले की अगली सुनवाई 7 मार्च को होगी।
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अनुराग के भाई मयंक तिवारी ने आरोप लगाया था कि वह एक घोटाले का भंडाफोड़ करने वाले थे, जिसमें कई बड़े लोगों के फंसने की आशंका थी। इसी पर उन्हें धमकियां मिल रही थीं और उनकी हत्या कर दी गई। वहीं सीबीआई के निरीक्षक पूरन कुमार ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में बताया है कि मामले में कोई अपराध नहीं हुआ। विवेचना के दौरान कोई मौखिक, स्वतंत्र या विश्वसनीय साक्ष्य ऐसा नहीं मिले जो अनुराग के भाई के आरोपों की पुष्टि करते हों। बल्कि मयंक ने 5 दिन की देरी से रिपोर्ट दर्ज कराई और इसका कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। परिवार के लोगों के द्वारा हत्या जैसा आरोप निराधार है।
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भाई का आरोप - अनुराग पर कुछ कागजात पर दस्तखत के थे दबाव

राजधानी स्थित राज्य गेस्ट हाउस के पास संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए आईएएस अफसर अनुराग तिवारी के भाई मयंक तिवारी ने आरोप लगाया था कि कुछ कागजों पर दस्तखत करने के लिए अनुराग पर दबाव बनाया जा रहा था। इसी प्रकरण का लेकर अनुराग की हत्या की गई। 

वहीं सीबीआई ने कोर्ट में दाखिल की गई अपनी फाइनल रिपोर्ट में कहा है कि विवेचना में 16 व 17 मई 2017 को गेस्ट हाउस में तैनात रहे स्टाफ से पूछताछ की गई तो पता चला कि अनुराग का व्यवहार असामान्य नहीं था और न ही किसी ने किसी असामान्य क्रिया-कलाप के विषय में ही सुना। सभी परिस्थितियों व आरोपों की विवेचना में किसी असामान्य घटना का कोई सुबूत नहीं मिला। एम्स के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट ने भी बताया कि मृत्यु दुर्घटनावश गिर जाने से हुई है। आईएएस की मृत्यु न तो हत्या या मानव वध है और न ही आत्महत्या। 

गौरतलब है कि 17 मई 2017 की सुबह मीराबाई मार्ग स्थित राज्य गेस्ट हाउस के पास सड़क के किनारे अनुराग मृत पाए गए थे। वह स्टेट गेस्ट हाउस के कमरा नं. 19 में पिछले दो दिनों से एलडीए के तत्कालीन उपाध्यक्ष प्रभु नरायण सिंह के साथ रह रहे थे। मृतक के बड़े भाई मयंक ने 22 मई, 2017 को हजरतगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराकर हत्या का आरोप लगाया था। कहा गया था कि अनुराग देर से उठते थे और कभी मॉर्निंग वॉक पर नहीं जाते थे। अनुराग एक ईमानदार अधिकारी थे। बंगलूरू में फूड एंड सिविल सप्लाई के आयुक्त अनुराग ने मयंक को बताया था कि वह कुछ फाइल पर काम कर रहे थे जो एक बड़े घोटाले को उजाकर कर सकता था। इसी को लेकर कुछ कागजों पर दस्तखत करने के लिए अनुराग पर दबाव बनाया जा रहा था। उन्हें जान का खतरा था। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भारत सरकार ने 15 जून, 2017 को विवेचना सीबीआई को सौंप दी।
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