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हाईकोर्ट ने प्रतापगढ़ एसडीएम के खिलाफ दिया जांच का आदेश, प्रमुख सचिव राजस्व से तलब की रिपोर्ट
Fri, 04 Dec 2020 07:04 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 04 Dec 2020 07:04 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रतापगढ़ के एसडीएम राहुल कुमार यादव के खिलाफ जांच के आदेश प्रमुख सचिव, राजस्व को दिए हैं। साथ ही जांच की रिपोर्ट भी तलब किया है। आदेश में न्यायालय ने एसडीएम के खिलाफ काफी सख्त टिप्पणियां भी की हैं। तहसील रानी गंज के एसडीएम राहुल पर आरोप है कि उन्होंने याची का बंटवारे का मुकदमा अपनी कोर्ट में दर्ज करने से इसलिए इंकार कर दिया जिससे याची के विपक्षी उसकी सम्बंधित जमीन पर कब्जा कर सकें।
न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह ने यह आदेश फरीदा बानो की याचिका पर दिया। याची का कहना था कि उसने व कुछ अन्य लोगों ने प्रतापगढ़ के रसोइया गांव में गाटा संख्या 392 और 393 की कुछ जमीनें खरीदीं। इन जमीनों का बंटवारा नहीं हुआ था, जिसके चलते याची ने एसडीएम कोर्ट में बंटवारे का मुकदमा दाखिल किया। लेकिन एसडीएम ने उसके वाद को दाखिल करने से ही इंकार कर दिया। याची का आरोप था कि इस दौरान याची के विपक्षियों ने प्रश्नगत जमीन पर निर्माण शुरू कर दिया व एसडीएम द्वारा वाद पंजीकृत करने से इंकार भी उन्हीं विपक्षियों को फाएदा पहुंचाने के लिए किया गया।
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न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह ने यह आदेश फरीदा बानो की याचिका पर दिया। याची का कहना था कि उसने व कुछ अन्य लोगों ने प्रतापगढ़ के रसोइया गांव में गाटा संख्या 392 और 393 की कुछ जमीनें खरीदीं। इन जमीनों का बंटवारा नहीं हुआ था, जिसके चलते याची ने एसडीएम कोर्ट में बंटवारे का मुकदमा दाखिल किया। लेकिन एसडीएम ने उसके वाद को दाखिल करने से ही इंकार कर दिया। याची का आरोप था कि इस दौरान याची के विपक्षियों ने प्रश्नगत जमीन पर निर्माण शुरू कर दिया व एसडीएम द्वारा वाद पंजीकृत करने से इंकार भी उन्हीं विपक्षियों को फाएदा पहुंचाने के लिए किया गया।
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कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके एसडीएम
कोर्ट ने पहले की सुनवाईयों पर एसडीएम से निर्देश प्राप्त कर अदालत को अवगत कराने को कहा परंतु एसडीएम की ओर से कोई जवाब न मिलने पर कोर्ट ने उन्हें तलब कर लिया। न्यायालय के आदेश पर हाजिर हुए एसडीएम कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
न्यायालय ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि एसडीएम कोर्ट एक महत्वपूर्ण कोर्ट होती है जहां बड़ी संख्या में राजस्व और जमीनों से सम्बंधित मुकदमे आते हैं। कानूनी उपचार एक मौलिक अधिकार है। किसी भी प्राधिकारी को यह अधिकार नहीं कि वह एक नागरिक का वाद दाखिल करने से ही मना कर दे जबकि यह नियमों के तहत दाखिल किया गया है।
अदालत ने कहा कि यह परेशान करने वाली बात है कि एक जिम्मेदार अधिकारी जो एक न्यायालय का पीठासीन अधिकारी भी है, उसने प्रथम दृष्टया अपने दायित्वों का त्याग कर दिया यह और कुछ नहीं, एक नागरिक के कानूनी उपचार प्राप्त करने के मौलिक अधिकार का खुलेआम उल्लंघन है।
कोर्ट ने मामले सम्बंधी विवाद के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बगैर याचिका को निस्तारित करते हुए एसडीएम के खिलाफ जांच तीन माह में पूरी करने का आदेश प्रमुख सचिव, राजस्व को दिया है। साथ ही अदालत ने जांच की रिपोर्ट को कोर्ट के सीनियर रजिस्ट्रार के पास भेजने को कहा है, जो मुकदमें की फ़ाईल में रखी जाएगी।
न्यायालय ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि एसडीएम कोर्ट एक महत्वपूर्ण कोर्ट होती है जहां बड़ी संख्या में राजस्व और जमीनों से सम्बंधित मुकदमे आते हैं। कानूनी उपचार एक मौलिक अधिकार है। किसी भी प्राधिकारी को यह अधिकार नहीं कि वह एक नागरिक का वाद दाखिल करने से ही मना कर दे जबकि यह नियमों के तहत दाखिल किया गया है।
अदालत ने कहा कि यह परेशान करने वाली बात है कि एक जिम्मेदार अधिकारी जो एक न्यायालय का पीठासीन अधिकारी भी है, उसने प्रथम दृष्टया अपने दायित्वों का त्याग कर दिया यह और कुछ नहीं, एक नागरिक के कानूनी उपचार प्राप्त करने के मौलिक अधिकार का खुलेआम उल्लंघन है।
कोर्ट ने मामले सम्बंधी विवाद के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बगैर याचिका को निस्तारित करते हुए एसडीएम के खिलाफ जांच तीन माह में पूरी करने का आदेश प्रमुख सचिव, राजस्व को दिया है। साथ ही अदालत ने जांच की रिपोर्ट को कोर्ट के सीनियर रजिस्ट्रार के पास भेजने को कहा है, जो मुकदमें की फ़ाईल में रखी जाएगी।