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हाईकोर्ट ने केजीएमयू को दिए फ्री इलाज के निर्देश
डिजीटल टीम/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 30 Apr 2014 03:15 AM IST
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सिविल अस्पताल के आर्थोपेडिक सर्जन की लापरवाही का शिकार हुई एक बच्ची को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है।
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कोर्ट ने केजीएमयू के वीसी को निर्देश दिया कि पीड़िता को अपने यहां रेफर कर मुफ्त इलाज का इंतजाम करें।
अदालत में उपस्थित हुई बेटी की हालत को देखते हुए कोर्ट ने अपेक्षा जताई कि उसका फ्री में सबसे अच्छा इलाज किया जाएगा।
जस्टिस सुनील अंबवानी और जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने मंगलवार को यह आदेश प्रियंका पांडेय की रिट पर दिया।
याची का कहना था कि 10 दिसंबर को दुर्घटना में उसके बाएं हाथ में फ्रैक्चर हो गया था। 2 जनवरी 2014 को सिविल अस्पताल के आर्थोपेडिक सर्जन ने उसका ऑपरेशन किया।
याची के पिता ने इसके लिए 60,000 रुपये कर्ज लिया, जो ऑपरेशन व दवा में खर्च हो गए।
याची का आरोप है कि सिविल अस्पताल के आर्थोपेडिक सर्जन ने ऑपरेशन प्रक्रिया (सर्जिकल प्रोसीजर) में लापरवाही बरती।
इसका खुलासा तब हुआ जब याची को दर्द से राहत नहीं मिली। याची का कहना था कि प्राइवेट अस्पताल में हुए एक्स-रे से पता चला कि ऑपरेशन कामयाब नहीं था, क्योंकि खराब गुणवत्ता वाले इम्प्लांट्स (प्लेट आदि) का इस्तेमाल किया गया था।
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इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट में यह रिट दायर कर खर्चे व पीड़ा के लिए मुआवजा दिलाए जाने समेत पीजीआई जैसे बेहतर अस्पताल में फ्री इलाज कराए जाने की गुहार की।
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कोर्ट ने मामले में पक्षकारों से 4 हफ्ते में जवाब-तलब कर अगली सुनवाई 27 मई को नियत की है। इस बीच याची के बेहतर फ्री इलाज के निर्देश स्थानीय केजीएमयू प्रशासन को दिए हैं।
कोर्ट ने अगली सुनवाई पर केजीएमयू के वकील कृष्ण चंद्रा के जरिये रिपोर्ट भी तलब की है।