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गैरकानूनी तरीके से सीमा से अधिक खरीदी गई जमीन नियमित कराने का कानून लागू, 50 की जगह 10 प्रतिशत जुर्माना

Tue, 05 Jan 2021 11:24 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 05 Jan 2021 11:24 PM IST
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Governor Anandiben Patel approved UP Revenue Code Ordinance 2020
आनंदीबेन पटेल। - फोटो : अमर उजाला
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने यूपी राजस्व संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2020 को मंजूरी दे दी है। विधायी विभाग ने इससे संबंधित अधिसूचना जारी कर दी है। अध्यादेश प्रभावी होने के साथ ही सरकार ने बिना अनुमति तय सीमा से अधिक खरीदी गई जमीन विनियमित कराने का अर्थदंड 50 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने और इस प्रावधान का लाभ लेने संबंधी प्रक्रिया तय कर आदेश जारी कर दिया है। 
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सरकार लोकहित से जुड़ी परियोजनाओं के लिए 10 फीसदी अर्थदंड भी माफ कर सकती है। प्रदेश सरकार ने उद्योगों व सरकार की निर्माण परियोजनाओं के लिए जमीन की व्यवस्था में आने वाली अड़चन दूर करने के लिए पिछले दिनों राजस्व संहिता की विभिन्न धाराओं में संशोधन का फैसला किया था। 
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इससे संबंधित यूपी राजस्व संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2020 को मंजूरी के लिए राज्यपाल को भेजा गया था। राज्यपाल ने अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। इस कानून में किसी रजिस्ट्रीकृत फर्म, कंपनी, पार्टनरशिप फर्म, लि. लाईबिलिटी पार्टनरशिप फर्म, न्यास, समिति अथवा किसी अन्य शैक्षिक या पूर्त संस्था ने यदि राज्य सरकार की अनुमति के बिना जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम-1950 के समाप्त होने से पहले या बाद में 5.0586 हेक्टेयर से अधिक भूमि की खरीद की है तो जुर्माना लगाकर नियमित करने की व्यवस्था है। 
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सरकार ने जुर्माने की राशि आवेदन करते समय लागू सर्किल दर के अनुसार तय सीमा से अधिक भूमि के हिस्से की लागत का 10 प्रतिशत तय किया है। पहले यह राशि 50 प्रतिशत थी। इससे नियम विरुद्ध जमीन खरीदने वालों को बड़ी राहत मिली है।

भूमि विनियमित कराने की प्रक्रिया

  • संबंधित व्यक्ति, समिति, संस्था, उद्योग/ कंपनी को भूमि के विनियमितीकरण के लिए शासन के संबंधित प्रशासकीय विभाग को आवेदन देना होगा।
  • प्रशासकीय विभाग आवेदन की जांच कर केंद्र या राज्य सरकार द्वारा तय न्यूनतम भूमि की आवश्यकता के मानक के अनुसार भूमि से संबंधित रिपोर्ट जिलाधिकारियों से प्राप्त करेगा।
  • जिलाधिकारी भूमि के विनियमितीकरण के लिए जुर्माने की राशि का निर्धारण कर प्रस्ताव प्रशासकीय विभाग को भेजा जाएगा।
  • प्रशासकीय विभाग बिना पूर्व अनुमति खरीदी गई भूमि के विनियिमत करने के प्रस्ताव पर कैबिनेट का अनुमोदन लेगा।
  • यदि प्रशासकीय विभाग को लगता है कि अतिरिक्त भूमि का हिस्सा जिस पर जुर्माना लिया जाना है, लोकहित में विभिन्न प्रोत्साहन नीतियों के अधीन आने वाली परियोजनाओं, निजी विश्वविद्यालयों व मेडिकल कालेजों की स्थापना से संबंधित है तो वह 10 प्रतिशत जुर्माने से भी छूट दे सकेगा। इस छूट की मंजूरी भी कैबिनेट से ली जाएगी।
  • कैबिनेट की सहमति लेने के बाद प्रशासकीय विभाग औपचारिक आदेश जारी करने के लिए प्रस्ताव राजस्व विभाग को उपलब्ध कराएंगे। राजस्व विभाग आदेश जारी करेगा।

प्राधिकरण क्षेत्रों की विकास परियोजनाओं की भी अड़चन दूर

इसके अलावा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के कई क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों की सरकारी भूमि आती है। यहां ग्राम पंचायत की जमीन यदि प्राधिकरण के किसी विकास योजना में आती है तो उसका विकास बाधित हो जाता है। पंचायतीराज व राजस्व विभाग की अनुमति के बिना प्रोजेक्ट अटक जाते हैं। राजस्व संहिता में राज्य सरकार को सरकारी जमीन ग्राम पंचायत या किसी प्राधिकरण को सौंपने का अधिकार दिया गया है।

सरकार ने स्थानीय प्राधिकरण की परिभाषा में क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत, टाउन एरिया, नोटिफाइड एरिया, छावनी क्षेत्र, नगर पंचायत, नगर पालिका, नगर महापालिका, नगर निगम, नोएडा विकास प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण व यमुना एक्सप्रेस-वे विकास प्राधिकरण या अन्य औद्योगिक विकास क्षेत्र अंतर्गत घोषित औद्योगिक नगरी को शामिल करने का फैसला किया है। अब प्राधिकरण क्षेत्र में ग्राम सभा की सरकारी जमीन का प्रबंधन प्राधिकरणों को मिल सकेगा। इससे औद्योगिक इकाइयों की स्थापना में आने वाली बड़ी अड़चन दूर हो सकेगी।
 
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