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हाथरस कांड: सीबीआई ने हाईकोर्ट से जांच पूरी करने को मांगा और वक्त
Wed, 16 Dec 2020 06:38 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 16 Dec 2020 06:38 PM IST
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लखनऊ हाईकोर्ट
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में बुधवार को सीबीआई ने यूपी के बहुचर्चित हाथरस केस में जांच के लिए और समय मांगा है। जांच एजेंसी ने कोर्ट से कहा है कि केस की जांच को खत्म करने में अभी और वक्त लगेगा और संभवत: 18 दिसंबर तक चार्जशीट तैयार हो सकती है। इस वजह से स्टेटस रिपोर्ट अभी दाखिल नहीं की जा सकती। इस पर कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 जनवरी की तारीख नियत की है।
हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के जस्टिस पंकज मितल और जस्टिस राजन रॉय की खंडपीठ ने हाथरस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर गरिमापूर्ण ढंग से अंतिम संस्कार के अधिकार शीर्षक से जनहित याचिका दर्ज किया है। इस केस की पहले सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में ही होने का आदेश दिया था।
मालूम हो कि 25 नवंबर को हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ में सीबीआई ने हाथरस केस में विवेचना की प्रगति रिपोर्ट पेश की थी। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कोर्ट को बताया था कि 10 दिसंबर तक मामले की जांच पूरी होने की संभावना है। जांच में देरी इसलिए हो रही है क्योंकि फोरेंसिक रिपोर्ट आने में विलंब हो रहा है। सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील एसवी राजू और अपर महाधिवक्ता वीके शाही ने कहा था कि कुछ राजनीतिक दल हाथरस के डीएम को हटवाना चाहते हैं, जबकि उन्होंने सभी निर्णय सद्भावना में लिए थे। हालांकि कोर्ट ने सरकार के जवाब से खिन्नता जाहिर की थी।
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यह था मामला
उतर प्रदेश के हाथरस जिले के चंदपा इलाके के बूलगढ़ी गांव में 14 सितंबर को चार लोगों ने कथित रूप से 19 साल की दलित युवती से सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस दौरान लड़की को गंभीर चोट आई थी। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान 29 सितंबर को पीड़िता की मौत हो गई थी। पीड़िता की 30 सितंबर को रात के अंधेरे में उसके घर के पास ही अंत्येष्टि कर दी गई थी। उसके परिवार का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर किया, जबकि स्थानीय पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि परिवार की इच्छा के मुताबिक ही अंतिम संस्कार किया गया।
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हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के जस्टिस पंकज मितल और जस्टिस राजन रॉय की खंडपीठ ने हाथरस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर गरिमापूर्ण ढंग से अंतिम संस्कार के अधिकार शीर्षक से जनहित याचिका दर्ज किया है। इस केस की पहले सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में ही होने का आदेश दिया था।
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मालूम हो कि 25 नवंबर को हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ में सीबीआई ने हाथरस केस में विवेचना की प्रगति रिपोर्ट पेश की थी। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कोर्ट को बताया था कि 10 दिसंबर तक मामले की जांच पूरी होने की संभावना है। जांच में देरी इसलिए हो रही है क्योंकि फोरेंसिक रिपोर्ट आने में विलंब हो रहा है। सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील एसवी राजू और अपर महाधिवक्ता वीके शाही ने कहा था कि कुछ राजनीतिक दल हाथरस के डीएम को हटवाना चाहते हैं, जबकि उन्होंने सभी निर्णय सद्भावना में लिए थे। हालांकि कोर्ट ने सरकार के जवाब से खिन्नता जाहिर की थी।
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यह था मामला
उतर प्रदेश के हाथरस जिले के चंदपा इलाके के बूलगढ़ी गांव में 14 सितंबर को चार लोगों ने कथित रूप से 19 साल की दलित युवती से सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस दौरान लड़की को गंभीर चोट आई थी। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान 29 सितंबर को पीड़िता की मौत हो गई थी। पीड़िता की 30 सितंबर को रात के अंधेरे में उसके घर के पास ही अंत्येष्टि कर दी गई थी। उसके परिवार का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर किया, जबकि स्थानीय पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि परिवार की इच्छा के मुताबिक ही अंतिम संस्कार किया गया।