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फर्जीवाड़ा: पहले हरियाणा में पंजीयन, फिर यूपी में बने आयुर्वेद डॉक्टर, निजी अस्पताल में कर रहे नौकरी
Tue, 25 Aug 2026 06:21 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Tue, 25 Aug 2026 06:21 AM IST
सार
फर्जी डिग्री के सहारे डॉक्टर बनने वाले ज्यादातर खुद की क्लीनिक चलाते हैं तो कुछ क्लीनिक के साथ ही निजी अस्पतालों में नौकरी भी करते हैं। आमतौर पर इमरजेंसी में बीएएमएस डिग्रीधारी को उपचार की अनुमति है।
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
फर्जी डिग्री के सहारे प्रदेश के विभिन्न जिलों में मरीजों का उपचार करने वालों का पहला पंजीयन हरियाणा में हुआ। फिर वहां से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लेकर उत्तर प्रदेश पहुंचे। यहां पंजीयन कराने के बाद आयुर्वेद के 41 डॉक्टरों ने मरीजों का उपचार शुरू कर दिया। पूरे मामले का खुलासा होने के बाद अब पंजीयन की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है।
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उत्तर प्रदेश में फर्जी डिग्री से खुद के डॉक्टर होने का पंजीयन कराने वाले गिरोह ने पुख्ता रणनीति तैयार की। फिर पूरे घटनाक्रम को अंजाम दिया। जांच में यह खुलासा हुआ है कि फर्जीवाड़ा करने वालों ने खुद को हरियाणा के रोहतक स्थित पंडित भागवत दयाल यूनिवर्सिटी आफ हेल्थ साइंसेस की डिग्री तैयार की। इन लोगों ने खुद को हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित श्री कृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक एवं हास्पिटल से बीएएमएस करने का विवरण दिया।
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हरियाणा में पंजीयन कराया। फिर काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन हरियाणा से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेकर आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड उत्तर प्रदेश में पंजीयन कराया। पांच फर्जी पंजीयन की शिकायत पर भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग ने जांच शुरू की। इस दौरान हरियाणा के विश्वविद्यालय और कॉलेज के प्रधानाचार्य से सभी का सत्यापन कराया गया तो पूरे मामले का खुलासा हुआ।
विश्वविद्यालय, कॉलेज और काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन हरियाणा ने 41 के संबंधित प्रमाण पत्रों को फर्जी बताया। इसके बाद इनका पंजीयन निरस्त किया गया। इसके बाद से बोर्ड ने पंजीयन की व्यवस्था में बदलाव कर दिया है। पंजीयन के लिए आवेदन करते ही बोर्डज संबंधित कॉलेज और विश्वविद्यालय से आनलाइन एनओसी मांगता है। एनओसी मिलने के बाद ही नया पंजीयन करने का आदेश दिया गया है।
ज्यादातर कर रहे निजी अस्पताल में नौकरी
फर्जी डिग्री के सहारे डॉक्टर बनने वाले ज्यादातर खुद की क्लीनिक चलाते हैं तो कुछ क्लीनिक के साथ ही निजी अस्पतालों में नौकरी भी करते हैं। आमतौर पर इमरजेंसी में बीएएमएस डिग्रीधारी को उपचार की अनुमति है। ऐसे में इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिन लोगों ने बीएएमएस की डिग्री ही नहीं ली है वे मरीज का इलाज कैसे किए होंगे? फिलहाल इस मामले का खुलासा होने के बाद अब सभी क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी से एक बार फिर इनका सत्यापन करने और क्लीनिक चलाने का लाइसेंस रद्द करने के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है।