लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बनने का रास्ता साफ
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प्रदेश के पहले अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल स्टेडियम को शासन की हरी झंडी मिल गई है। एलडीए ने इसके लिए बजट का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है। इस पर अनुमोदन से पहले एक तटस्थ इंजीनियर की राय मांगी गई है। इस पर करीब 253 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है।
ये तीन मंजिल का होगा और इसमें एक कवर्ड पार्किंग भी होगी। क्रिकेट स्टेडियम बनाने वाली इकाना स्पोर्ट्स सिटी ही इसका निर्माण भी करेगी।
गोमतीनगर विस्तार सेक्टर-7 में क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण तेजी से चल रहा है। अब इसके साथ ही फुटबॉल स्टेडियम का काम भी शुरू हो जाएगा। शासन को भेजे प्रस्ताव में 20 हजार दर्शकों की क्षमता वाले तीन मंजिला स्टेडियम बनाने की इजाजत मांगी गई थी।
यहां दर्शक दीर्घा, कॉर्पोरेट बॉक्स, मीडिया, वीआईपी गैलरी भी बनाई जाएंगी। डीपीआर में फुटबाल स्टेडियम के लिए करीब 187 करोड़ रुपये और कवर्ड पार्किंग के लिए 63 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है।
खेल परिसर की शर्तों में नहीं था शामिल
एलडीए की ओर से बताया गया है कि पीपीपी के आधार पर बनाए जा रहे क्रिकेट स्टेडियम और खेल परिसर की शर्तों में इतने बड़े फुटबाल स्टेडियम को शामिल नहीं किया गया था। इस वजह से इस पर होने वाला खर्च शासन को करना पड़ेगा।
तटस्थ इंजीनियर की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया शुरू
हाल ही में शासन में एक बैठक हुई थी। इसमें इस फुटबाल स्टेडियम का काम आगे बढ़ाने से पहले एक तटस्थ इंजीनियर को नियुक्त कर के उसकी राय शासन के समक्ष रखने को कहा गया है।
इस इंजीनियर की नियुक्ति की प्रक्रिया लखनऊ विकास प्राधिकरण ने शुरू कर दी है। जिसके बाद में शासन के समक्ष अगली रिपोर्ट रखी जाएगी।
फिलहाल वाराणसी फुटबॉल का गढ़ रहा है
अब तक उत्तर प्रदेश में फुटबाल स्टेडियम इतने ऊंचे स्तर का नहीं है। यहां अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल मैचों के साथ ही इंडियन फुटबाल लीग के मुकाबले भी करवाए जा सकेंगे। इससे फुटबॉल का स्तर ऊंचा होगा।
संतोष ट्रॉफी, डुरुंड कप, आई लीग जैसे बड़े टूर्नामेंट के आयोजन का भी अवसर मिल सकेगा। फिलहाल वाराणसी फुटबाल का गढ़ रहा है। जबकि राजधानी के कुछ इलाकों में भी फुटबाल को काफी शौक से खेला जाता है। अच्छी खासी भीड़ भी उमड़ती है।
इस पर एलडीए के मुख्य अभियंता ओपी मिश्रा का कहना है कि शासन ने एक तटस्थ अभियंता नियुक्त कर उसकी राय फुटबाल स्टेडियम के संबंध में मांगी है। पीपीपी पर बनाए जा रहे प्रोजेक्ट के लिए ये अनिवार्य होता है। इसके बाद में शासन बजट अनुमोदन करेगा।