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लखनऊः इलाज न मिलने से दम तोड़ रहे सामान्य मरीज

Fri, 17 Apr 2020 11:42 AM IST
ishwar ashish हिमांशु अवस्थी/अमर उजाला, लखनऊ
हिमांशु अवस्थी/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 17 Apr 2020 11:42 AM IST
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general patients are not getting treatment in hospitals in lucknow
प्रतीकात्मक तस्वीर

लखनऊ के ठाकुरगंज निवासी प्रशांत (22) को सीने में अचानक दर्द उठा। दोस्त उसे पहले ठाकुरगंज के बड़े मेडिकल कॉलेज ले गए। वहां भर्ती नहीं किया गया। तीमारदार मरीज को लेकर निजी अस्पताल गए। कई निजी व सरकारी अस्पतालों के चक्कर लगाने में करीब तीन घंटे बीत गए। फिर उसे लॉरी ले गए। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। तीमारदारों ने कहा, समय उपचार मिलता तो बच सकती थी जान।

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सीतापुर की बच्ची निशा (7) को तेज बुखार आ रहा था। तीमारदार मुकम्मल इलाज के लिए सीएचसी से लेकर ट्रॉमा सेंटर तक दौड़ लगाते रहे। इस दौरान करीब पांच घंटे बीत गए। बच्ची को समय पर इलाज न मिलने से मौत हो गई। तीमारदारों का आरोप है कि समय रहते उपचार मिलता तो उसकी जान बच सकती थी।
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रायबरेली निवासी मो. शमीम को ब्रेन हैमरेज हुआ था। तीमारदार ट्रॉमा सेंटर ले गए। वहां भर्ती नहीं किया। ट्रॉमा कैजुल्टी बंद चल रही है। तीमारदार मरीज को लेकर न्यूरोलॉजी पहुंचे। जहां पर डॉक्टरों ने बलरामपुर ले जाने की सलाह दी। करीब आठ घंटे में बलरामपुर अस्पताल में मरीज का सिटी स्कैन हो सका। इलाज चल रहा है। अस्पताल में कोई भी न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ तैनात नहीं है।
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कोरोना से जंग की कीमत सामान्य मरीजों को अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ रही है। लॉकडाउन के बाद सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों में गंभीर मरीजों को मुक्कमल इलाज नहीं मिल पा रहा है। वे अस्पतालों के चक्कर लगाने में दम तोड़ रहे हैं। 

अस्पताल सील करने के बाद करीब 200 सेंटर बंद 

केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में आने वाले रोगी को भर्ती नहीं किया जा रहा है। ट्रॉमा में सिर्फ सड़क हादसे में जख्मी मरीजों को लिया जा रहा है। ट्रांमा से मरीजों को सरकारी अस्पताल भेजा जा रहा है।

वहां पर डॉक्टर व जांच की सुविधा न होने से मरीज लौटाए जा रहे है। निजी अस्पताल जल्द मरीज को लेने को राजी नहीं है। ऐसे में हर रोज लखनऊ व गैर जनपद से आने वाले दो से तीन मरीज इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं।

राजधानी में करीब 900 से अधिक छोटे-बड़े अस्पताल हैं। कोरोना की वजह से निजी अस्पतालों ने अपनी इमरजेंसी का लॉकडाउन कर रखा है। वहीं दो निजी अस्पताल व एक डायग्नोस्टिक सेंटर को सील किए जाने बाद अन्य निजी अस्पतालों ने भी मरीजों को लेना बंद कर दिया है।

निजी अस्पताल, पैथोलॉजी समेत अन्य जांच केंद्रों के करीब 200 सेंटर ने लॉक डाउन कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग के अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं।

भर्ती किए जा रहे हैं मरीज

निजी सेंटर का सहयोग लें
कोरोना से अधिक मौतें तो सामान्य मरीजों को समय पर उपचार न मिलने से हो रही हैं। निजी सेंटर सहयोग करना चाहते हैं तो उन पर कार्रवाई हो रही है। ऐसे में निजी सेंटरों ने अपना हाथ खींच लिया है। प्रशासन सहयोग करे तो सामान्य मरीजों को मुकम्मल इलाज निजी सेंटर में मिल सकता है। कोरोना मरीज निजी अस्पताल व डायग्नोस्टिक सेंटर में जाने के बाद उन्हें सील करने की कार्रवाई प्रशासन न करे। इन अस्पतालों को विसंक्रमित कराया जाए। जो भी डॉक्टर व स्टॉफ मरीज के संपर्क में आए हैं। उन्हें होम क्वारंटीन में भेजा जाए। इससे निजी सेंटर भी कोरोना की जंग में साथ देते रहेंगे। - डॉ. पीके गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष आईएमए

मरीजों की स्क्रीनिंग के बाद उन्हें ट्रॉमा में भर्ती किया जा रहा है। अति गंभीर मरीजों को प्राथमिकता से उपचार दिया जा रहा है। सभी मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। - डॉ. संदीप तिवारी, प्रवक्ता, केजीएमयू


 
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