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ग्रीन कॉरिडोर : तीसरे चरण में सेना की जमीन का अड़ंगा दूर

Thu, 26 Sep 2024 07:01 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 26 Sep 2024 07:01 AM IST
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Green Corridor: Army land hurdle removed in third phase
लखनऊ। ग्रीन कॉरिडोर के तीसरे चरण के निर्माण में आ रहा सेना की जमीन का अड़ंगा दूर हो गया है। एलडीए की सेना के साथ सहमति बनने के बाद पिपराघाट से शहीद पथ के बीच बंधा निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। जमीन देने को लेकर सेना की ओर से कुछ मांगें रखी गई हैं। इन्हें प्रस्ताव में शामिल करते हुए अधिकारियों को फाइनल ड्राफ्ट तैयार करने के आदेश एलडीए उपाध्यक्ष ने दिए हैं।
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गोमती के दोनों तट पर 25 किमी की लंबाई में चार लेन के ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण हो रहा है। पहले चरण में आईआईएम रोड से पक्का पुल तक नदी के एक तट की ओर का काम हो गया है और छह महीने से इस पर ट्रैफिक चल रहा है। दूसरे चरण में पक्का पुल से पिपराघाट तक, तीसरे में पिपराघाट से शहीद तक और चौथे में शहीद पथ से किसान पथ तक निर्माण होना है।
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तीसरे फेज के दायरे में सेना की करीब 21.80 हेक्टेयर जमीन आने से निर्माण नहीं हो पा रहा था। सेना से जमीन लेने को लेकर एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार तीन दिन पहले अफसरों के साथ रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों से बात करने के लिए दिल्ली गए थे। इसमें जमीन को लेकर सहमति बन गई।
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नदी के दाहिने तट पर बनाया जाना है बंधा

ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट इम्पलीमेंटेशन यूनिट के प्रभारी एके सिंह सेंगर ने बताया कि पिपराघाट से शहीद पथ के बीच नदी के दाहिने तट पर 5.8 किमी लंबा बंधा बनना है। इसमें से 2.8 किमी का हिस्सा छावनी क्षेत्र में आ रहा है, जिसके लिए सेना की 21.81 हेक्टेयर जमीन प्राधिकरण को हस्तांतरित कराई जानी है। इस संबंध में तैयार कराए प्रस्ताव पर एलडीए के साथ स्थानीय स्तर पर रक्षा संपदा, सेना व सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ पूर्व में बैठक हुई थी। इसमें सहमति मिलने पर प्रस्ताव सैन्य मंत्रालय को भेजा गया था, जो मंजूर हो गया है।



सेना की जमीन में नहीं भरेगा पानी, बढ़ेगा महत्व

एलडीए उपाध्यक्ष ने बताया कि बंधा बनने से बारिश में सेना की जमीन पर होने वाले जलभराव से निजात मिल जाएगी। इससे भूमि की उपयोगिता बढ़ने के साथ छावनी क्षेत्र में रहने वाले सेना के अधिकारियों और आम नागरिकों को एयरपोर्ट आने-जाने के लिए सीधी कनेक्टीविटी मिल जाएगी। इससे शहर की बड़ी आबादी को फायदा मिलेगा।

सैन्य कर्मियों के लिए बनाए जाएंगे रैंप व अंडरपास

23 सितंबर को रक्षा मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी (भूमि एवं कार्य) के साथ एलडीए अफसरों की बैठक में तय हुआ कि गंगा बाढ़ नियंत्रण परिषद के मानकों के अनुरूप बंधे के एलाइनमेंट को जितना हो सके नदी की ओर शिफ्ट किया जाए। इस पर एलडीए उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को एक बार फिर स्थल निरीक्षण कर नए सिरे से एलाइनमेंट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सेना के अधिकारियों व स्टाफ के आवागमन के लिए बंधे पर तय स्थानों पर रैंप व अंडरपास बनाने को भी कहा है।
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