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ऑटोग्राफ के चक्कर में बिगड़ रहा खेल...
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 12 Apr 2014 10:08 AM IST
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साहबान जबसे शहर में गली-मोहल्लों में वोट मांगने आए हैं, उनका टाइम टेबल पटरी से उतर गया है।
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पटरी से ऐसा उतरा है कि सुबह शुरू तो समय से होता है लेकिन दोपहर बीतते-बीतते और शाम तक वो घंटे-दो घंटे तक लेट हो ही जाता है।
समर्थक भी परेशान हैं, मीडियावाले और झाड़ू वाले जनाब खुद भी। दरअसल जनाब की शख्सियत ही कुछ ऐसी है। जहां जाते हैं नन्हे-मुन्नों के अलावा उनकी मम्मियां भी उनकी फैन निकल आती हैं।
कोई ऑटोग्राफ मांग बैठता है, तो कोई फोटो खिंचवाने लगता है। ऐसे में समय तो लगता ही है।
ये बढ़ा हुआ समय बाद के कार्यक्रमों का शेड्यूल ऐसा बिगाड़ता है कि घड़ी रेस लगाना शुरू कर देती है। खामियाजा दूरदराज खड़े समर्थक भुगतते हैं और अखबारनवीस जो शेड्यूल के हिसाब से चल रहे होते हैं।
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