यहां मुद्दों पर भारी है जज्बातों की सियासत
प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी मौलाना हिफजुर्रहमान को तीन बार और मशहूर कम्युनिस्ट नेता मौलाना इशहाक संभली को दो बार संसद में पहुंचाने वाले अमरोहा लोकसभा क्षेत्र के चुनावी माहौल में जनता के सवाल किनारे हो गए हैं।
गंगा के दोनों तरफ पड़ने वाले इस संसदीय क्षेत्र में वोटों के लिए जाति-धर्म के आधार पर ध्रुवीकरण की कोशिशें चल रही हैं।
आमजन को मुद्दों के बजाय जज्बातों पर एकजुट किया जा रहा है। जाति-धर्म की सिसायत का रंग गहराता नजर आ रहा है।
आम और गन्ने की फसल तथा किसान आंदोलनों के लिए पहचान रखने वाले इस इलाके का भ्रमण करने पर कहीं सीधी तो कहीं-कहीं तिकोनी लड़ाई की तस्वीर नजर आ रही है।
रालोद छोड़ हुए सपा की साइकिल
अमरोहा सीट से वर्ष 2009 में चुनाव जीते राष्ट्रीय लोकदल के देवेंद्र नागपाल अब सपा की साइकिल पर सवार हैं।
कांग्रेस छोड़कर आए कंवर सिंह तंवर पुराने दिग्गजों को पछाड़कर भाजपा का टिकट पाने में कामयाब हो गए।
हालांकि इस संसदीय सीट पर 17 अप्रैल को मतदान होना है लेकिन 29 मार्च को नरेंद्र मोदी और अखिलेश यादव की सभाओं के बाद से चुनावी पारा चढ़ा हुआ है।
यहां से सपा ने राज्यमंत्री कमाल अख्तर की पत्नी हुमेरा अख्तर, बसपा ने हाजी शब्बन, राष्ट्रीय लोकदल ने राकेश टिकैत और आम आदमी पार्टी ने शिया मौलाना कल्बे रुशैद को उम्मीदवार बनाया है।
इस संसदीय क्षेत्र में धनौरा, नौगावां शादात, अमरोहा, हसनपुर और गढ़मुक्तेश्वर विधानसभा सीटें आती हैं।
पार्टी नहीं, प्रत्याशी पर नजर
मेरठ-गढ़ मार्ग पर दोताई गांव में भट्ठे पर काफी भीड़ लगी हुई है। भट्ठा मालिक इमलाक अहमद बताते हैं कि मौसम के मिजाज से भट्ठों को इस बार काफी नुकसान हुआ है।
मुस्लिम बहुल इस गांव और इलाके के चुनावी रुझान के बारे में वह कहते हैं-पहले बसपा का समर्थन किया था, अब सपा के साथ हैं।
सपा प्रत्याशी हुमेरा के शौहर राज्ममंत्री कमाल अख्तर का व्यवहार अच्छा है। हमारे इलाके में तो भाजपा और सपा में टक्कर दिखती है।
इसी गांव के जहीर अंसारी, इकरार और अरशद उनकी बात का समर्थन करते हैं। वहीं बैठे गजरौला निवासी लेबर के ठेकेदार प्रकाश कहते हैं, हम लोग (दलित समाज) बसपा को वोट कर रहे हैं।
गंगा के तट पर नमो-नमो
गंगा के तट पर बृजघाट में अमावस्या के स्नान के बाद भीड़ का दबाव कम हो गया है। गंगा सेवा समिति के अध्यक्ष विनय मिश्रा के प्रतिष्ठान अमृत परिसर में कई लोग चुनावी चर्चाओं में मशगूल हैं।
विनय कहते हैं, मोदी की गजरौला रैली के बाद भाजपा के पक्ष में माहौल बना है। जितेंद्र वर्मा, पंकज यादव और मोनू शर्मा का आकलन है कि भाजपा का मुकाबला सपा प्रत्याशी से होगा।
मुकेश, विजय त्रिपाठी और अमित गुप्ता कहते हैं, वोटरों के धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण के आसार हैं।
चौराहों, दुकानों पर भी सियासी रंग
औद्योगिक नगर के रूप में पहचान रखने वाले गजरौला में मुख्य चौपाल पर कई लोग बस के इंतजार में खड़े हैं। डिडौली के निकट ढकिया गांव के शराफत हुसैन सपा के पक्ष में रुझान होने का दावा करते हैं।
वहीं यहां से करीब 10 किमी दूर शफदलपुर सुमाली गांव के धर्मपाल सिंह कहते हैं, भाजपा की टक्कर सपा से है। नंगलिया जट निवासी यशवीर सिंह कहते हैं, वह रालोद के समर्थक हैं।
रालोद ने जितना संभव हुआ, किसानों की लड़ाई लड़ी। जाटों को आरक्षण भी दिलाया। दुखद है कि मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए मतदाताओं का सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण किया जा रहा है। उनके गांव के लोगों पर भी मोदी का रंग चढ़ रहा है।
