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विधान भवन समेत 70 सरकारी इमारतों पर 42 करोड़ टैक्स बकाया
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 19 Jul 2017 02:14 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : SELF
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विधानभवन और राजभवन कॉलोनी सहित सरकार की 70 प्रमुख इमारतें नगर निगम की कर्जदार हैं। प्रदेश सरकार की इन बिल्डिंगों पर हाउस टैक्स के 42 करोड़ रुपये बकाया हैं। बिल्डिंगें सरकारी होने के कारण इन पर सख्त कार्रवाई भी नहीं हो पा रही है।
बकाया भी एक साल का नहीं कई-कई साल का है। सरकारी इमारतों का टैक्स राज्य सम्पत्ति विभाग जमा करता है। इसको लेकर उसको बकाया की पूरी सूची भी भेज दी गई है। पहले भी नगर निगम की ओर से बकाया टैक्स जमा करने को लेकर राज्य सम्पत्ति को बिल भेजे जा चुके हैं।
नगर निगम में इस समय वित्तीय संकट गहराया हुआ है। वेतन और पेंशन के भी लाले हैं। वहीं प्रदेश सरकार की बिल्डिंगों का टैक्स जिम्मेदार विभाग अदा नहीं कर रहे हैं। सिर्फ जोन एक में ही सरकारी इमारतों पर 42 करोड़ रुपये हाउस टैक्स बकाया है।
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राज्य सम्पत्ति विभाग के अधिकार में आने वाली सबसे अधिक इमारतें जोन एक में ही हैं। इसके अलावा अन्य जोनों में भी मंत्री आवास और कर्मचारियों की कॉलोनियां हैं। वह भी राज्य सम्पत्ति के दायरे में आती हैं।
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बकाया भी एक साल का नहीं कई-कई साल का है। सरकारी इमारतों का टैक्स राज्य सम्पत्ति विभाग जमा करता है। इसको लेकर उसको बकाया की पूरी सूची भी भेज दी गई है। पहले भी नगर निगम की ओर से बकाया टैक्स जमा करने को लेकर राज्य सम्पत्ति को बिल भेजे जा चुके हैं।
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नगर निगम में इस समय वित्तीय संकट गहराया हुआ है। वेतन और पेंशन के भी लाले हैं। वहीं प्रदेश सरकार की बिल्डिंगों का टैक्स जिम्मेदार विभाग अदा नहीं कर रहे हैं। सिर्फ जोन एक में ही सरकारी इमारतों पर 42 करोड़ रुपये हाउस टैक्स बकाया है।
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राज्य सम्पत्ति विभाग के अधिकार में आने वाली सबसे अधिक इमारतें जोन एक में ही हैं। इसके अलावा अन्य जोनों में भी मंत्री आवास और कर्मचारियों की कॉलोनियां हैं। वह भी राज्य सम्पत्ति के दायरे में आती हैं।
आम आदम के खिलाफ तो होती है कुर्की
tax evasion
आम आदमी के खिलाफ तो नगर निगम बकाया जमा न करने पर कुर्की की कार्रवाई करता है। इसमें बैंक खाता सीज करने और इमारत को सील करने तक की कार्रवाई होती है। जबकि सरकारी के साथ प्रदेश सरकार के कामकाज से जुड़ी प्रमुख इमारतें होने के कारण निगम प्रशासन कार्रवाई नहीं कर पाता है।
वेतन-पेंशन के बजट में कटौती से कंगाल हो गया नगर निगम
पूर्व में प्रदेश सरकार द्वारा चुंगी समाप्त किए जाने के बाद से नगर निगम को वेतन-पेंशन केलिए निगम को राज्य वित्त से पैसा दिया जाता है।
इस समय वेतन-पेंशन पर करीब 25 करोड़ रुपये महीने का खर्च है। इसे सरकार राज्य वित्त से दे रही थी, पर पिछले एक साल से इसमें कटौती की जा रही है। निगम प्रशासन द्वारा आपत्ति किए जाने के बाद यह कुछ महीने बंद रही, पर नई सरकार आने के बाद फिर कटौती हो रही है।
इस समय हर महीने करीब दस करोड़ रुपये की कटौती की जा रही है। इससे निगम में वेतन-पेंशन का संकट पैदा हो गया है और कर्मचारी विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।
वेतन-पेंशन के बजट में कटौती से कंगाल हो गया नगर निगम
पूर्व में प्रदेश सरकार द्वारा चुंगी समाप्त किए जाने के बाद से नगर निगम को वेतन-पेंशन केलिए निगम को राज्य वित्त से पैसा दिया जाता है।
इस समय वेतन-पेंशन पर करीब 25 करोड़ रुपये महीने का खर्च है। इसे सरकार राज्य वित्त से दे रही थी, पर पिछले एक साल से इसमें कटौती की जा रही है। निगम प्रशासन द्वारा आपत्ति किए जाने के बाद यह कुछ महीने बंद रही, पर नई सरकार आने के बाद फिर कटौती हो रही है।
इस समय हर महीने करीब दस करोड़ रुपये की कटौती की जा रही है। इससे निगम में वेतन-पेंशन का संकट पैदा हो गया है और कर्मचारी विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।