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बच्चे के लिए जानलेवा बस्ते का बोझ!

Fri, 31 Jan 2014 10:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 31 Jan 2014 10:10 AM IST
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heavy school bags gives pain to children

क्लास सात में पढ़ रहा अंशु तिवारी अक्सर पीठ दर्द की शिकायत करता था, पिता डॉक्टर के पास ले गए तो मालूम हुआ कि लगातार बोझ उठाने की वजह से उसकी रीढ़ में डिफॉर्मेटी बन रही है।

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उसे तुरंत स्कूल बैग का वजन कम करने और बस में स्कूल जाने को कहा गया। अंशु की तरह कई बच्चे अपने अभिभावकों के साथ इन दिनों चिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं, किसी की पीठ में दर्द है तो किसी की एड़ी में और किसी के घुटने या कोहनी के जोड़ों में।
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एसजीपीजीआई लखनऊ द्वारा इस बारे में किया गया अध्ययन इसी महीन जारी किया गया है। अब तक बुढ़ापे में होने वाली यह समस्या अब बच्चों में भी सामने आ रही है।

अध्ययन के अनुसार करीब 15 प्रतिशत बच्चे इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं। इस अध्ययन में शामिल चिकित्सकों के अनुसार जहां विकसित देशों के बच्चों में इसकी संभावना 0.1 प्रतिशत आंकी गई है वहीं भारत में अब तक ऐसा कोई अध्ययन नहीं किया गया था।
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पीजीआई के क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी विभाग के चिकित्सकों डॉ. बी अबुजम, आर मिश्रा और ए अग्रवाल द्वारा किए गए इस अध्ययन में 6 से 17 वर्ष के 2059 स्कूली बच्चों को शामिल किया गया था।

इनमें 851 लड़कियां और 1208 लड़के शामिल थे। अध्ययन में स्कूलों के नाम जाहिर नहीं किए गए हैं लेकिन, बताया गया है बच्चों को आ रही मसकुलोस्कैलटल (मांसपेशियों और हड्डियों से संबंधित) शिकायतों को जानने के लिए बच्चों और उनके अभिभावकों से बात की गई।

इसमें सामने आया है कि 2059 में से 158 बच्चे जोड़ों के दर्द से गुजर रहे हैं। ऐसे बच्चों की शिकायतों को तवज्जो दी गई जो एक सप्ताह से अधिक समय से इससे पीड़ित थे। वहीं 63 बच्चे पीठ दर्द और 62 बच्चे एड़ी में दर्द को झेल रहे हैं।


अन्य अंगों में दर्द की शिकायत 45 बच्चों को थी। चिकित्सकों के अनुसार लंबे समय तक यह दर्द बना रहने पर बच्चों की सेहत पर दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं।

ऑर्थोपडिशियन मान रहे हैं कि बदली लाइफ स्टाइल, स्कूली बस्ते को बोझ, कंप्यूटर और लैपटॉप के सामने घंटों बैठना, जूतों और सैंडल की गलत बनावट, खानपान में कैल्शियम की कमी, आदि इसकी वजहें हो सकती हैं।

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