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Lucknow News: बाढ़ ने छीना ग्राहकों का रास्ता दुकानदारों की फंस गई पूंजी
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मंदिर के पास दुकान पर सन्नाटा।
लखनऊ। फैजुल्लागंज के बाढ़ प्रभावित इलाकों में परेशानी सिर्फ पानी से घिरे घरों तक सीमित नहीं है। आसपास के बाजारों के दुकानदार भी बाढ़ की मार झेल रहे हैं। जिन कॉलोनियों के लोगों से उनकी दुकानदारी चलती थी, वहां पानी भरने से ग्राहक दुकानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। नवरात्र, करवा चौथ और दिवाली तक के लिए सामान जुटाने वाले दुकानदारों को अब पूंजी डूबने की चिंता सता रही है।
फैजुल्लागंज में जुड़वा मंदिर के पास इंदु जायसवाल पूजन सामग्री और कॉस्मेटिक की दुकान चलाती हैं। बाढ़ आने के बाद से वह रोज दुकान खोल रही हैं, लेकिन ग्राहक नदारद हैं। इंदु ने बताया कि त्योहारों को देखते हुए उन्होंने 10 दिन पहले ही करीब दो लाख का सामान मंगा लिया था। अब हालात ऐसे हैं कि पूरा दिन गुजर जाता है। बोहनी तक नहीं होती।
जुड़वा मंदिर के पास जगदीश तिवारी की भी पूजन सामग्री की दुकान है। बेटी मानसी भी दुकान पर उनका हाथ बटाती है। उसने बताया कि पूरे दिन दुकान पर कोई ग्राहक नहीं आया। यही स्थिति आसपास की अन्य दुकानों की भी है। दुकानदारों का कहना है कि बाढ़ का पानी जिन कॉलोनियों में भरा है, वहीं से उनके अधिकांश ग्राहक आते हैं। रास्ते बंद होने और लोगों के घरों में फंसे होने से बाजार की रौनक गायब है। त्योहार का सीजन होने के बावजूद बिक्री ठप है और दुकानदारों के सामने खर्च निकालने का संकट खड़ा हो गया है।
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फैजुल्लागंज में जुड़वा मंदिर के पास इंदु जायसवाल पूजन सामग्री और कॉस्मेटिक की दुकान चलाती हैं। बाढ़ आने के बाद से वह रोज दुकान खोल रही हैं, लेकिन ग्राहक नदारद हैं। इंदु ने बताया कि त्योहारों को देखते हुए उन्होंने 10 दिन पहले ही करीब दो लाख का सामान मंगा लिया था। अब हालात ऐसे हैं कि पूरा दिन गुजर जाता है। बोहनी तक नहीं होती।
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जुड़वा मंदिर के पास जगदीश तिवारी की भी पूजन सामग्री की दुकान है। बेटी मानसी भी दुकान पर उनका हाथ बटाती है। उसने बताया कि पूरे दिन दुकान पर कोई ग्राहक नहीं आया। यही स्थिति आसपास की अन्य दुकानों की भी है। दुकानदारों का कहना है कि बाढ़ का पानी जिन कॉलोनियों में भरा है, वहीं से उनके अधिकांश ग्राहक आते हैं। रास्ते बंद होने और लोगों के घरों में फंसे होने से बाजार की रौनक गायब है। त्योहार का सीजन होने के बावजूद बिक्री ठप है और दुकानदारों के सामने खर्च निकालने का संकट खड़ा हो गया है।
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