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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Five-day festival will start from today with Dhan Trayodashi, best Muhurta in Pradosh period for shopping and worship of Dhanteras

धन त्रयोदशी के साथ आज से शुरू होगा पांच दिवसीय महापर्व, धनतेरस की खरीदारी और पूजन के लिए प्रदोष काल में सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त

Tue, 02 Nov 2021 10:51 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 02 Nov 2021 10:51 AM IST
सार

महापर्व की इस श्रृंखला में धनतेरस व नरक चतुर्दशी, हनुमान जयंती, दीपावली, काली पूजा, अन्नकूट, गोवर्धन पूजा, भइया दूज, चित्रगुप्त जयंती मनाई जाती है।

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Five-day festival will start from today with Dhan Trayodashi, best Muhurta in Pradosh period for shopping and worship of Dhanteras
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media

विस्तार

पांच दिवसीय दीप पर्व की शुरुआत दो नवंबर को धन त्रयोदशी और धनवंतरी जयंती के साथ होगी। कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी से चलने वाला पांच दिवसीय महापर्व कार्तिक शुक्ल द्वितीया तक चलेगा। महापर्व की इस श्रृंखला में धनतेरस व नरक चतुर्दशी, हनुमान जयंती, दीपावली, काली पूजा, अन्नकूट, गोवर्धन पूजा, भइया दूज, चित्रगुप्त जयंती मनाई जाती है। शुभ-लाभ की कामना के साथ जनमानस के लिए पूजन-खरीदारी, आराधना-साधना के मुहूर्त-संयोग का अपना विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, विशेष व शुभ फल की प्राप्ति के लिए विधि-विधान का पालन श्रेयस्कर होता है।

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शाम 5.23 से 7.57 तक प्रदोष काल, यम पंचक व गोत्रिरात्रि योग भी
आचार्य राधेश्याम शास्त्री के मुताबिक, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को धनतेरस व धनवंतरी जयंती मनाई जाएगी। यम पंचक भी इसी दिन से शुरू हो रहा है, जो छह नवंबर को भाई दूज तक चलेगा। इसी के साथ गो त्रिरात्रि का योग भी बन रहा है। मान्यता है कि धंवंतरी वैद्य समुद्र मंथन में इसी दिन अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कलश से लक्ष्मी का अवतरण हुआ था। उसी केप्रतीक स्वरूप ऐश्वर्य वृद्धि के लिए बर्तन, स्वर्ण, रजत आभूषण खरीदने की परंपरा चली आ रही है। प्रदोष काल शाम 5.23 से 7.57 तक का समय सर्वश्रेष्ठ है पूजन के लिए।
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ये मुहूर्त भी खरीदारी के लिए शुभ
ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के मुताबिक, खरीदारी के शुभ मुहुर्त कु छ अन्य भी हैं
अभिजीत मुहुर्त: दिन में 11.27 से 12.12 तक
गोधूलि बेला: शाम 5.12 से 5.36 तक
वृषभ काल: शाम 6.05 से 8.01 तक
निशिता मुहूर्त: रात्रि 11.24 से 12.16 तक

नरक चतुर्दशी-हनुमान जयंती कल
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी बुधवार को है। इस दिन रूप चतुर्दशी और हनुमान जयंती भी मनाई जाती है। एक तरफ नरक से मुक्ति के लिए प्रात:कालतेल लगाकर स्नान करने की मान्यता है तो दूसरी ओर सुंदरता की कामना के लिए श्रीकृष्ण के पूजन का विधान है। साथ ही संध्याकाल में चार बत्तियों वाले दीपक जलाकर यमराज के लिए दीपदान भी करने की परंपरा है। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को मेष लग्न में हनुमान जी का जन्म हुआ था, इसी कारण यह दिन उनकी जंयती के रूप में मनाया जाता है।
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दीपावली पर प्रदोष काल व स्वाति नक्षत्र का बन रहा शुभ संयोग
आचार्य शास्त्री केमुताबिक, चार नवंबर को कार्तिक अमावस्या प्रात: 6.04 से रात्रि में 26.44 (2.44) तक है। इसके बाद प्रतिपदा शुरू होगी। इसी दिन प्रात: 7.42 से स्वाति नक्षत्र का शुभ संयोग शुरू होगा, जो 5 नवंबर की प्रात: 5.07 मिनट तक रहेगा। चार तारीख को प्रदोष काल में शाम 17.21 से 19.6 तक दीपावली पूजन के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त है।

इस प्रदोष काल में स्थिर लग्न वृष 17.58 से 19.56 तक मिल रहा है, जो महालक्ष्मी पूजन के लिए सर्वोत्तम है। प्रदोष काल में ही अमृत की चौघड़िया 17.21 से 18.58 तक और लाभ की चौघड़िया 23.49 से 25.26 तक है। वहीं महानिशीथ काल 23.23 से 24.15 तक है। मान्यता है कि दीपावली केपूजन के लिए प्रदोष काल व महानिशीथकाल मुख्य है। खाता-बसना पूजन, परिवर्तन, समस्त वाणिज्यिक कार्यो का संपादन श्रेष्ठ रहेगा।

अन्य प्रमुख पूजन व मुहूर्त इस प्रकार हैं
अन्नकूट व गोवर्धन पूजा : पांच नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन विशाखा नक्षत्र रात में 26.22 तक है, इसमें आयुष्मान योग का संयोग प्रात: 7.12 तक और उसके बाद सौभाग्य योग है।

भैया दूज छह नवंबर को: द्वितीया तिथि को छह नवंबर को ही प्रात: 6.20 बजे से सूर्यास्त 17.20 तक भैया दूज मनाई जोगी। इसी दिन यमराज, यमदूतों व भगवान चित्रगुप्त की पूजा का प्रावधान है।

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