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यूपी के राज्यपाल ने लोकायुक्त संशोधन विधेयक रोका

Wed, 09 Sep 2015 10:16 AM IST
Updated Wed, 09 Sep 2015 10:16 AM IST
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governor stays lokayukt amendation bill

लोकायुक्त नियुक्ति को लेकर राजभवन और सरकार के बीच चल रही तनातनी खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही। मनमाफिक लोकायुक्त चयन के लिए यूपी सरकार ने विधानमंडल से जो लोकायुक्त संशोधन विधेयक पास कराया था, उसे राज्यपाल राम नाईक ने रोक लिया है।

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इस विधेयक में सरकार ने लोकायुक्त चयन में इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका ही खत्म कर दी है। राजभवन ने साफ किया है कि कोई भी फैसला विधिवत परीक्षण के बाद ही लिया जाएगा।
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विधानमंडल सत्र में सरकार ने 11 संशोधन विधेयक पारित कर राज्यपाल के पास भेजे थे। राज्यपाल ने इनमें से सिर्फ छह को मंजूरी दी है। शेष पांच में से तीन राष्ट्रपति के पास भेजने का फैसला किया है।
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उ.प्र. लोकायुक्त एवं उपलोकायुक्त संशोधन विधेयक और डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान विधेयक रोक लिया है। लोकायुक्त संशोधन विधेयक के अनुसार लोकायुक्त का चयन मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की चार सदस्यीय कमेटी करेगी। चयन में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की भूमिका खत्म कर दी गई है।

सरकार की मंशा ताकि चुन सके मनमाफिक लोकायुक्त

governor stays lokayukt amendation bill

यूपी सरकार ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश रविंद्र सिंह का नाम लोकायुक्त के लिए भेजा था। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने असहमति जताई तो राज्यपाल ने नाम को खारिज कर दिया।

इसके बावजूद सरकार ने रविंद्र की नियुक्ति के लिए राज्यपाल को चार बार फाइल भेजी जिसे उन्होंने चारों बार खारिज कर दिया। कहा, जस्टिस रविंद्र का चयन नियमों के तहत नहीं हुआ। कोई ऐसी बैठक भी नहीं हुई जिसमें मुख्यमंत्री, चीफ जस्टिस व नेता प्रतिपक्ष तीनों मौजूद रहे हों। तब सरकार ने चयन प्रक्रिया ही बदल डाली।

इन्हें दी मंजूरी
इन्हें राष्ट्रपति के पास भेजा
•उत्तर प्रदेश विनियोग (2015-16 का अनुपूरक)
•कृषि उत्पादन मंडी (द्वितीय संशोधन) विधेयक
•उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (संशोधन) विधेयक
•प्राविधिक विश्वविद्यालय (संशोधन विधेयक)
•इंडियन मेडिसिन (संशोधन) विधेयक
•डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय यूपी(संशोधन) विधेयक
•उत्तर प्रदेश सिविल विधि (संशोधन) विधेयक
•भारतीय स्टांप (उत्तर प्रदेश संशोधन विधेयक)
•एरा विश्वविद्यालय लखनऊ, संशोधन विधेयक।

डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्‍थान विधेयक भी रोका

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राज्यपाल ने लोकायुक्त संशोधन विधेयक के साथ डॉ.राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान विधेयक-2015 भी रोक लिया है। सरकार ने इस विधेयक के जरिये राम मनोहर लोहिया अस्पताल व लोहिया संस्थान को एक करने का फैसला लिया है।

बताया जाता है कि राजभवन इस विधेयक का परीक्षण इस लिहाज से करा रहा है कि मुख्य सचिव को इसका सर्वेसर्वा बनाने से संस्थान की स्वायत्तता पर कितना असर पड़ेगा।

गौरतलब है कि सरकार ने लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के संचालन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति बनाने का प्रावधान किया है।

इसमें चिकित्सा शिक्षा, वित्त, नियोजन, न्याय विभाग के प्रमुख सचिव या उनके द्वारा नामित अधिकारी, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण समेत चिकित्सा के क्षेत्र से जुड़े लोगों को बतौर सदस्य शामिल होंगे।

इसके बाद यह संस्थान भी एम्स की तर्ज पर अपनी खुद डिग्री प्रदान कर सकेगा। इस विधेयक को सरकार ने कैबिनेट बाई सर्कुलेशन से पास करा कर विधानसभा के दोनों सदनों से पास कराया था।

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