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Gonda News : बेटियां निभा रहीं बेटे का फर्ज, आंख में आंसू लेकर कर रहीं कर्मकांड

Tue, 09 Jan 2024 07:17 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव रमेश मिश्र, अमर उजाला, गोंडा
रमेश मिश्र, अमर उजाला, गोंडा Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 09 Jan 2024 07:17 PM IST
सार

बेटियों को बेटा कहकर पुकारने वाले पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन उनकी प्रेरणा से बेटियां बेटे का फर्ज निभा रही हैं।

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Gonda News: Daughters are fulfilling their son's duty
दोनों बहनों ने पिता के चिता को दी थी मुखाग्नि - फोटो : amar ujala

विस्तार

ये खबर नहीं उनके मुंह पर करारा तमाचा है, जो बेटे और बेटी में भेद करते हैं। उनके लिए पछतावे का सबब साबित होगी, जिन्होंने एक बेटे की चाहत में गर्भ में पल रही बेटी का गला घोंट दिया था। मिसाल कायम करने वाली गोंडा की ये बहनें काल की रफ्तार तो न रोक सकीं लेकिन पिता के कर्मकांड को सनातन व वैदिक विधि-विधान से पूरा रहीं हैं। बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं होता। यह केवल रूढि़वादी मानसिकता है। बेटियों को बेटा कहकर पुकारने वाले पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन उनकी प्रेरणा से बेटियां बेटे का फर्ज निभा रही हैं। पहले अंतिम संस्कार किया और अब आंख में आंसू समेटकर पिता का कर्मकांड कर रही हैं। यह देखकर हर किसी की आंखें नम हो जाती हैं। 

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Gonda News: Daughters are fulfilling their son's duty
दोनों बहनों ने पिता के चिता को दी थी मुखाग्नि - फोटो : amar ujala

हलधरमऊ विकासखंड के नकहा बसंत निवासी अभय तिवारी एक निजी कंपनी में नौकरी करते थे। उन्हें पाल्य के रूप में दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी सुरभि बीपीएड की छात्रा है, जबकि छोटी बेटी शगुन मॉस कम्युनिकेशन कर रही है। वह पत्रकारिता जगत में जाकर समाजसेवा करना चाहती है। दोनों बहनों का कहना है कि उनके पापा हमेशा उन्हें बेटा कहकर पुकारते थे। पिता की तबीयत बिगड़ी तो दोनों ने अस्पताल में भर्ती कराने से लेकर दवा लाने तक सिर पैर एक कर दिया। मगर अफसोस कि नियति को मंजूर काल की गति वह रोक न सकीं। बीते चार जनवरी को अभय तिवारी ने लखनऊ के निजी अस्पताल में आखिरी सांसें लीं। 

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पिता के आकस्मिक निधन के बाद उनकी सारी दुनिया उजड़ गई। मां को संभालने की जिम्मेदारी भी थी। इसलिए दोनों ने हिम्मत दिखाई और पिता के शव को लेकर गांव पहुंचीं। गांव-समाज व रिश्तेदारों ने बेटियों को रोका, समझाया कि यह कर्मकांड बेटे ही करते हैं, लेकिन वह नहीं मानीं। दोनों ने मिलकर पिता का अंतिम संस्कार किया। कर्मकांड के सवाल पर दोनों बेटियों की आंखें भर आईं। कहा कि मेरे पापा हमेशा बेटा कहकर ही पुकारते थे। बेटे जैसा ही प्यार दिया। इसलिए वह दोनों पिता का कर्मकांड कर रही हैं। माता माधुरी पति के जाने के बाद अब बेटियों की पढ़ाई के लिए परेशान दिख रही हैं। कहा कि कुछ भी हो जाए, मगर बेटियों की शिक्षा में कोई कमी नहीं छोड़ेंगी। 

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