डीजीपी चयन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा- याचिका सारहीन
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने वरिष्ठ आईपीएस अफसर तथा डीजी नागरिक सुरक्षा जेएल त्रिपाठी की याचिका को महाधिवक्ता की बहस के बाद सारहीन करार देकर खारिज कर दिया। इसमें राज्य सरकार की तरफ से प्रदेश में नए डीजीपी के चयन को लेकर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को भेजे गए नामों पर सवाल उठाया गया था।
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने सोमवार को याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। याची की ओर से कहा गया था कि प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार केस में सुप्रीम कोर्ट ने प्रत्येक राज्य सरकार को यूपीएससी को वरिष्ठतम आईपीएस अफसरों की सूची भेजने तथा आयोग द्वारा इनमें राज्य सरकार को तीन नाम चयनित कर भेजने का आदेश दिया है।
इसके विपरीत राज्य सरकार ने त्रिपाठी को प्रदेश में कार्यरत वरिष्ठतम आईपीएस अफसरों में तीसरे स्थान पर होने के बाद भी उनका नाम नहीं भेजा। उनसे जूनियर अफसरों के नाम भेजे जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है।
कोर्ट ने ये तर्क देकर किया खारिज
उधर, राज्य सरकार की तरफ से महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने कहा कि याची ने महज एक खबर के आधार पर याचिका दाखिल की है और डीजीपी के चयन के लिए भेजे गए नामों की जानकारी को संबंधित अफसरों को पहले देने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
ऐसे में याची को यह याचिका दायर करने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं था। उन्होंने कोर्ट को बताया कि संबंधित नियम-कानून के मुताबिक याची का भी नाम आयोग को भेजा गया है, लिहाजा याचिका खारिज किए जाने लायक है। इसके जवाब में याची की अधिवक्ता नूतन ठाकुर का कहना था कि याची का नाम याचिका दायर होने के बाद भेजा गया।
अदालत ने कहा कि महानिदेशक स्तर के अधिकारी को खबरों के आधार पर याचिका नहीं दाखिल करनी चाहिए थी, वह भी जब ऐसा कोई कानूनी प्रावधान न हो कि पैनल में शामिल होने वाले नाम संबंधित को बताए जाएं। चूंकि याची का नाम प्रकाश सिंह केस के दिशा-निर्देशों और संबंधित नियमों के तहत आयोग को भेजा गया है, ऐसे में याचिका सारहीन होने की वजह से खारिज की जाती है।