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Lucknow News: सैथा गांव में छह करोड़ से बनेगा हॉर्टिकल्चर वेस्ट प्लांट
Tue, 11 Aug 2026 02:41 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Tue, 11 Aug 2026 02:41 AM IST
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एआई तस्वीर।
लखनऊ। शहर में बढ़ते हॉर्टिकल्चर वेस्ट और गीले कचरे के निस्तारण के लिए नगर निगम ने पहल की है। सैथा गांव में हॉर्टिकल्चर वेस्ट प्लांट स्थापित किया जाएगा। इसके साथ कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट भी विकसित होगा। इसके लिए जगह चिह्नित कर ली गई है और टेंडर जारी हो चुके हैं। करीब छह करोड़ रुपये की लागत से दोनों प्लांट का निर्माण कराया जाएगा। दो महीने में काम शुरू होने की उम्मीद है।
नगर आयुक्त गौरव कुमार ने बताया कि फल-सब्जी मंडियों और पार्कों से निकलने वाले पेड़ों की छंटाई, पत्तियां और अन्य जैविक कचरे के निस्तारण में अभी परेशानी होती है। खुले में पड़े कचरे से बदबू और गंदगी फैलती है। नए प्लांट में इसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा। इससे जैविक खाद समेत अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे।
सैथा गांव में बनने वाले सीबीजी प्लांट में शहर से निकलने वाले गीले कचरे का इस्तेमाल होगा। इसमें सब्जियों के छिलके, बचा हुआ खाना और अन्य जैविक अपशिष्ट शामिल होंगे। इनसे कंप्रेस्ड बायोगैस तैयार की जाएगी, जिसका इस्तेमाल वाहनों और उद्योगों में सीएनजी के विकल्प के तौर पर किया जा सकेगा। इससे प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी।
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गैस उत्पादन के बाद बचने वाले अवशेष से उच्च गुणवत्ता की जैविक खाद तैयार होगी। इसे किसानों को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे मंडियों की सफाई बेहतर होने के साथ किसानों को भी लाभ मिलेगा।
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नगर आयुक्त गौरव कुमार ने बताया कि फल-सब्जी मंडियों और पार्कों से निकलने वाले पेड़ों की छंटाई, पत्तियां और अन्य जैविक कचरे के निस्तारण में अभी परेशानी होती है। खुले में पड़े कचरे से बदबू और गंदगी फैलती है। नए प्लांट में इसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा। इससे जैविक खाद समेत अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे।
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सैथा गांव में बनने वाले सीबीजी प्लांट में शहर से निकलने वाले गीले कचरे का इस्तेमाल होगा। इसमें सब्जियों के छिलके, बचा हुआ खाना और अन्य जैविक अपशिष्ट शामिल होंगे। इनसे कंप्रेस्ड बायोगैस तैयार की जाएगी, जिसका इस्तेमाल वाहनों और उद्योगों में सीएनजी के विकल्प के तौर पर किया जा सकेगा। इससे प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी।
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गैस उत्पादन के बाद बचने वाले अवशेष से उच्च गुणवत्ता की जैविक खाद तैयार होगी। इसे किसानों को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे मंडियों की सफाई बेहतर होने के साथ किसानों को भी लाभ मिलेगा।