गठबंधन से मुकाबले के लिए बजट के जरिए ‘50 प्लस' फॉर्मूले पर बढ़ी सरकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोकसभा आम चुनाव से पहले पेश बजट के जरिये केंद्र व राज्य की सरकार ने आपसी तालमेल से सपा-बसपा गठबंधन के मुकाबले के लिए चुनाव में ‘50 प्लस’ वोट बैंक साधने के मिशन पर सधा कदम बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘पीएम किसान सम्मान निधि योजना’ के सहारे प्रदेश के सभी छोटे व मझोले किसानों तक पहुंच बनाने की कोशिश की, तो योगी सरकार ने ‘कन्या सुमंगला योजना’ के जरिये आधी आबादी को साधने का प्रयास किया। दोनों योजनाओं के जरिये भाजपा प्रदेश के आधे से अधिक परिवारों तक नकद प्रोत्साहन स्कीम का लाभ पहुंचाकर सीधे पहुंच बना सकती है।
शासन के एक अपर मुख्य सचिव बजट का विश्लेषण कुछ इस तरह से करते हैं। उनका कहना है कि बारीकी से देखिए तो दोनों योजनाएं पूरी तरह चुनावी कसरत का हिस्सा हैं। वजह, जब से सपा व बसपा का गठबंधन हुआ है, भाजपा लगातार 50 प्रतिशत प्लस वोट शेयर का लक्ष्य घोषित कर चुकी है। केंद्र व राज्य की भाजपा सरकारों ने आपसी तालमेल का बेहतर प्रदर्शन करते हुए इस ओर तेजी से कदम बढ़ाया।
वह समझाते हैं कि केंद्रीय बजट में पीएम किसान सम्मान निधि के तहत छोटे व मझोले किसानों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। प्रदेश में 2.15 करोड़ किसान परिवारों को नियमित रूप से तीन किस्तों में इस योजना का लाभ मिलने का अनुमान है। केंद्र सरकार ने चुनाव की वजह से ही इसका लाभ दिसंबर से ही देने की घोषणा की है। प्रदेश सरकार इसकी पहली किस्त इस महीने के अंत तक ही लाभार्थियों को पहुंचाने की तैयारी कर रही है। इस तरह यह योजना पूरी तरह चुनावी है।
वह कहते हैं कि इसी तरह कन्या सुमंगला योजना का प्रभाव हर परिवार तक पहुंचेगा। योजना एक अप्रैल से ही लागू हो जाएगी। योजना में बेटी के जन्म लेते ही आर्थिक सहायता की शुरुआत का प्रस्ताव है। यानी चुनाव की सरगर्मी बढ़ने तक प्रदेश के हर हिस्से में परिवारों को कन्या के जन्म पर नकद आर्थिक सहायता मिलनी शुरू हो जाएगी।
चुनावी होने का तर्क
अधिकारी ने दावा किया कि प्रदेश सरकार ने केंद्रीय बजट पेश होने से पहले किसानों के लिए एक ‘किसान समर्थ योजना’ योजना तैयार की थी। इसमें युवा बेरोजगारों को 20 लाख रुपये तक अनुदान देकर किसान समर्थ केंद्र खोलकर स्वरोजगार उपलब्ध कराना था। इस तरह के 1000 केंद्र खोलने के प्रस्ताव थे। यहां से किसानों को किराए पर कृषि यंत्र मिलता, लेकिन केंद्रीय आम बजट में किसानों के अकाउंट में सीधे 6000 रुपये आर्थिक सहायता देने के एलान के बाद सरकार ने मन बदल दिया। राज्य ने पूरा फोकस आधी आबादी पर केंद्रित कर लिया। अंतिम समय पर ‘किसान समर्थ योजना’ ड्राप कर दी गई।
योजनाकारों का तर्क
हालांकि कन्या सुमंगला योजना बनाने में शामिल रहे वित्त विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी इसे चुनावी योजना कहने पर आपत्ति जताते हैं। वह कहते हैं कि केंद्र की योजना भी किसानों को समर्थ बनाने वाली है। ठीक चुनाव के पहले लाए जाने की वजह से उसे चुनावी नजरिए से देखने को लोग स्वतंत्र हैं। यह योजना न सिर्फ सत्ताधारी दल के संकल्प-पत्र में शामिल है बल्कि मुख्यमंत्री पहले बजट से ही इसका एलान करना चाहते थे। लेकिन, पहले बजट में 36 हजार करोड़ रुपये किसानों की कर्जमाफी के लिए रखने की वजह से नहीं लाई जा सकी।
दूसरे बजट में सातवें वेतन का एरियर व छूटे किसानों की कर्जमाफी पर केंद्रित रहा। इस बार नई योजना में सबसे पहले इसे ही रखने को कहा गया। वह कहते हैं कि कन्या सुमंगला योजना परिवारों में बेटी-बेटा के जन्म में भेदभाव की प्रवृत्ति पर बड़ा अंकुश लगाएगी। इससे न सिर्फ परिवार में बोझ मानकर बेटियों की भ्रूण हत्या करने के पाप रुकेंगे बल्कि जन्म से ही पढ़ाई व शादी की उम्र तक हर स्तर पर आर्थिक सहायता दिए जाने से बेटी को लेकर परिवारों की भावना बदलेगी। बेटियां समर्थ बनेंगी और आगे बढ़ेंगी। महिला सशक्तीकरण को लेकर सरकार की यह अनूठी पहल है।