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Lucknow News: श्रद्धा के वायरल ऑडियो-वीडियो की फोरेंसिक जांच शुरू

Tue, 27 Oct 2026 01:25 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 27 Oct 2026 01:25 AM IST
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Forensic examination of Shraddha's viral audio and video begins
​शिवा  फाइल फोटो 
लखनऊ। चिकन कारोबारी शिवा शर्मा की हत्या के मामले में श्रद्धा के वायरल ऑडियो-वीडियो की फोरेंसिक जांच शुरू हो गई है। पुलिस नए सिरे से श्रद्धा के पड़ोसियों का बयान भी दोबारा दर्ज करेगी। पुलिस को कई नई फुटेज मिली हैं जिसमें श्रद्धा और शिवा नजर आ रहे हैं। फुटेज में श्रद्धा की बहन रश्मि भी साथ दिखाई दे रही है। उधर, जेल में चौथे दिन श्रद्धा और रश्मि से मिलने तीन अधिवक्ता पहुंचे।
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तीन वकीलों ने जेल पहुंचकर दोनों बहनों से करीब 20 मिनट तक बातचीत की। इस दौरान मामले से जुड़ी कानूनी जानकारी ली गई। वकीलों ने दोनों के लिए कपड़े और रोजमर्रा के इस्तेमाल का सामान भी जमा कराया। वहीं, वकालतनामा प्रमाणित नहीं होने के कारण दो अन्य वकीलों को मुलाकात की अनुमति नहीं मिली। तीनों अधिवक्ता सोमवार दोपहर करीब 2:30 बजे जेल पहुंचे थे। उन्होंने मुलाकात के लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी कीं। जेल प्रशासन ने कोर्ट से प्रमाणित वकालतनामा, आधार कार्ड और उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की ओर से जारी सीओपी कार्ड समेत अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद तीनों को मुलाकात की अनुमति दी। दोपहर करीब तीन बजे वकीलों ने श्रद्धा और रश्मि से मुलाकात की।
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जांच के बाद बहनों तक पहुंचाया सामान
जेल सूत्रों के मुताबिक, वकीलों ने मुलाकात के दौरान दोनों बहनों के मुकदमे से जुड़ी जानकारी ली। साथ ही उनके कपड़े और दैनिक उपयोग का अन्य सामान भी मुलाकात कक्ष के काउंटर पर जमा कराया। जेल प्रशासन ने जांच और तलाशी के बाद सामान महिला सर्किल में बंद दोनों बहनों तक पहुंचाने की अनुमति दी। जेल मैनुअल के अनुसार, बंदियों को परिजन, वकील और परिचित निर्धारित प्रक्रिया के तहत सीलबंद पैकेट में बिस्किट, नमकीन, साबुन, तेल, ब्रश, टूथपेस्ट समेत रोजमर्रा के इस्तेमाल का सामान और कपड़े दे सकते हैं। सामान जमा कराने वाले व्यक्ति का पंजीकरण भी किया जाता है, ताकि उसकी जानकारी जेल प्रशासन के पास दर्ज रहे।
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सूची में नाम नहीं, ओम वर्मा को लौटना पड़ा

श्रद्धा और रश्मि से मिलने के लिए सोमवार सुबह निराला नगर के त्रिवेणी नगर स्थित शिवलोक निवासी ओम वर्मा भी कपड़े और कुछ जरूरी सामान लेकर जेल पहुंचे। उन्होंने आधार कार्ड और मोबाइल नंबर दर्ज कराकर मुलाकात के लिए पंजीकरण कराया लेकिन उन्हें बिना मिले ही लौटना पड़ा। जेल सूत्रों के मुताबिक, श्रद्धा की ओर से मुलाकात के लिए दी गई सूची में ओम वर्मा का नाम नहीं था। इस वजह से उनका पुलिस सत्यापन भी नहीं हो सका। जेल प्रशासन ने मुलाकात की अनुमति देने के साथ उनके लाए सामान को जमा करने से भी इन्कार कर दिया।


सप्ताह में एक दिन वकीलों से मुलाकात
जेल मैनुअल के तहत श्रद्धा और रश्मि अपने मामले से संबंधित जानकारी लेने के लिए सप्ताह में एक दिन वकीलों से मुलाकात कर सकेंगी। वकीलों की मुलाकात आम लोगों से अलग और निर्धारित प्रक्रिया के तहत कराई जाती है। इसमें केवल अधिवक्ताओं को ही बंदियों से मिलने की अनुमति होती है।
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