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सुना है क्या: माननीय का घर बना गैस गोदाम, पूरब के माननीय को जमीन पसंद है; संपत्तियों पर ग्रहण के किस्से

Sat, 14 Mar 2026 12:20 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Sat, 14 Mar 2026 12:20 PM IST
सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

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Have You Heard? — The Honorable's Residence Turns into a Gas Depot; The 'Honorable from the East' Has an Eye f
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में पूरब के माननीय को जमीन पसंद है की कहानी। इसके अलावा 'माननीय का घर बना गैस गोदाम' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

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पूरब के माननीय को जमीन पसंद है

पूरब के वीआईपी जिले के माननीय और उनके लाल को धरती से बहुत प्यार है। इसीलिए जहां मौका मिलता है, उसे अपनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। एक सेठजी की 25 करोड़ रुपये की जमीन माननीय के बेटे को भा गई। माननीय ने सेठजी को चाय पर बुलाया और बेटे की इच्छा बताई। सेठजी ने हाथ जोड़कर इन्कार कर दिया।

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माननीय का बेटा बिल्कुल वैसे ही जमीन पर लोट गया, जैसे बच्चा खिलौने के लिए पसर काट देता है। माननीय की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने सरकारी रेट के हिसाब से 6 करोड़ सेठजी के खाते में ट्रांसफर किए और जमीन अपने नाम लिखा ली। सेठजी 19 करोड़ का झटका खाकर दहाड़े मारने लगे लेकिन चुपचाप घर आ गए। जान है तो जहान है।

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माननीय का घर बना गैस गोदाम

सूबे में भले ही रसोई गैस के लिए हाहाकार मचा है लेकिन सियासी तौर पर सबसे मजबूत जिले से ताल्लुक रखने वाले एक माननीय का प्रबंधन कौशल काबिले तारीफ है। तभी इस किल्लत में भी माननीय ने अपने घर को गैस गोदाम में तब्दील कर लिया है। लोगों को एक सिलिंडर मिलना मुश्किल है और माननीय के घर पर 60 भरे सिलिंडर रखे हैं।


माननीय समाजसेवी हैं, इसलिए रिश्तेदारों के घर पर भी दो-चार सिलिंडर की व्यवस्था कर दी है। अब लोग भी कहने लगे हैं, माननीय के घर का गोदाम देखकर ही तेल कंपनियां दावा कर रही हैं कि सूबे में सिलिंडर की कोई किल्लत नहीं है। विपक्ष षड्यंत्र के तहत किल्लत बता रहा है।

सैर-सपाटे और संपत्तियों पर ग्रहण

ईरान-अमेरिका युद्ध ने कुछ ब्यूरोक्रेट्स की चिंता बढ़ा दी है। अक्सर चोरी-छिपे खाड़ी देशों में जाकर मौज करने वाले में कुछ अपना माल डूबने की चिंता में विचलित नजर आ रहे हैं। पश्चिमी एशिया में उनकी काली कमाई का निवेश अब कौड़ियों में तब्दील होता दिख रहा है।



इसमें प्रदेश की वन संपदा को लूटकर दुबई में होटल बनाने वाले एक पूर्व ब्यूरोक्रेट का नाम भी शामिल है। कुछ अन्य ने भी आलीशान संपत्तियों में निवेश किया है। बदले हालात में अब उनका निवेश गले की फांस बन चुका है। इन हालात में वहां जाना भी खतरे से खाली नहीं है। सुना है कि ऐसे दागियों के हर मूवमेंट पर एजेंसियों की नजर है।

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