पास में ही अरोड़ा इलेक्ट्रिकल्स के संचालक दयाल अरोड़ा, वहीं सामान खरीद रहे मनोज कुमार, भीकनपुर गांव के सुनील सैनी और सतीश चंद कहते हैं- वोटरों के रुझान को लेकर बहुत ज्यादा कन्फ्यूजन नहीं है। हिंदुओं का रुझान इस बार भाजपा की तरफ है।
पूर्व सांसद के गांव में भी खूब चर्चाएं
वर्ष 1977 और 1980 में जनता पार्टी के सांसद रहे सपा नेता चौधरी चंद्रपाल सिंह का पपसरा गांव अतरासी से अमरोहा रोड पर पड़ता है। वे सपा प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार के लिए निकले हुए हैं।
उनके पड़ोसी 75 वर्षीय जबर सिंह कहते हैं, सपा सरकार ने किसानों को बड़ा झटका दिया है। अभी तक पिछले साल का गन्ना मूल्य नहीं मिला। अब भी असमौली मिल में उधार में ही गन्ना जा रहा है। ओला गिरने से मसूर-चने की फसल खराब हो गई।
गेहूं की फसल को भी एक चौथाई तक नुकसान पहुंचा है। उन्हें चुनाव में मोदी लहर नजर आ रही है। कहते हैं, किसान यूनियन या रालोद से जुड़े कुछ लोग ही क्षेत्र में राकेश टिकैत के साथ हैं।
पूर्व सांसद की वजह से गांव के थोडे़-बहुत वोट सपा को जा सकते हैं। बाकी सभी भाजपा के पक्ष में हैं। मेन रोड से गांव की तरफ बढ़ते ही एक दुकान पर बैठे युवा कुशल, कुलदीप सैनी और प्रमोद क्षेत्र में भाजपा-बसपा में मुकाबला मानते हैं।
पुराने गठजोड़ टूटे, बन रहे नए समीकरण
अमरोहा में बिजनौर रोड पर मेट्रो धर्मकांटा के संचालक शफीक अहमद कहते हैं, इस इलाके में पहले मुस्लिम-जाट गठजोड़ रहता था। अब नए समीकरण बन रहे हैं।
रालोद के प्रत्याशी को अब भी कुछ मुस्लिम किसान वोट देंगे। हालांकि, वह मानते हैं कि मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा के बीच ही है।
अमरोहा में कलेक्ट्रेट के सामने मेडिकल स्टोर पर बैठे गालिब और हाजी जहीन की नजर में भी वोटों का ध्रुवीकरण हो रहा है।
कलेक्ट्रेट के बाहर ही खड़े अकबरपुर पट्टी के राजबीर सिंह, बाबूराम और जबर सिंह भी उनसे इत्तेफाक रखते हैं।
यहां दिखते हैं सियासत के कई रंग
जोया कस्बे में दिल्ली रोड पर मुन्ना भाई की मिठाई की दुकान पर सियासत का हर रंग देखने को मिल जाता है। यहां चाय की चुस्कियां ले रहे अनवर अली और रईस अहमद जोई मुस्लिमों का रुझान सपा की तरफ होने का दावा करते हैं।
यहीं बैठे नवादा के दलित ध्यान सिंह कहते हैं, मुस्लिम बसपा के साथ नहीं गए तो दलितों को कुछ सोचना पड़ेगा। मुन्ना भाई कहते हैं कि चुनाव सपा और भाजपा के बीच लगता है। कुछ जाट और किसान यूनियन से जुड़े लोग राकेश टिकैत के साथ जाएंगे।
शिया समुदाय के लोग आम आदमी पार्टी के कल्बे रुशैद को वोट देंगे। अब्दुल बुखारी को लगता है कि मुस्लिमों के रुझान में बदलाव आ सकता है और मुकाबला भाजपा और बसपा के बीच भी हो सकता है।
वहीं हाजी शकील कहते हैं कि भाजपा उम्मीदवार कंवर सिंह तंवर ने समाजसेवा की है। वह भाजपा प्रत्याशी का समर्थन करेंगे।
रैलियों से बदला माहौल
हसनपुर में अतरासी अड्डे पर खड़े लोग कहते है कि 29 मार्च को मोदी और अखिलेश की रैलियों के बाद माहौल कुछ बदला है। जनता सब कुछ समझ रही है।
देव इलेक्ट्रिकल्स के संचालक कुलदीप कहते हैं कि चुनाव हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण की तरफ जा रहा है। देहरा मिलक में मेडिकल स्टोर चलाने वाले नरेंद्र सिंह चौहान भाजपा और सपा की टक्कर मान रहे हैं।
हसनपुर-अमरोहा मार्ग पर बावनखेड़ी गांव में प्रथमा बैंक के पास चाय और जनरल स्टोर चलाने वाले राहिद कहते हैं कि चुनाव सपा और भाजपा के बीच है। पास में मौजूद महबूब भी उनका समर्थन करते हैं।