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बढ़ा टकराव, राज्यपाल ने फिर बैरंग लौटाई लोकायुक्त की फाइल

Tue, 25 Aug 2015 12:24 PM IST
Updated Tue, 25 Aug 2015 12:24 PM IST
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governor ram naik reject lokayukta file again

उप्र में लोकायुक्त की नियुक्ति का विषय अब राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच तल्खी का विषय बन चुका है। राज्यपाल ने मंगलवार को चौथी बार लोकायुक्त नियुक्ति की फाइल सरकार को बैरंग लौटा दी है। इसके पहले वह तीन बार अलग-अलग कारण बताकर लोकायुक्त की फाइल को वापस करते रहे हैं।

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पिछले 20 दिनों के अंदर यह चौथी बार है जब गवर्नर ने राज्य सरकार को चौथी बार लोकायुक्त नियुक्ति की फाइल वापस कर दी है। एक ओर जहां सरकार जस्टिस रविन्द्र सिंह यादव को लोकायुक्त नियुक्त करने पर अड़ गई है।
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वहीं दूसरी तरफ राज्यपाल का कहना है कि सरकार लोकपाल की नियुक्ति को लेकर सही कानूनी प्रक्रिया नहीं अपना रही है। लोकायुक्त को लेकर दोनों पक्षों के मतभेद की वजह से लोकायुक्त की नियुक्ति का मामला टलता जा रहा है।
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नहीं बताई कोई वजह

governor ram naik reject lokayukta file again

इससे पहले 21 अगस्त को राज्यपाल राम नाइक ने तीसरी बार लोकायुक्त फाइल वापस करने के बाद कहा था कि सीएम, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और विधानसभा के नेता विरोधी दल की राय में एकरुपता ना होने की वजह से वह बार-बार फाइल वापस कर रहे हैं।

राज्यपाल ने साफ किया था कि चौथी बार लोकायुक्त की फाइल राजभवन एक बार फिर आ रही है। लोकायुक्त की फाइल देखने के बाद ही राजभवन इस बात फैसला लेगा कि यूपी का लोकायुक्त कौन होगा। राजभवन और सरकार के बीच प्रतिष्ठा का विषय बने लोकायुक्त मु्द्दे पर गवर्नर ने कहा कि सरकार संवैधानिक मर्यादाओं के ख्याल करें।

वर्ष 2012 में जब अखिलेश यादव सरकार सत्ता में आई थी तब भी लोकायुक्त को लेकर तत्कालीन राज्यपाल और प्रदेश सरकार के बीच टकराव की स्थिति बन गई थी, लेकिन वह स्थिति लोकायुक्त के कार्यकाल को छह वर्ष से बढ़ाकर आठ वर्ष करने को लेकर पैदा हुई थी।

राजभवन ने सरकार की बात मान ली थी और तत्कालीन लोकायुक्त न्यायामूर्ति एन के मेहरोत्रा का कार्यकाल दो साल के लिए बढ़ा दिया गया था। कार्यकाल पूरा हो जाने के बावजूद चूंकि नये लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हो पाई है, मेहरोत्रा संवैधानिक व्यवस्था के तहत अब भी पद पर बरकरार है।
   

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