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हाईकोर्ट ने कहा: जब तक पत्नी शराब पीकर गलत व्यवहार न करे तब तक वह क्रूरता नहीं, दोस्तों पर भी की टिप्पणी
Thu, 16 Jan 2025 08:56 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Thu, 16 Jan 2025 08:56 PM IST
सार
High Court decision: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पत्नी द्वारा पति का परित्याग किए जाने के आधार पर पति की तलाक अपील को मंजूर कर दी। कहा, पत्नी का शराब पीना पति के खिलाफ क्रूरता नहीं है।
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लखनऊ हाईकोर्ट का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पत्नी द्वारा पति का परित्याग किए जाने के आधार पर पति की तलाक अपील को मंजूर कर दी। कहा, पत्नी का शराब पीना पति के खिलाफ क्रूरता नहीं है, जब तक कि वह अनुचित बर्ताव न करे। दरअसल, पति ने पत्नी के शराब पीने और दोस्तों के साथ जाने को क्रूरता कहकर कोर्ट से तलाक मंजूर करने का अनुरोध किया था।
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कोर्ट ने इस मामले में कहा कि मध्यम वर्गीय समाज में शराब पीना वर्जित है। वहीं, यह संस्कृति का हिस्सा भी नहीं है लेकिन रिकॉर्ड पर ऐसी कोई सामग्री नहीं है, जो बताए कि शराब पीने के कारण पति के साथ कोई क्रूरता हुई है। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ल की खंडपीठ ने यह टिप्पणी और आदेश अपीलकर्ता पति की अपील मंजूर करते हुए दिया। इसमें पति ने पत्नी से तलाक के लिए कोर्ट से गुहार की थी । हाईकोर्ट क्रूरता और परित्याग या छोड़कर जाने के आधार पर तलाक मामले की सुनावी कर रहा था।
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क्रूरता को लेकर कोर्ट ने कहा कि ऐसी कोई दलील नहीं है, जिससे पता चले कि कैसे शराब पीना क्रूरता हो सकती है। कोर्ट ने कहा, 'यहां तक कि फैमिली कोर्ट भी सही था कि रिकॉर्ड्स में ऐसी कोई दलील नहीं है, जो दिखाए कि शादी से पैदा हुआ बच्चा शराब पीने के कारण कमजोर और पूरी तरह से स्वस्थ नहीं है या पत्नी को प्रेग्नेंसी में दिक्कतें आई हों।हालांकि, कोर्ट ने यह भी पाया कि पत्नी साल 2016 से ही पति से अलग रह रही है। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि यह हिन्दू विवाह अधिनियम के तहत परित्याग करने के समान है।
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कोर्ट ने केस की कार्यवाही में भी पत्नी की भागीदारी नहीं होने का जिक्र किया और कहा कि यह दिखाता है कि उसकी ससुराल लौटने की मंशा नहीं है। ऐसे में अदालत ने पति की अपील को स्वीकार किया और तलाक की अनुमति दे दी।
जोड़े ने मेट्रिमोनियल वेबसाइट पर मिलने के बाद 2015 में शादी कर ली थी। पति का कहना था कि, पत्नी बेटे के साथ 2016 में घर छोड़कर चली गई थी और कोलकाता में रह रही थी। इसके बाद पति ने लखनऊ के फैमिली कोर्ट का रुख किया, जहां उसकी तलाक की याचिका खारिज हो गई। इसके खिलाफ पति ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर क्रूरता और परित्याग के आधारों पर तलाक मंजूर करने का आग्रह किया था।