कैबिनेट मंत्री आजम खां ने हाईकोर्ट में किया सरेंडर, रद्द हुआ वारंट
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कैबिनेट मंत्री और जल निगम के अध्यक्ष आजम खां ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के समक्ष सरेंडर करते हुए कोर्ट के आदेशों के बावजूद उपस्थित न होने के लिए माफी मांगी। इस पर हाईकोर्ट ने माफी स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ जारी जमानती वारंट को रद्द कर दिया।
हाईकोर्ट में जल निगम की ओर से दायर एक याचिका में हाईकोर्ट ने आजम को प्रस्तुत करने के लिए एक अक्तूबर को जमानती वारंट जारी किया था। इसके खिलाफ आजम ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कोई राहत न देते हुए हाईकोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे।
हाईकोर्ट में पेश हुए आजम ने कोर्ट द्वारा उपस्थिति के लिए कहे जाने के बावजूद न आने और वारंट जारी होने को लेकर माफी की अर्जी देते हुए खुद को सरेंडर किया। उन्होंने कहा कि वे कोर्ट के आदेशों से बंधे रहेंगे। जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस रवींद्रनाथ मिश्रा - द्वितीय ने इसे स्वीकार करते हुए वारंट रद्द कर दिया।
आजम की ओर से ये दी गई दलील
दूसरी ओर याचिका पर आजम की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि जल निगम के सामान्य प्रशासनिक कार्यों को एमडी और अन्य अधिकारी ही देखते हैं, उन्हें इस मामले में पूरी जानकारी नहीं है।
उन्होंने मामले के दस्तावेज देखे हैं और इनका अध्ययन करने के लिए उन्हें कुछ और समय चाहिए। उन्होंने बताया कि ट्रिब्यूनल को जो दस्तावेज दिया गया, जिस पर अनुमोदित किए जाने वाली जगह पर हस्ताक्षर नहीं थे, वे उसकी जांच खुद करेंगे और उचित निर्णय लेंगे।
ऐसे में हाईकोर्ट ने उन्हें समय देते हुए नियमानुसार उचित निर्णय लेने का समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 21 मार्च को होगी।
अब पेश नहीं होना होगा
हाईकोर्ट ने कहा कि अगली तारीख पर आजम को अदालत में उपस्थित नहीं होना होगा। वे अपनी जांच और निर्णय की जानकारी हाईकोर्ट को हलफनामे में देंगे।