फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   government employee will be eligible for reimbursement only for govt hospital treatment 

सरकारी कर्मचारियों का इलाज अब सरकारी अस्पताल में ही, प्राइवेट से इलाज पर नहीं मिलेगा पैसा

Sat, 10 Mar 2018 10:59 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 10 Mar 2018 10:59 AM IST
विज्ञापन
government employee will be eligible for reimbursement only for govt hospital treatment 
hospital - फोटो : अमर उजाला

सूबे की बेपटरी चिकित्सा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए हाईकोर्ट ने विस्तृत आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सभी सरकारी कर्मचारी और सरकार से वेतन पाने वाले लोग अपना इलाज सरकारी अस्पतालों में ही कराएं।

विज्ञापन


सरकारी अस्पतालों में रिक्त पड़े पदों को शीघ्रता से भरा जाए। प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों का ऑडिट कैग से कराने के साथ ही डाक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस रोकने के लिए हर जिले में एक विजिलेंस टीम गठित करने का भी अदालत ने आदेश दिया है।
विज्ञापन


इलाहाबाद की स्नेहलता और अन्य की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति अजीत कुमार की पीठ ने कहा कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराता है तो उसका भुगतान सरकारी खजाने से नहीं किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


सभी सरकारी अस्पतालों का ऑडिट एक वर्ष में पूरा कराने का पीठ ने आदेश दिया है। चिकित्सा सुविधाओं को लेकर दिए निर्देश में कोर्ट ने मुख्य सचिव से कहा है कि इन आदेशों की अनुपालन रिपोर्ट 25 सितंबर 2018 को कोर्ट के समक्ष पेश की जाए।

कोर्ट ने कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों, ट्रॉमा सेंटरों में डॉक्टरों और अन्य स्टाफ के रिक्त पदों में से पचास फीसदी पद चार माह में भर दिए जाएं। शेष पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया उसके अगले तीन महीने में पूरी करने का आदेश दिया है।

दो माह में कैग जांच पूरी करे

कोर्ट ने कहा है कि कैग सभी सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों आदि का ऑडिट दो माह में पूरा कर ले। अस्पतालों में पिछले 10 वर्षों के दौरान फंड की उपलब्धता और उपयोग की जांच करने का आदेश दिया है।

इसमें अनियमितता मिलने पर संबंधित विभाग को उस कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। पहले बड़े अस्पतालों और उसके बाद जिला स्तर के सरकारी अस्पतालों का ऑडिट करना होगा। तीसरे चरण में सीएचसी, पीएचसी और अन्य चिकित्सा केंद्रों की जांच होगी।

प्राइवेट प्रैक्टिस करने वालों से करें वसूली

हाईकोर्ट ने कहा है कि जो सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करता पाया जाए उससे सरकार नॉन प्रैक्टिसिंग एलाउंस की वसूली करे। रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटरों और पैथोलॉजी सेंटरों की भी विजलेंस से नियमित जांच कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इलाहाबाद में मोतीलाल नेहरू स्थित ट्रॉमा सेंटर पर रिपोर्ट मांगी है। कहा है कि ट्रॉमा सेंटर की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

प्रमुख सचिव चिकित्सा और प्राचार्य को नोटिस

हाईकोर्ट ने अदालत में झूठा हलफनामा दाखिल करने पर प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं चिकित्सा शिक्षा रजनीश दुबे और मोतीलाल नेहरू चिकित्सालय इलाहाबाद के प्राचार्य एसपी सिंह को नोटिस जारी किया है। उनसे पूछा है कि अदालत में झूठ बोलने पर क्यों न उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए और अदालत की अवमानना की कार्यवाही प्रारंभ की जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed