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फिल्म 'पीके' पर हाईकोर्ट ने मोदी सरकार से मांगा जवाब!

Tue, 06 Jan 2015 01:53 AM IST
मनोज कुमार सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
मनोज कुमार सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 06 Jan 2015 01:53 AM IST
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High Court ask clarification from central govt on film PK.

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने फिल्म ‘पीके’ को दिखाने पर रोक लगाने की गुजारिश वाली पीआईएल पर केंद्र सरकार का पक्ष मांगा है। कोर्ट ने इस बाबत केंद्र सरकार के अधिवक्ता को सरकार से निर्देश लेने के लिए हफ्ते भर का समय दिया है।

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दर्जनभर स्थानीय वकीलों के एक संगठन ने फिल्म में हिंदू धर्म की प्रथाओं के खिलाफ कथित रूप से इनकी छवि धूमिल करने वाली टिप्पणियां करने आदि के आरोप लगाकर इसके प्रदर्शन पर रोक लगाने का आग्रह किया है।
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जस्टिस इम्तियाज मुर्तजा व जस्टिस ऋतुराज अवस्थी की खंडपीठ ने सोमवार को यह आदेश हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की पीआईएल पर दिया। याचियों ने फिल्म सेंसर बोर्ड की तरफ से इसे दिखाने के लिए दिए गए यू/ए प्रमाणपत्र को रद्द करने समेत फिल्म को पूरी तरह से बैन करने की भी गुजारिश की है।
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याचियों के अधिवक्ता हरिशंकर जैन के मुताबिक पीआईएल में आरोप है कि इस फिल्म में हिंदू देवताओं, मान्यताओं, आस्थाओं व हिंदू पूजा पद्धति पर अशोभनीय टिप्पणियां व चर्चाएं की गई हैं। यह संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हनन है।

केंद्र सरकार ने मांगा वक्त

High Court ask clarification from central govt on film PK.

उधर, केंद्र सरकार की तरफ से अधिवक्ता ने मामले में सरकार से निर्देश प्राप्त करने के लिए वक्त देने का आग्रह किया। अदालत ने हफ्ते भर का समय देकर इसके बाद अगली सुनवाई रखी है।

धर्मांतरण रोकने को पीआईएल पर फैसला सुरक्षित
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने धर्मांतरण को समुचित तरीके से नियंत्रित करने की गुजारिश वाली एक पीआईएल पर सोमवार को सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया।

जस्टिस इम्तियाज मुर्तजा व जस्टिस ऋतुराज अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर द्वारा दायर इस पीआईएल पर सुनवाई हुई।

याची के मुताबिक पीआईएल में कहा गया है कि भले ही धार्मिक विश्वास किसी का निजी मामला है लेकिन किसी व्यक्ति के धर्मांतरण का मामला पूरे समाज पर असर डालता है और इससे लोक व्यवस्था प्रभावित होती है।

अदालत ने याची व केंद्र सरकार के अधिवक्ता की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया।

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