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बटलर पैलेस: एक अधूरी पर शानदार इमारत
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Wed, 25 Dec 2013 02:13 PM IST
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लखनऊ में सुल्तान गंज बांध और बनारसी बाग के बीच में एक आलीशान चौरुखा महल खड़ा हुआ, जिसे आज बटलर पैलेस के नाम से जानते हैं।
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इसका नाम सन् 1907 में सी.ई डिप्टी कमिश्नर अवध बने सर हारकोर्ट बटलर के नाम पर है।
हालांकि यह पैलेस पूरी तरह नहीं बन सका लेकिन इसका मौजूदा मॉडल देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर यह बना होता, तो इसकी भव्यता देखते ही बनती।
इस पैलेस का नक्शा लखनऊ काउंसिल चैंबर्स की शानदार इमारत के प्रसिद्ध वास्तुकार सरदार हीरासिंह ने बनाया था।
राजा महमूदाबाद के इस राज महल की नींव फरवरी सन् 1915 में बटलर साहब ने रखी थी यही वजह है कि इसका नाम भी उनसे जुड़ गया।
सन् 1921 में इस महल का एक सिरा बनकर तैयार हुआ तो गोमती में आई बाढ़ ने उसे तहस-नहस कर दिया जिससे राजा साहब को अपना इरादा बदलना पड़ा और इसका चौथाई हिस्सा ही बन सका।
इस शानदार चौपहली कोठी को चित्ताकर्षक बनावट और इसका प्रभावशाली स्थापत्य राजस्थानी ढंग का है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले काल में ये लखनऊ का प्रसिद्ध गेस्ट हाउस बना रहा।
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पंडित मोतीलाल नेहरू, सर तेज बहादुर सप्रू समेत पटना के अली इमाम साहब और महाराजा नेपाल इस महल में रहे हैं। बटलर पैलेस की शान आज भूला हुआ सपना बन चुकी है।
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चार कोनों पर चार बुर्जियों से सजा ये जाली मेहराबों वाला राजसी भवन जब अपने शबाब पर था, तो देखने से सम्बंध रखता था।
इसके सामने संगमरमर की खूबसूरत छतरियों और फव्वारों का हौज है। इस महल का प्रवेश द्वार भी लखनऊ के परंपरागत शाही दरवाजों का एक शानदार नमूना है।