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जोर का झटका धीरे से
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 02 Jun 2014 08:56 AM IST
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सूबे के प्रशासनिक प्रमुख की कुर्सी पर बैठने का मंसूबा पाले एक वरिष्ठ अधिकारी को जोर का झटका लगा।
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महाशय लंबे समय से अपने सीनियर के खिलाफ लॉबिंग में जुटे थे, लेकिन दाल नहीं गली। उनकी और उनका साथ दे रहे उनकेलाइक माइंडेड अफसरों की पोल खुल गई।
सरकार को भी इस ‘गिरोह’ का खेल समझ में आ गया। जैसे ही सीनियर की चीफ के पद पर ताजपोशी की खबर लगी मुखालफत करने वाले अफसर का बीपी बढ़ गया।
सीनियर के चार्ज लेने से पहले ही चुपके से वह दफ्तर से खिसक लिए।
बेचारे के सामने सबसे बड़ा संकट यह है कि जिसकी राह में कांटे बिछा रहे थे अब उसी के सामने बाअदब हाजिर होकर कामकाज का हिसाब देना होगा।
उनकी फितरत से वाकिफ अफसर अब चुटकी ले रहे हैं कि बड़ी रफ्तार में भाग रहे थे। लगा न जोर का झटका धीरे से।