{"_id":"69f517609d7c9f46ff0894c2","slug":"gujarats-culture-and-tradition-come-alive-at-aktu-lucknow-news-c-13-1-lko1028-1718808-2026-05-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: एकेटीयू में जीवंत हुई गुजरात की संस्कृति व परंपरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: एकेटीयू में जीवंत हुई गुजरात की संस्कृति व परंपरा
विज्ञापन
प्रस्तुति देतीं छात्राएं।
लखनऊ। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) में शुक्रवार को गुजरात की संस्कृति, परंपरा और विरासत जीवंत हुई। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की पहल पर विश्वविद्यालय में गुजरात का स्थापना दिवस समारोह धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ गुजराती संस्कृति पर आधारित नृत्य की प्रस्तुति से हुआ।
इसके बाद पारंपरिक गुजराती वेश-भूषा में छात्र-छात्राओं ने फैशन शो में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। साथ ही गुजरात राज्य के गठन को लेकर 1956 में हुए आंदोलन की घटना पर आधारित लघु नाटिका की प्रस्तुति दी। इसके साथ ही छात्राओं ने गुजरात के व्यापारिक सोच का संदेश देती नाटक की प्रस्तुति दी। उन्होंने गुजरात के प्रसिद्ध गरबा नृत्य प्रस्तुत कर ताली भी बटोरी।
कार्यक्रम में कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से समुद्र किनारे के राज्य समृद्ध रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण व्यापारिक रास्ते का होना है। साथ ही सांस्कृतिक रूप से भी काफी विपुल होते है। छात्रों का इन राज्यों की संस्कृति को जानना काफी महत्वपूर्ण है। हमें अन्य राज्यों से काफी कुछ सीखने को मिलेगा।
विज्ञापन
इस अवसर पर वित्त अधिकारी केशव सिंह, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. ओपी सिंह, परीक्षा नियंत्रक प्रो. दीपक नगरिया, सेंटर फॉर एडवांस स्टडीज एवं आईईटी के निदेशक प्रो. वीरेंद्र पाठक, एफओएपी की प्राचार्या प्रो. वंदना सहगल आदि उपस्थित थे।
विज्ञापन
इसके बाद पारंपरिक गुजराती वेश-भूषा में छात्र-छात्राओं ने फैशन शो में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। साथ ही गुजरात राज्य के गठन को लेकर 1956 में हुए आंदोलन की घटना पर आधारित लघु नाटिका की प्रस्तुति दी। इसके साथ ही छात्राओं ने गुजरात के व्यापारिक सोच का संदेश देती नाटक की प्रस्तुति दी। उन्होंने गुजरात के प्रसिद्ध गरबा नृत्य प्रस्तुत कर ताली भी बटोरी।
विज्ञापन
कार्यक्रम में कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से समुद्र किनारे के राज्य समृद्ध रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण व्यापारिक रास्ते का होना है। साथ ही सांस्कृतिक रूप से भी काफी विपुल होते है। छात्रों का इन राज्यों की संस्कृति को जानना काफी महत्वपूर्ण है। हमें अन्य राज्यों से काफी कुछ सीखने को मिलेगा।
विज्ञापन
इस अवसर पर वित्त अधिकारी केशव सिंह, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. ओपी सिंह, परीक्षा नियंत्रक प्रो. दीपक नगरिया, सेंटर फॉर एडवांस स्टडीज एवं आईईटी के निदेशक प्रो. वीरेंद्र पाठक, एफओएपी की प्राचार्या प्रो. वंदना सहगल आदि उपस्थित थे।

प्रस्तुति देतीं छात्राएं।