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डायबिटीज (मधुमेह) और ओबेसिटी (मोटापा) आधुनिक महामारी बन रही है। इन बीमारियों के साथ ही मरीजों को हाई ब्लड प्रेशर भी अपनी चपेट में ले रहा है जो कई अन्य बीमारियों को दावत देता है। जिन लोगों में ये तीनों बीमारियां होती हैं उन्हें बैरियाट्रिक सर्जरी (पेट को छोटा करने का ऑपरेशन) के माध्यम से ठीक किया जा सकता है।
लोहिया संस्थान के बैरियाट्रिक सर्जन डॉ. अंशुमान पांडेय ने ये जानकारी शनिवार को आयोजित क्लीनिक में दी। इस मौके पर सर्जरी से अपना वजन कम कर चुकी दो महिला मरीज भी मौजूद थीं। उन्होंने अपने अनुभव भी अन्य मरीजों से साझा किए।
डॉ. अंशुमान पांडेय ने बताया कि ऐसे ओवरवेट लोग जिन्हें व्यायाम और डाइटिंग से शरीर का वजन करने में सफलता नहीं मिलती, उनके लिए बैरियाट्रिक सर्जरी कारगर है। इसमें गैस्ट्रिक बाईपास और वर्टिकल स्लीव गैस्ट्रेक्टमी की जाती है।
इसमें जो खाना पेट में जाकर पचता है उसे सीधे आंतों में भेज दिया जाता है। इस सर्जरी को भी लैप्रोस्कोप से किया जाता है, जिससे तीन से चार दिन में मरीज अस्पताल से घर वापस भेज दिया जाता है।
स्लीव गैस्ट्रेक्टमी में पेट को काट कर छोटा किया जाता है, जिससे कम भोजन पर भूख शांत हो जाती है। बैरियाट्रिक सर्जरी से मरीज का वजन 50 फीसदी से ज्यादा कम हो जाता है।
डायबिटीज और मोटापा दोनों दूर होंगे इस सर्जरी से
डायबिटीज के मरीजों में मोटापा बढ़ना आम बात है। ये मोटापा कई दिक्कतें करता है जो कि प्राणघातक हो सकती है। ऐसे मरीजों में शुगर लेवल बढ़ जाता है, इसलिए उन्हें भोजन करने की इच्छा अधिक होती है।
अधिक भोजन से खाने की थैली बढ़ती जाती है और खुराक बढ़ती जाती है। यही डायबिटिक उनके लिए नुकसानदेय साबित होता है। बैरियाट्रिक सर्जरी में खाने की थैली को बाईपास कर दिया जाता है।
जब भोजन छोटी थैली में आता है और वो जल्दी भर जाती है तो नर्व दिमाग को पेट भरने संदेश पहुंचा देती है। इससे मरीज कम खाना खाता है। कम खाने से शरीर में कम ग्लूकोज बनता है। इससे उसे खत्म करने के लिए दवा की जरूरत नहीं पड़ती।
डॉ. अंशुमान पांडेय ने बताया कि यदि शरीर का वजन कम नहीं होगा तो डायबिटीज से छुटकारा मिलना मुश्किल है। इसीलिए भोजन को खाने की थैली में जाने की प्रक्रिया को सर्जरी से रोकर उसे सीधे आंत में डाला जाता है। इससे इंसुलिन, खाने की दवाएं तो छूट ही जाती हैं। हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं भी 50 फीसदी कम हो जाती हैं। साथ ही कोलेस्ट्राल लेवल भी कम हो जाता है।
जानिए क्या है बैरिएट्रिक सर्जरी
इस सर्जरी का बुनियादी सिद्धांत भोजन के सेवन, पेट और आंत में भोजन के अवशोषण को कम करना है। इसमें पेट और पाचन प्रणाली की सरंचना में परिवर्तन किया जाता है। जो भोजन से मिलने वाली एनर्जी को संतुलित और वसा के मेटाबोलिज्म में परिवर्तन करता है।
रोगी सर्जरी के बाद अधिक ऊर्जावान और फिट महसूस करता है। इसमें गैस्ट्रिक बाईपास और वर्टिकल स्लीव गैस्ट्रेक्टमी की जाती है, क्योंकि इसमें खाना जो पेट में जाकर पचता है उसे सीधे आंतों में भेज दिया जाता है।
इस सर्जरी को भी लैप्रोस्कोप से किया जाता है। जिससे तीन से चार दिन में मरीज अस्पताल से घर वापस भेज दिया जाता है। इस सर्जरी के बाद पेट पर जमी वसा कम हो जाती है।
मरीजों ने साझा किए अनुभव
बैरियाट्रिक क्लीनिक में शनिवार को आलमनगर और अलीगंज की मरीजों ने अपने अनुभव साझा किए। आलमनगर से आयी महिला ने बताया कि उसका वजन 108 किलोग्राम था। दो महीने पहले उसने बैरियाट्रिक सर्जरी कराई थी।
अब उसका वजन 84 किलोग्राम ही रह गया है। वहीं अलीगंज निवासी महिला ने बताया कि उसका वजन 106 किलोग्राम था। एक महीने पहले सर्जरी कराने के बाद अब वजन 90 किलोग्राम रह गया है।