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घोसी उप चुनावः एनडीए बनाम 'इंडिया' का पहला रण आज, नतीजे तय करेंगे प्रदेश में भविष्य की दिशा
Tue, 05 Sep 2023 08:11 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 05 Sep 2023 08:11 AM IST
सार
भाजपा ने घोसी विधानसभा उप चुनाव को जीतने के लिए चुनाव के अंतिम दिनों में अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया। पार्टी रणनीतिकारों ने चुनाव को दारा सिंह चौहान बनाम सुधाकर सिंह की जगह भाजपा बनाम समाजवादी पार्टी बनाने में पूरी ताकत झोंकी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
घोसी विधानसभा चुनाव के लिए आज होने वाले मतदान में प्रदेश में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) बनाम इंडिया का पहला रण होगा। उपचुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाते हुए भाजपा और समाजवादी पार्टी ने बूथ स्तर तक मोर्चेबंदी की है।
घोसी उप चुनाव में भाजपा के दारा सिंह चौहान और सपा के सुधाकर सिंह के बीच सीधी टक्कर है। चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में जहां एनडीए के सहयोगी अपना दल, सुभासपा और निषाद पार्टी पूरी तरह उतरे हुए हैं। वहीं सपा को इंडिया के घटक दल रालोद, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने समर्थन दिया है।
इससे चुनावी मुकाबला एनडीए बनाम 'इंडिया' बन गया है। दोनों ही दलों ने उप चुनाव जीतने के लिए बूथ से लेकर निर्वाचन आयोग तक मोर्चेबंदी की है। भाजपा की ओर से जहां प्रत्येक बूथ पर मजबूत टीम तैनात करने के साथ जिम्मेदार पदाधिकारियों को तैनात किया है। मतदान के दिन सरकार के मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी एक-एक बूथ की स्थिति पर नजर रखेंगे।
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वहीं सपा की ओर से भी बूथों के लिहाज से मजबूत रणनीति बनाई गई है। स्थानीय यादव, मुस्लिम, भूमिहार, ठाकुर नेताओं को वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं। घोसी के जातीय समीकरण के लिहाज से उप चुनाव में ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो 8 सितंबर को मतगणना के बाद ही तय होगा। लेकिन चुनाव नतीजे के प्रदेश में एनडीए और इंडिया के भविष्य की दिशा तय करेंगे।
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घोसी उप चुनाव में भाजपा के दारा सिंह चौहान और सपा के सुधाकर सिंह के बीच सीधी टक्कर है। चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में जहां एनडीए के सहयोगी अपना दल, सुभासपा और निषाद पार्टी पूरी तरह उतरे हुए हैं। वहीं सपा को इंडिया के घटक दल रालोद, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने समर्थन दिया है।
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इससे चुनावी मुकाबला एनडीए बनाम 'इंडिया' बन गया है। दोनों ही दलों ने उप चुनाव जीतने के लिए बूथ से लेकर निर्वाचन आयोग तक मोर्चेबंदी की है। भाजपा की ओर से जहां प्रत्येक बूथ पर मजबूत टीम तैनात करने के साथ जिम्मेदार पदाधिकारियों को तैनात किया है। मतदान के दिन सरकार के मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी एक-एक बूथ की स्थिति पर नजर रखेंगे।
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वहीं सपा की ओर से भी बूथों के लिहाज से मजबूत रणनीति बनाई गई है। स्थानीय यादव, मुस्लिम, भूमिहार, ठाकुर नेताओं को वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं। घोसी के जातीय समीकरण के लिहाज से उप चुनाव में ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो 8 सितंबर को मतगणना के बाद ही तय होगा। लेकिन चुनाव नतीजे के प्रदेश में एनडीए और इंडिया के भविष्य की दिशा तय करेंगे।
दारा बनाम सुधाकर की जगह भाजपा बनाम सपा का चला दांव
भाजपा ने घोसी विधानसभा उप चुनाव को जीतने के लिए चुनाव के अंतिम दिनों में अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया। पार्टी रणनीतिकारों ने चुनाव को दारा सिंह चौहान बनाम सुधाकर सिंह की जगह भाजपा बनाम समाजवादी पार्टी बनाने में पूरी ताकत झोंकी।
