'सलमान को क्लीन चिट से मलाल नहीं, अपनी अनदेखी की पीड़ा है'
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हिट एंड रन केस मामले में बृहस्पतिवार को आए कोर्ट के फैसले से पीड़ित मो. कलीम का परिवार आहत है। उसे सलमान खान को क्लीन चिट मिलने का मलाल नहीं है लेकिन अपनी अनदेखी की पीड़ा जरूर है।
हिट एंड रन के अहम गवाह मो. कलीम का कहना है कि उसे आर्थिक मदद मिलती तो उसकी रोजी-रोटी चल जाती। दुर्घटना के बाद वह मेहनत के काम लायक नहीं रह गया है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला ने कोर्ट के निर्णय पर प्रतिक्रिया जाननी चाही तो उसका जवाब कुछ ऐसा ही रहा। प्रस्तुत है मो. कलीम से हुई बातचीत के प्रमुख अंश।
सवाल-सलमान खान को कोर्ट से क्लीन चिट मिलने पर आप कैसा महसूस कर रहे हैं?
जवाब-कोर्ट के निर्णय पर न हमें कोई आपत्ति है और न ही सलमान खान को क्लीन चिट मिलने का मलाल है। सलमान खान को सजा मिले या बरी हों इससे हमारा कोई मतलब नहीं लेकिन कोर्ट को हमारे साथ भी न्याय करना था।
सवाल-आपको कोर्ट से क्या उम्मीदें थीं?
जवाब-कोर्ट पर हमें पूरा भरोसा था। हमें और हमारे परिवार को यह यकीन था कि कोर्ट हमारे बारे में सोचेगा। अगर हमें कुछ आर्थिक मदद मिल जाती तो हमारी आजीविका फिर ढर्रे पर आ जाती।
हादसे के बाद बिल्कुल भी काम नहीं कर पाता
सवाल-हादसे के बाद आपकी जिंदगी में क्या दिक्कतें आईं?
जवाब-उस हादसे में जिंदा तो बच गया लेकिन शरीर पहले जैसा नहीं रहा। मेहनत का काम बिल्कुल नहीं हो पाता है। यह मान लीजिए कि काफी हद तक अपने परिवार पर आश्रित हूं।
सवाल-हिट एंड रन हादसे को काफी समय बीत गया। क्या आप अब उसे भूलना चाहेंगे?
जवाब- यह चाहकर भी संभव नहीं है। उस हादसे को करीब 13 साल हो गए लेकिन लगता है जैसे कल की घटना है। हादसे के जेहन में आते ही वह काली रात फिल्म की माफिक दिल व दिमाग पर छा जाती है।
इस तरह बयान किया उस रात का मंजर
जिला मुख्यालय से 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कुड़वार थाना क्षेत्र के असरोगा गांव निवासी मोहम्मद इकबाल का बड़ा बेटा मोहम्मद कलीम करीब 15 वर्ष पूर्व रोजी-रोटी के चक्कर में मुंबई गया था। कलीम को मुंबई के हिलरोड स्थित ए-1 बेकरी में काम मिल गया था।
काम के बाद वह और उसके साथी फुटपाथ पर ही रात गुजारते थे। कलीम के मुताबिक 28 सितंबर 2002 की रात करीब 12 बजे वह नूरउल्ला निवासी बंगलुरू, मन्नू खां, अब्दुल्ला शेख, मुस्लिम शेख निवासी गोंडा के साथ बेकरी में काम खतम कर अमरीकन एक्सप्रेस के बगल फुटपाथ पर सोए थे। रात करीब ढाई बज रहे थे।
तभी अचानक एक लग्जरी गाड़ी ने फुटपाथ पर लेटे पांचों दोस्तों को कुचल दिया। दुर्घटना में नूरउल्ला की मौत हो गई थी, जबकि चारों दोस्तों को आस-पास के लोगों ने बाबा हॉस्पिटल पहुंचाया था।
हॉस्पिटल में हालत सुधरने पर मन्नू खां और उसे छोड़ दिया गया था, जबकि मुस्लिम शेख और अब्दुल्ला शेख करीब डेढ़ माह तक अस्पताल में भर्ती थे। दोनों के पैर में सरिया पड़ी है। कलीम ने बताया कि दुर्घटना के बाद करीब एक वर्ष तक वह मुंबई में रहा लेकिन फिर घर चला आया।
दिल में टीस की तरह चुभती है वो बात
हादसे में मो. कलीम के हाथ, पैर व कमर में चोटें आई थीं। जिसकी वजह से वह आज भी ज्यादा देर तक खड़ा नहीं हो सकता है। बृहस्पतिवार को कोर्ट के फैसले के बाद कलीम ने रुंधे गले से कहा कि यदि सेहत सलामत होती तो आर्थिक मदद मांगने की जरूरत नहीं होती। 25 लोगों का परिवार पालने के लिए मात्र छह बिस्वा जमीन है।
मोहम्मद इकबाल के बड़े बेटे मो. कलीम के परिवार में मोहम्मद हलीम, मोहम्मद अलीम और मोहम्मद वलीम के साथ ही पांच बेटियां हैं। इनमे ताहिरा की शादी इकबाल कर चुके हैं जबकि गुलफ्सा बानो, साहिना बानो, रईसा बानो और शबनम की शादी होनी है। कलीम बताते हैं कि वे और मो. अलीम बेकरी में काम करते थे, जबकि उसके भाई मो. हलीम और मो. वलीम मुंबई में ड्राइवर हैं।
कुछ आर्थिक मदद मिलती तो होती पति की मदद
हिट एंड रन के पीड़ित मोहम्मद कलीम की पत्नी रुखसाना बानों कहती है कि यदि कोर्ट से उनके पति और अन्य पीड़ितों को आर्थिक मदद मिलती तो सबके हालात कुछ और ही होते। आर्थिक मदद मिलने से मेरे पति और इकलौती बेटी तैयबा बानो (12) की परवरिश अच्छी तरह से होती।