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Lucknow News: व्यापारी को अगवा कर लूटने वालों पर लगेगा गैंगस्टर
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लखनऊ। बिजनौर के कपड़ा व्यापारी इश्तियाक को आजमगढ़ से अगवा कर बंधक बनाकर लूटने व फिरौती मांगने वाले गिरोह पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। बर्खास्त सिपाही गिरोह का सरगना है। पुलिस मुख्य चार आरोपियों का आपराधिक इतिहास जुटा चुकी है। अब अपहरण कर वसूली के केस में चार्जशीट लगाने की तैयारी है। इसके बाद आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई की जाएगी।
बिजनौर निवासी इश्तियाक कपड़ा बेचने के लिए आजमगढ़ गए थे। वहां बस अड्डे पर बोलेरो सवार छह लोगों ने उन्हें अगवा कर लिया था। फिर लखनऊ लाकर निरालानगर स्थित एक गेस्ट हाउस में बंधक बनाया था। इश्तियाक के 40 हजार रुपये व कपड़े लूट लिए थे। फिर उनके परिजनों को फोन कर सवा लाख रुपये फिरौती मांगी थी। अफसरों को जानकारी होने के बाद मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी।
पुलिस ने दरोगा अनुराग द्विवेदी, हेड कांस्टेबल युसुफ व हिस्ट्रीशीटर नाजिम उर्फ नफीस को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वहीं, बर्खास्त सिपाही धीरेंद्र यादव, शेखर व हिस्ट्रीशीटर दिनेश गुप्ता ने तीन दिन पहले कोर्ट में सरेंडर किया था। पूरे खेल में बर्खास्त सिपाही की भूमिका सबसे अहम रही। जानकारी ये भी सामने आई है कि पहले भी इस तरह से आरोपी वसूली को अंजाम दे चुके हैं। दोनों पुलिसकर्मियों को छोड़कर बर्खास्त सिपाही व अन्य तीनों का बड़ा आपराधिक इतिहास है। इसलिए अब इन पर गैंगस्टर लगाने की तैयारी है।
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वारदात को लेकर शेखर ने ही पुलिस को सूचना दी थी। तब सवाल उठ रहा था कि आखिर जब वह भी वारदात में शामिल था तो उसने ऐसा क्यों किया। पूरी जांच के बाद अब जानकारी स्पष्ट हो गई है। एक पुलिस अफसर के मुताबिक वारदात के दिन हिस्ट्रीशीटर नाजिम व शेखर के बीच विवाद हो गया था। दोनों नशे में धुत थे। नाजिम ने कहा कि वह पुलिस को सब कुछ बता देगा। ये सुनकर शेखर भड़क गया और कुछ देर बाद पुलिस कंट्रोल रूम पर सूचना दे दी। इस तरह से घटना का खुलासा हुआ था।
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बिजनौर निवासी इश्तियाक कपड़ा बेचने के लिए आजमगढ़ गए थे। वहां बस अड्डे पर बोलेरो सवार छह लोगों ने उन्हें अगवा कर लिया था। फिर लखनऊ लाकर निरालानगर स्थित एक गेस्ट हाउस में बंधक बनाया था। इश्तियाक के 40 हजार रुपये व कपड़े लूट लिए थे। फिर उनके परिजनों को फोन कर सवा लाख रुपये फिरौती मांगी थी। अफसरों को जानकारी होने के बाद मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी।
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पुलिस ने दरोगा अनुराग द्विवेदी, हेड कांस्टेबल युसुफ व हिस्ट्रीशीटर नाजिम उर्फ नफीस को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वहीं, बर्खास्त सिपाही धीरेंद्र यादव, शेखर व हिस्ट्रीशीटर दिनेश गुप्ता ने तीन दिन पहले कोर्ट में सरेंडर किया था। पूरे खेल में बर्खास्त सिपाही की भूमिका सबसे अहम रही। जानकारी ये भी सामने आई है कि पहले भी इस तरह से आरोपी वसूली को अंजाम दे चुके हैं। दोनों पुलिसकर्मियों को छोड़कर बर्खास्त सिपाही व अन्य तीनों का बड़ा आपराधिक इतिहास है। इसलिए अब इन पर गैंगस्टर लगाने की तैयारी है।
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वारदात को लेकर शेखर ने ही पुलिस को सूचना दी थी। तब सवाल उठ रहा था कि आखिर जब वह भी वारदात में शामिल था तो उसने ऐसा क्यों किया। पूरी जांच के बाद अब जानकारी स्पष्ट हो गई है। एक पुलिस अफसर के मुताबिक वारदात के दिन हिस्ट्रीशीटर नाजिम व शेखर के बीच विवाद हो गया था। दोनों नशे में धुत थे। नाजिम ने कहा कि वह पुलिस को सब कुछ बता देगा। ये सुनकर शेखर भड़क गया और कुछ देर बाद पुलिस कंट्रोल रूम पर सूचना दे दी। इस तरह से घटना का खुलासा हुआ था।