लखनऊः भ्रष्टों को बचाने व फर्जी भुगतान करने के आरोप में पराग के महाप्रबंधक निलंबित
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चार दिसंबर को पीसीडीएफ की समीक्षा के दौरान भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। महाप्रबंधक को विभिन्न कार्य मदों में मानकों से अधिक खर्च करने, उत्तरदायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने का प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है।
इन आरोपों की नए सिरे से जांच के लिए जल्द ही अलग से अधिकारी की नियुक्ति होगी। निलंबन आदेश में कहा गया है कि महाप्रबंधक हंस वीर वर्मा पर गंभीर आरोप हैं। जांच में आरोप सिद्ध होने पर उनको बर्खास्त/पदावनत भी किया जा सकता है।
क्या था टैंकर कांड
वर्ष 2014 में हुए टैंकर कांड में विभागीय एवं पुलिस की जांच में जो पूर्ण रूप से दोषी पाए गए थे, उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का भी महाप्रबंधक पर आरोप है। महाप्रबंधक ने दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई करना तो दूर, उन्हें पराग के महत्वपूर्ण पदों पर काबिज रखा।
वहीं, महाप्रबंधक ने पराग के टैंकरों एवं वाहनों को रिपेयर नहीं कराया, लेकिन फर्जी तरीके से रिपेयर कार्य की रकम का भुगतान कर दिया।
टैंकर मालिक ने पराग के अफसराें एवं कर्मियों की साठगांठ से दूध के साथ में पानी की तौल कराकर 2 करोड़ 59 लाख 48 हजार रुपये की बंदरबांट की थी। इसकी पोल तब खुली जब वर्ष 2014 में उच्च स्तरीय जांच हुई। टैंकर मालिक के खिलाफ पुलिस में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ और टैंकर जब्त कर लिए गए। पीसीडीएफ मुख्यालय से गठित कमेटी ने मामले की जांच की।
दूध संग पानी की तौलने का घोटाला करने में 17 अफसर एवं कर्मचारी फंसे थे। इनमें पूर्व महाप्रबंधक एसके प्रसाद और बीबी बेरा के अलावा जेपी सिंह, वीपी जायसवाल, सुषमा रानी, अजारूक हक, रंजीत सिंह भदौरिया, आरके राय, एजे खान, शिवराम यादव, एके त्रिपाठी आदि पर कार्रवाई हो चुकी है। प्रशासनिक समिति के अध्यक्ष ने पराग के प्रभारी (प्रशासन) मृत्युंजय सिंह को नया महाप्रबंधक (प्रशासन) नियुक्त किया है।