भाजपा ने घोसी विधानसभा उप चुनाव को जीतने के लिए चुनाव के अंतिम दिनों में अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया। पार्टी रणनीतिकारों ने चुनाव को दारा सिंह चौहान बनाम सुधाकर सिंह की जगह भाजपा बनाम समाजवादी पार्टी बनाने में पूरी ताकत झोंकी।
इस चुनाव के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सहित सरकार और संगठन की टीम ने करीब पंद्रह दिनों तक कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करने के साथ चुनावी राह के अवरोध दूर करने में मशक्कत की।
जानकार बताते हैं कि घोसी उप चुनाव में दारा सिंह को प्रत्याशी घोषित करने के बाद भाजपा के कार्यकर्ताओं में खासी नाराजगी थी। वहीं स्थानीय जनता में भी दारा सिंह के खिलाफ असंतोष था। समाजवादी पार्टी की ओर से इस मुद्दे को प्रचारित भी किया गया। भाजपा ने इस नाराजगी को भांपते हुए चुनाव को दारा सिंह बनाम सुधाकर सिंह की जगह भाजपा बनाम सपा करने की रणनीति अपनाई। पार्टी के नेताओं ने कार्यकर्ताओं के बीच भाजपा की प्रतिष्ठा की बात रखते हुए उनकी नाराजगी दूर की।
उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2 सितंबर को अपनी रैली में विपक्ष के साथ सपा पर सीधा निशाना साधा। योगी ने मऊ दंगों का जिक्र करते हुए जनता को साधने का प्रयास किया। कहा कि,घोसी का महत्व वही समझ पाएगा जिसने 2005 के मऊ दंगों को देखा होगा। जब मऊ जल रहा था तब उन्होंने ही दंगाबाजों के खिलाफ मोर्चा खोला था।
उन्होंने घोसी में बीते साढ़े छह वर्ष में हुए विकास की याद भी दिलाई। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी दो बार घोसी का दौरा कर वहां पिछड़े और दलित वर्ग को साधा। उन्होंने चुनावी सभाओं के साथ विश्वकर्मा सम्मेलन भी किया।
पाठक ने पुरानी दोस्ती का वास्ता देकर बसपा में सेंधमारी की
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अलग-अलग चरण में करीब आठ दिन तक घोसी में डेरा डाला। पाठक को ब्राह्मण वोट बैंक को साधने के साथ बसपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पाठक ने बसपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं से लगातार संपर्क साधकर भाजपा के लिए समर्थन मांगा। उल्लेखनीय है कि पाठक 2016 में बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। पाठक ने बड़ी संख्या में बसपा के पूर्व विधायक, सांसद और पदाधिकारियों को भाजपा में शामिल कराया है।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अलग-अलग चरण में करीब आठ दिन तक घोसी में डेरा डाला। पाठक को ब्राह्मण वोट बैंक को साधने के साथ बसपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पाठक ने बसपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं से लगातार संपर्क साधकर भाजपा के लिए समर्थन मांगा। उल्लेखनीय है कि पाठक 2016 में बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। पाठक ने बड़ी संख्या में बसपा के पूर्व विधायक, सांसद और पदाधिकारियों को भाजपा में शामिल कराया है।
चौधरी और धर्मपाल ने गली-गली वोट मांगे
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने उप चुनाव में ना केवल चुनाव प्रबंधन की कमान संभाली बल्कि गली गली वोट भी मांगा। चौधरी और धर्मपाल ने लगातार घोसी में प्रवास कर गली मोहल्लों में विभिन्न समाजों के साथ छोटी छोटी बैठक की। एक ओर कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखा दूसरी ओर चुनावी राह के कील कांटे दुरुस्त किए। प्रत्येक गली और गांव तक जातीय आधार पर नेताओं की टीम तैनात की।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने उप चुनाव में ना केवल चुनाव प्रबंधन की कमान संभाली बल्कि गली गली वोट भी मांगा। चौधरी और धर्मपाल ने लगातार घोसी में प्रवास कर गली मोहल्लों में विभिन्न समाजों के साथ छोटी छोटी बैठक की। एक ओर कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखा दूसरी ओर चुनावी राह के कील कांटे दुरुस्त किए। प्रत्येक गली और गांव तक जातीय आधार पर नेताओं की टीम तैनात की।