पीलीभीत में खुलेगा यूपी का पहला टाइगर रेस्क्यू सेंटर, आबादी में घुसने वाले बाघों की होगी धरपकड़
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यूपी का पहला टाइगर रेस्क्यू सेंटर पीलीभीत में खुलेगा। रेस्क्यू सेंटर खुलने से आबादी क्षेत्र में घुसने वाले बाघों को जंगल से निकलते ही कैप्चर कर लिया जाएगा। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के इर्द-गिर्द रहने वाले लोगों के लिए यह राहत भरी खबर है। इसमें स्थानीय लोगों को बाघों के हमले से बचाने में मदद मिलेगी।
रेस्क्यु सेंटर में बाघों के खाने-पीने की विशेष व्यवस्था के साथ डॉक्टरों का एक पैनल भी होगा। प्रदेश के प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव) एसके उपाध्याय ने बताया कि टाइगर रेस्क्यू सेंटर की डीपीआर बनाने में वक्त लगेगा, फिर भी इस सेंटर को तत्काल शुरू करने के लिए शासन को 3.5 करोड़ रुपये की डिमांड भेजी गई है। इसमें 15-20 टाइगर रखने की व्यवस्था होगी।
703 वर्ग किमी में फैला है पीलीभीत का टाइगर रिजर्व
पीलीभीत का टाइगर रिजर्व 70 हजार हेक्टेयर (703 वर्ग किमी.) में फैला है, लेकिन इसका थोड़ा हिस्सा 3 से 5 किलोमीटर ही चौड़ा है। इस हिस्से में जो भी टाइगर चौड़ाई की दिशा में इधर या उधर होता है, वो आबादी में पहुंच जाता है। जिससे इंसानों पर बाघ के हमले की घटनाएं होती रहती हैं। इसलिए इन बाघों को आबादी में आने से रोकना बहुत जरूरी हो गया है।
राज्य सरकार ने यहां टाइगर सफारी भी बनाने का फैसला किया है। लेकिन सेंट्रल जू अथॉरिटी व सुप्रीम कोर्ट की अनुमति मिलने में देरी से सफारी बनाने में वक्त लगेगा। इसे देखते हुए तब तक के लिए वन विभाग ने 10 हेक्टेयर क्षेत्र में टाइगर रेस्क्यू सेंटर खोलने का फैसला किया है।
सोलर फेंसिंग कारगर उपाय नहीं
बाघ को आबादी वाले इलाकों में बढ़ने से रोकने के लिए 100 किमी लंबी सोलर फेंसिंग करने का फैसला किया गया है। चालू वित्त वर्ष में इसमें से 25 किलोमीटर फेंसिंग पूरी करने का लक्ष्य है, पर वन विशेषज्ञों का कहना है कि सोलर फेंसिंग से बाघों को आबादी क्षेत्र में बढ़ने से नहीं रोका जा सकता। वे कूदकर फेंसिंग के उस पार आसानी से चले जाएंगे।
पीलीभीत में बाघों की संख्या बढ़कर 50 हुई
2014 में जहां पीलीभीत में 28 टाइगर थे, वहीं 2017 में इनकी संख्या बढ़कर 50 हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में इनकी संख्या में और इजाफा होगा। इसलिए इनकी देखभाल के लिए बेहतर इंतजाम जरूरी है।