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अब नगर निकायों को छोटे कामों के लिए सरकार नहीं देगी धन, कहा- खुद जुटाएं आय के साधन
Sat, 11 May 2019 01:01 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Sat, 11 May 2019 01:01 PM IST
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नगर निगम
- फोटो : amar ujala
नगर निकाय क्षेत्रों में छोटी लागत वाले विकास कार्यों के लिए अब सरकार से धन नहीं मिलेगा। इसके लिए नगर निकायों को खुद की आमदनी बढ़ानी होगी। नगर विकास विभाग ने नगर निकायों को ऐसे कार्यों का खर्च वहन करने के लिए आमदनी के नए स्रोत तलाशने को कहा है।
अधिकतर नगर निकायों की आर्थिक स्थिति बदहाल है। आय के साधन बढ़ने के बाद भी उनकी आमदनी घटती जा रही है। इसकी मुख्य वजह यह है कि खुद की आय के साधन बढ़ाने को लेकर निकायों के स्तर पर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
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अधिकतर नगर निकायों की आर्थिक स्थिति बदहाल है। आय के साधन बढ़ने के बाद भी उनकी आमदनी घटती जा रही है। इसकी मुख्य वजह यह है कि खुद की आय के साधन बढ़ाने को लेकर निकायों के स्तर पर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
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छोटे-मोटे स्थानीय कार्यों के लिए भी धन की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों में आर्थिक दिक्कत होना स्वाभाविक है, पर नगर निगमों की स्थिति तो उनसे भी खराब है। हर महीने करोड़ों रुपये का टैक्स वसूलने वाले नगर निगम भी नाली-खड़ंजा जैसे कार्यों के लिए सरकार पर निर्भर होते जा रहे हैं।
शहरों का क्षेत्रफल और मकानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सैकड़ों कॉलोनियां बन गई हैं, लेकिन निगमों की आमदनी जस की तस है। इसे देखते हुए नगर विकास विभाग ने सभी निकाय प्रमुखों को पत्र भेजकर खुद की आमदनी बढ़ाने का निर्देश दिया है।
उन्हें कहा गया है कि शहर में गली निर्माण, नाली-खड़ंजा समेत अन्य छोटे कार्योंके लिए धन की व्यवस्था निकायों को अपने स्तर से ही करनी पड़ेगी। इनकार्यों के लिए शासन से धन नहीं दिया जाएगा।
शहरों का क्षेत्रफल और मकानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सैकड़ों कॉलोनियां बन गई हैं, लेकिन निगमों की आमदनी जस की तस है। इसे देखते हुए नगर विकास विभाग ने सभी निकाय प्रमुखों को पत्र भेजकर खुद की आमदनी बढ़ाने का निर्देश दिया है।
उन्हें कहा गया है कि शहर में गली निर्माण, नाली-खड़ंजा समेत अन्य छोटे कार्योंके लिए धन की व्यवस्था निकायों को अपने स्तर से ही करनी पड़ेगी। इनकार्यों के लिए शासन से धन नहीं दिया जाएगा।
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अधिकार के बाद भी नहीं वसूलते हैं टैक्स
सरकार की ओर से समय-समय पर जारी आदेशों में निकायों को टैक्स निर्धारण और वसूली के लिए व्यापक अधिकार दिए गए हैं। इसके बावजूद अधिकतर निकाय इस दिशा में प्रयास ही नहीं करते। निकायों को उन संस्थानों व उपक्रमों से भी टैक्स वसूलने का निर्देश दिया गया है, जो टैक्स के दायरे में हैं, लेकिन अब तक उन पर टैक्स का निर्धारण ही नहीं हो सका है।