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प्रशासन से अनुमति लिए बिना धार्मिक स्थलों पर नहीं लगेंगे लाउडस्पीकर

Sat, 09 Apr 2016 02:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 09 Apr 2016 02:53 AM IST
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Highcourt decision on loud speaker.

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कहा है जिला प्रशासन से लिखित अनुमति लेकर ही धार्मिक स्थलों पर लाउड स्पीकर और म्यूजिक सिस्टम लगाए जाएं। कोई भी धार्मिक समुदाय अपनी मर्जी से लाउड स्पीकर नहीं लगा सकता है।

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जस्टिस अताउर्रहमान मसूदी और जस्टिस अमरेश्वर प्रताप साही की खंडपीठ ने शुक्रवार को यह फैसला बलरामपुर के उतरौला एसडीएम की ओर से सुबह-शाम लाउड स्पीकर पर धार्मिक गाने बजाने पर लगाई मौखिक पाबंदी के खिलाफ दायर याचिका पर दिया।
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याचिकाकर्ता राम लखन का कहना था कि उतरौला एसडीएम ने गरीबनगर क्षेत्र के काफी पुराने राम जानकी मंदिर में धार्मिक गाने बजाने पर पाबंदी लगा दी है। इसका उल्लंघन न हो, इसके लिए पीएसी तैनात कर दी गई है।
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याचिकाकर्ता का आरोप था कि यह सब स्थानीय विधायक के दवाब में किया गया है। इससे नागरिकों के मूल अधिकारों का हनन हो रहा है। इस क्षेत्र में हिंदू समुदाय की संख्या कुल आबादी की चालीस प्रतिशत है। प्रशासन के मौखिक आदेशों से उनके अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।

मामला धार्मिक समुदायों का नहीं है...

Highcourt decision on loud speaker.

याचिका के विरोध में प्रदेश सरकार की ओर से कोर्ट में बताया गया कि यह मामला धार्मिक समुदायों का नहीं, बल्कि ध्वनि प्रदूषण का है। एक निश्चित सीमा से अधिक आवाज के लाउड स्पीकर बजाने पर ध्वनि प्रदूषण (नियमन व नियंत्रण) नियमावली 2000 के तहत रोक है।

इन्हें लगाने के लिए जिला प्रशासन से लिखित में अनुमति लेने की प्रावधान कानून में किया गया है। बिना अनुमति इन्हें लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

सुनवाई के बाद अदालत ने अपने फैसले में हाल ही दिए गए हाईकोर्ट के निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों में अनियंत्रित ढंग से लगाए जाने वाले लाउड स्पीकरों से किस तरह आम नागरिकों को मुश्किलें पेश आ रही हैं।

शहरीकरण की वजह से कई क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसकी वजह से अन्य क्षेत्र में रहने वालों को भी ड्रम बजाने, लाउड स्पीकर लगाने, साउंड एप्लीफायर लगाने की छूट नहीं दी जा सकती।

ध्वनि प्रदूषण (नियमन व नियंत्रण) नियमावली 2000 के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को बताने की जरूरत है ताकि इन्हें प्रभावी ढंग से लागू कराया जा सके।

एक समुदाय के कारण नहीं नकारा

Highcourt decision on loud speaker.

हाईकोर्ट ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण (नियमन व नियंत्रण) नियमावली 2000 को केवल इसलिए नकारा नहीं जा सकता क्योंकि एक समुदाय इसे नापसंद करता है। यह सभी के लिए है और इसे सभी पर सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि वह जिला प्रशासन से अनुमति लेकर ही लाउड स्पीकर बजा सकता है। वहीं जिला प्रशासन से कहा है कि अगर याचिकाकर्ता आवेदन करता है तो उस पर कानून के मुताबिक निर्णय लिया जाए। इसमें किसी तरह का पूर्वाग्रह नहीं रखा जाए।

अदालत ने यह भी कहा
लाउड स्पीकर, साउंड एंप्लीफायर या किसी संगीत उपकरण को रात के समय तेज आवाज में खुले में नहीं बजाया जाएगा।

किसी निजी जगह पर लाउड स्पीकर यदि प्रशासन से अनुमति लेकर बजाया जा रहा है तो उस स्थान की बाउंड्रीवॉल तक यह आवाज 5 डेसिबल से अधिक नहीं आनी चाहिए।

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