हाईकोर्ट ने पूछा, गरीबों के लिए क्यों नहीं बना रहे मकान?
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राजधानी में सुल्तानपुर रोड पर बन रही अंसल एपीआई की 6465 एकड़ की टाउनशिप में आर्थिक रूप से कमजोर तबके (ईडब्लूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के लोगों के लिए कुल 20 फीसदी मकान नियमानुसार न बनाने के आरोप का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट पहुंच गया।
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले में राज्य सरकार, एलडीए समेत अंसल एपीआई से जवाब-तलब किया है। अदालत ने इन पक्षकारों को 18 दिसंबर तक का वक्त जवाबी हलफनामा दाखिल करने को देकर अगली सुनवाई 8 जनवरी 2015 को नियत की है।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति डा. धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को यह आदेश एक वकील की पीआईएल पर दिया।
इसमें अंसल एपीआई द्वारा एलडीए को दिए गए 1765 एकड़ केरिवाइज्ड डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी न दिए जाने समेत मामले की निगरानी किए जाने की गुजारिश की गई है।
याची विनोद कुमार का आरोप है कि अंसल एपीआई ने अपनी इस टाउनशिप में नियमों के मुताबिक ईडब्लूएस और एलआईजी वर्ग के दस-दस फीसदी मकान संबंधित लोगों को देने की व्यवस्था नहीं की है, जो कानून की मंशा के खिलाफ है।
18 दिसंबर तक देना होगा जवाब
एलडीए के अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा का कहना था कि अभी अंसल के उक्त डीपीआर पर एलडीए ने कोई निर्णय नहीं लिया है और इस पर संबंधित नियमों व बाइ-लाज केतहत निर्णय लिया जाएगा।
अंसल एपीआई के अधिवक्ता वसीकुद्दीन की दलील थी कि इसी प्रकरण में दायर एक अन्य याचिका का अदालत ने 25 मार्च 2014 को निपटारा कर उनकेआश्वासन के तहत 31 अगस्त 2015 तक उक्त ईडब्लूएस व एलआईजी श्रेणी के मकानों का निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए थे, जिसे अंसल की तरफ से पूरा कर लिया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मकानों की गुणवत्ता की निगरानी एलडीए के वीसी करेंगे और काम पूरा होने पर निर्माण की गुणवत्ता की जांच आईआईटी रुड़की से कराई जाएगी। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि ऐसे मकानों केनिर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
अदालत ने मामले में राज्य सरकार समेत अन्य पक्षकारों, एलडीए व अंसल एपीआई को 18 दिसंबर तक मामले में जवाबी हलफनामे दाखिल करने के निर्देश देकर अगली सुनवाई 8 जनवरी 2015 को नियत की है।